UPSC Success Story: कहते हैं कि जो शख्स बिना रुके अपनी मंजिल की ओर बढ़ता रहता है, वह एक दिन जरूर सफलता को हासिल कर लेता है। IAS डी बाला नागेंद्रन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
डी बाला नागेंद्रन जन्म से ही 100 फीसदी दृष्टिहीन हैं लेकिन उन्होंने बचपन से ही सिविल सेवा में जाने का सपना देखा और अपने इस सपने को पूरा भी किया।
डी बाला ने साल 2011 में सिविल सेवा की तैयारी शुरू की थी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और साल 2019 में 9वें अटेंप्ट में 659वीं रैंक हासिल करके IAS बने।
साल 2016 में बाला ने अपने 5वें अटेंप्ट में यूपीएससी की परीक्षा तो पास कर ली थी, लेकिन इस दौरान उनकी 927वीं रैंक आई थी। मनपसंद कैडर नहीं मिलने की वजह से उन्होंने सर्विस ज्वाइन नहीं की और फिर से तैयारी में लग गए। वह शुरू से ही IAS बनना चाहते थे। इसके बाद उन्होंने जो अटेंप्ट दिए, उसमें वह फिर फेल हो गए और आखिरकार अपने 9वें अटेंप्ट में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास की।
बाला बचपन से ही पढ़ने में होशियार थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई चेन्नई के लिटिल फ्लावर कान्वेंट और रामा कृष्णा मिशन स्कूल से हुई है। इसके बाद उन्होंने चेन्नई के लोयला कॉलेज से बीकॉम किया है।
बाला के पिता भारतीय सेना से रिटायर हो चुके हैं और उनकी मां हाउसवाइफ हैं। हालांकि अब बाला के पिता चेन्नई में एक टैक्सी चालक के रूप में काम कर रहे हैं।
बाला का कहना है कि दृष्टिहीन होना उनके लिए एक शक्ति है, क्योंकि उनके इस दोष ने उन्हें लोगों को बेहतर तरीके से जानने में मदद की है। उनका ये भी कहना है कि वह कई बार यूपीएससी की परीक्षा में फेल हुए लेकिन उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि उन्हें अपनी तैयारी को बंद करना चाहिए।
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UPSC Success Story: कहते हैं कि जो शख्स बिना रुके अपनी मंजिल की ओर बढ़ता रहता है, वह एक दिन जरूर सफलता को हासिल कर लेता है। IAS डी बाला नागेंद्रन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
डी बाला नागेंद्रन जन्म से ही 100 फीसदी दृष्टिहीन हैं लेकिन उन्होंने बचपन से ही सिविल सेवा में जाने का सपना देखा और अपने इस सपने को पूरा भी किया।
डी बाला ने साल 2011 में सिविल सेवा की तैयारी शुरू की थी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और साल 2019 में 9वें अटेंप्ट में 659वीं रैंक हासिल करके IAS बने।
साल 2016 में बाला ने अपने 5वें अटेंप्ट में यूपीएससी की परीक्षा तो पास कर ली थी, लेकिन इस दौरान उनकी 927वीं रैंक आई थी। मनपसंद कैडर नहीं मिलने की वजह से उन्होंने सर्विस ज्वाइन नहीं की और फिर से तैयारी में लग गए। वह शुरू से ही IAS बनना चाहते थे। इसके बाद उन्होंने जो अटेंप्ट दिए, उसमें वह फिर फेल हो गए और आखिरकार अपने 9वें अटेंप्ट में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास की।
बाला बचपन से ही पढ़ने में होशियार थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई चेन्नई के लिटिल फ्लावर कान्वेंट और रामा कृष्णा मिशन स्कूल से हुई है। इसके बाद उन्होंने चेन्नई के लोयला कॉलेज से बीकॉम किया है।
बाला के पिता भारतीय सेना से रिटायर हो चुके हैं और उनकी मां हाउसवाइफ हैं। हालांकि अब बाला के पिता चेन्नई में एक टैक्सी चालक के रूप में काम कर रहे हैं।
बाला का कहना है कि दृष्टिहीन होना उनके लिए एक शक्ति है, क्योंकि उनके इस दोष ने उन्हें लोगों को बेहतर तरीके से जानने में मदद की है। उनका ये भी कहना है कि वह कई बार यूपीएससी की परीक्षा में फेल हुए लेकिन उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि उन्हें अपनी तैयारी को बंद करना चाहिए।
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