Tuesday, March 15, 2022

पिछले 5 सालों में अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को मिली 3.08 करोड़ से अधिक स्कॉलरशिप, संसद में मंत्री ने कही यह बात, जानें डिटेल्स

साल 2016 से 2021 के बीच अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को 3.08 करोड़ से अधिक छात्रवृत्तियां स्वीकृत की गई हैं। इसमें से मुस्लिम समुदाय के छात्रों के लिए 2.3 करोड़ से अधिक छात्रवृत्तियां स्वीकृत की गई हैं। इसके बाद ईसाई (37.2 लाख), सिख (25.40 लाख), बौद्ध (7.4 लाख), जैन (4 लाख) और पारसी (4828) समुदाय के छात्रों को छात्रवृत्ति मिली है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने संसद में उठाए गए एक सवाल के जवाब में बताया कि चार स्कॉलरशिप स्कीम जो प्री और पोस्ट-मैट्रिक एजुकेशन से लेकर पीएचडी स्तर तक और टेक्निकल और प्रोफेशनल एजुकेशन में योग्य छात्रों का सहयोग करती हैं, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 2016 से 2021 के बीच स्कॉलरशिप के लिए 9,904 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया है।

योजनाओं का विवरण देते हुए मंत्रालय ने संसद को सूचित किया कि प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम (कक्षा 1 से कक्षा 10 के लिए) का लाभ उठाने के लिए छात्र के माता-पिता / अभिभावक की वार्षिक आय 1 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए और छात्र पिछली कक्षा में न्यूनतम 50% अंकों से पास होना चाहिए। चारों स्कॉलरशिप स्कीम के लिए छात्रों का न्यूनतम अंक 50% ही तय किया गया है लेकिन वार्षिक आय मानदंड अलग है।

पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम 11वीं और 12वीं स्तर के टेक्निकल और प्रोफेशनल कोर्स सहित 11वीं से पीएचडी तक के योग्य छात्रों पर लागू होती है। वहीं, योग्यता-सह-साधन आधारित छात्रवृत्ति योजना अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट लेवल पर टेक्निकल और प्रोफेशनल कोर्स के लिए है। जबकि, बेगम हजरत महल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना कक्षा 9वीं से 12वीं तक की मेधावी अल्पसंख्यक छात्राओं के लिए है।

साल 2019 में दूसरी बार भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने उसी साल जून में कहा था कि मंत्रालय की योजना अगले पांच सालों में पांच करोड़ छात्रों को ‘प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति’ प्रदान करने की है, जिसमें 50% छात्राएं शामिल होंगी। मौजूदा चार योजनाओं में सालाना दी जाने वाली औसत स्कॉलरशिप लगभग 65 लाख है, जिसमें प्री और पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्रालय अगले दो सालों में पांच करोड़ के लक्ष्य को पूरा करने के लिए आशान्वित है। आने वाले महीनों में स्कॉलरशिप की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है क्योंकि सरकार इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने पर काम कर रही है।



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साल 2016 से 2021 के बीच अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को 3.08 करोड़ से अधिक छात्रवृत्तियां स्वीकृत की गई हैं। इसमें से मुस्लिम समुदाय के छात्रों के लिए 2.3 करोड़ से अधिक छात्रवृत्तियां स्वीकृत की गई हैं। इसके बाद ईसाई (37.2 लाख), सिख (25.40 लाख), बौद्ध (7.4 लाख), जैन (4 लाख) और पारसी (4828) समुदाय के छात्रों को छात्रवृत्ति मिली है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने संसद में उठाए गए एक सवाल के जवाब में बताया कि चार स्कॉलरशिप स्कीम जो प्री और पोस्ट-मैट्रिक एजुकेशन से लेकर पीएचडी स्तर तक और टेक्निकल और प्रोफेशनल एजुकेशन में योग्य छात्रों का सहयोग करती हैं, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 2016 से 2021 के बीच स्कॉलरशिप के लिए 9,904 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया है।

योजनाओं का विवरण देते हुए मंत्रालय ने संसद को सूचित किया कि प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम (कक्षा 1 से कक्षा 10 के लिए) का लाभ उठाने के लिए छात्र के माता-पिता / अभिभावक की वार्षिक आय 1 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए और छात्र पिछली कक्षा में न्यूनतम 50% अंकों से पास होना चाहिए। चारों स्कॉलरशिप स्कीम के लिए छात्रों का न्यूनतम अंक 50% ही तय किया गया है लेकिन वार्षिक आय मानदंड अलग है।

पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम 11वीं और 12वीं स्तर के टेक्निकल और प्रोफेशनल कोर्स सहित 11वीं से पीएचडी तक के योग्य छात्रों पर लागू होती है। वहीं, योग्यता-सह-साधन आधारित छात्रवृत्ति योजना अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट लेवल पर टेक्निकल और प्रोफेशनल कोर्स के लिए है। जबकि, बेगम हजरत महल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना कक्षा 9वीं से 12वीं तक की मेधावी अल्पसंख्यक छात्राओं के लिए है।

साल 2019 में दूसरी बार भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने उसी साल जून में कहा था कि मंत्रालय की योजना अगले पांच सालों में पांच करोड़ छात्रों को ‘प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति’ प्रदान करने की है, जिसमें 50% छात्राएं शामिल होंगी। मौजूदा चार योजनाओं में सालाना दी जाने वाली औसत स्कॉलरशिप लगभग 65 लाख है, जिसमें प्री और पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्रालय अगले दो सालों में पांच करोड़ के लक्ष्य को पूरा करने के लिए आशान्वित है। आने वाले महीनों में स्कॉलरशिप की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है क्योंकि सरकार इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने पर काम कर रही है।

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