KVS Admissions 2022: केंद्र सरकार ने गुरुवार, 10 मार्च को उच्च न्यायालय में केंद्रीय विद्या संगठन के फैसले के बचाव किया है, जिसमें कहा गया है कि केंद्रीय विद्यालय ने कक्षा 1 में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा को 6 वर्ष करने का निर्णय लिया है। केंद्र ने केवीएस के इस फैसले का बचाव इसलिए किया है क्योंकि यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार किया गया था।
केंद्र ने न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ को बताया कि उम्र को 6 साल में बदलने का निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार लिया गया है। एनईपी 2020 के तहत सभी सरकारी स्कूल, विशेष रूप से केंद्रीय विद्यालय इस निर्णय का पालन करने के लिए बाध्य है। बता दें कि पहले एडमिशन के लिए आयु सीमा 5 साल थी।
एनईपी 2020 नीति में 10+2 प्रणाली को 5+3+3+4 प्रणाली से बदल दिया गया था। इसमें प्रारंभिक पांच वर्षों में से पहले 3 साल प्री स्कूल यानी नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी के लिए हैं। जबकि बाकी के दो साल क्लास 1 और 2 के लिए हैं। इस प्रणाली का पालन करने से कक्षा 1 में प्रवेश करने वाले बच्चे की आयु छह वर्ष होगी।
केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने कहा कि राज्यों को एनईपी अपनाने के लिए कहा गया है। इसमें से 21 राज्य ऐसे हैं जहां छह वर्ष के नियम का पालन किया जा रहा है। इसपर दिल्ली सरकार के वकील ने कहा है कि केवीएस द्वारा लिए गए निर्णय में इसकी कोई भूमिका नहीं है और दिल्ली सरकार के स्कूलों में कक्षा 1 में प्रवेश के लिए आयु मानदंड 5 से 6 वर्ष है। कोर्ट ने मामले को 14 मार्च, 2022 को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
केवीएस कक्षा 1 के छात्रों के प्रवेश मानदंड को चुनौती देते हुए 2 मार्च, 2022 को याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने अपनी 5 साल की बेटी की ओर से केस दायर करते हुए दावा किया कि नई आयु नीति में संशोधन शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के अनुच्छेद 14, 21 और 21 ए का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने आगे दावा किया कि आयु सीमा में नया संशोधन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने से महज चार दिन पहले किया गया था।
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KVS Admissions 2022: केंद्र सरकार ने गुरुवार, 10 मार्च को उच्च न्यायालय में केंद्रीय विद्या संगठन के फैसले के बचाव किया है, जिसमें कहा गया है कि केंद्रीय विद्यालय ने कक्षा 1 में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा को 6 वर्ष करने का निर्णय लिया है। केंद्र ने केवीएस के इस फैसले का बचाव इसलिए किया है क्योंकि यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार किया गया था।
केंद्र ने न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ को बताया कि उम्र को 6 साल में बदलने का निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार लिया गया है। एनईपी 2020 के तहत सभी सरकारी स्कूल, विशेष रूप से केंद्रीय विद्यालय इस निर्णय का पालन करने के लिए बाध्य है। बता दें कि पहले एडमिशन के लिए आयु सीमा 5 साल थी।
एनईपी 2020 नीति में 10+2 प्रणाली को 5+3+3+4 प्रणाली से बदल दिया गया था। इसमें प्रारंभिक पांच वर्षों में से पहले 3 साल प्री स्कूल यानी नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी के लिए हैं। जबकि बाकी के दो साल क्लास 1 और 2 के लिए हैं। इस प्रणाली का पालन करने से कक्षा 1 में प्रवेश करने वाले बच्चे की आयु छह वर्ष होगी।
केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने कहा कि राज्यों को एनईपी अपनाने के लिए कहा गया है। इसमें से 21 राज्य ऐसे हैं जहां छह वर्ष के नियम का पालन किया जा रहा है। इसपर दिल्ली सरकार के वकील ने कहा है कि केवीएस द्वारा लिए गए निर्णय में इसकी कोई भूमिका नहीं है और दिल्ली सरकार के स्कूलों में कक्षा 1 में प्रवेश के लिए आयु मानदंड 5 से 6 वर्ष है। कोर्ट ने मामले को 14 मार्च, 2022 को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
केवीएस कक्षा 1 के छात्रों के प्रवेश मानदंड को चुनौती देते हुए 2 मार्च, 2022 को याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने अपनी 5 साल की बेटी की ओर से केस दायर करते हुए दावा किया कि नई आयु नीति में संशोधन शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के अनुच्छेद 14, 21 और 21 ए का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने आगे दावा किया कि आयु सीमा में नया संशोधन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने से महज चार दिन पहले किया गया था।
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