Saturday, December 4, 2021

अब मेरिट पर नहीं होगा दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन? पैनल ने CET का किया समर्थन, यह है बड़ी वजह

सुकृता बरुआ.

दिल्ली विश्वविद्यालय अब मेरिट के आधार पर एडमिशन देने के बजाय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से एडमिशन देने पर विचार कर रही है। एडमिशन की प्रक्रिया में संभावित बदलाव को लेकर बनाई गई कमेटी ने इसकी सिफारिश की है। इसके पीछे की बड़ी वजह अधिक नंबर देने वाले कुछ बोर्डों के विद्यार्थियों को बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय में प्रवेश मिलना है। 

अलग अलग बोर्डों के छात्रों को दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान मिलने वाले असमान अवसरों को चिन्हित करते हुए एडमिशन संबंधी मुद्दों की जांच के गठित पैनल ने कहा कि विश्वविद्यालय में एडमिशन के लिए सामान्य प्रवेश परीक्षा (CET) आयोजित की जाए। इस परीक्षा को विश्वविद्यालय की आंतरिक व्यवस्था या किसी बाहरी एजेंसी के माध्यम से आयोजित किया जा सकता है। 

इस बार दिल्ली विश्वविद्यालय में मेरिट के आधार पर हुए एडमिशन के दौरान दूसरी सूची जारी होने तक सीबीएसई, केरल बोर्ड, हरियाणा बोर्ड, आईसीएसई और राजस्थान बोर्ड के बच्चों को सबसे ज्यादा एडमिशन मिला। दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले केरल बोर्ड के विद्यार्थियों में से करीब 39.18% को प्रवेश मिला। वहीं राजस्थान बोर्ड के लिए यह आंकड़ा 27.75%, हरियाणा बोर्ड के लिए 18.39%, आईसीएसई के लिए 16.63% और सीबीएसई के लिए 16.47% रहा।

इन पांचों बोर्डों में भी काफी असमानता देखने को मिली। प्रवेश पाने वाले छात्रों के औसत प्रतिशत में भी काफी अंतर रहा। केरल बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए औसत प्रतिशत 98.43% रहा। जबकि राजस्थान और हरियाणा बोर्ड के लिए 94.68% और 92.69% रहा। वहीं सीबीएसई के लिए औसत प्रतिशत 91.3% और आईसीएसई के लिए 92.33% रहा है। इन्हीं असमानताओं को देखते हुए एडमिशन संबंधी मुद्दों को लेकर बनाई गई कमेटी ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय को एक केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के नाते एडमिशन के दौरान सभी बोर्डों के विद्यार्थियों को उचित और बराबर अवसर देना उसकी जिम्मेदारी है।

डीन डीएस रावत की अध्यक्षता में बनाई गई नौ सदस्यीय कमेटी ने ही यह सिफारिश की है। इस कमेटी का गठन अक्टूबर में किया गया था और स्नातक एडमिशन के लिए वैकल्पिक रणनीति का सुझाव देने के लिए कहा गया था। समिति ने सिफारिश की है कि सभी कॉलेजों और विभागों में प्रवेश के लिए योग्य उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद एक एडमिशन टेस्ट आयोजित किया जाए। साथ ही समिति ने यह भी कहा कि इससे सभी को एक न्यायसंगत अवसर मिलेगा।

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सुकृता बरुआ.

दिल्ली विश्वविद्यालय अब मेरिट के आधार पर एडमिशन देने के बजाय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से एडमिशन देने पर विचार कर रही है। एडमिशन की प्रक्रिया में संभावित बदलाव को लेकर बनाई गई कमेटी ने इसकी सिफारिश की है। इसके पीछे की बड़ी वजह अधिक नंबर देने वाले कुछ बोर्डों के विद्यार्थियों को बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय में प्रवेश मिलना है। 

अलग अलग बोर्डों के छात्रों को दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान मिलने वाले असमान अवसरों को चिन्हित करते हुए एडमिशन संबंधी मुद्दों की जांच के गठित पैनल ने कहा कि विश्वविद्यालय में एडमिशन के लिए सामान्य प्रवेश परीक्षा (CET) आयोजित की जाए। इस परीक्षा को विश्वविद्यालय की आंतरिक व्यवस्था या किसी बाहरी एजेंसी के माध्यम से आयोजित किया जा सकता है। 

इस बार दिल्ली विश्वविद्यालय में मेरिट के आधार पर हुए एडमिशन के दौरान दूसरी सूची जारी होने तक सीबीएसई, केरल बोर्ड, हरियाणा बोर्ड, आईसीएसई और राजस्थान बोर्ड के बच्चों को सबसे ज्यादा एडमिशन मिला। दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले केरल बोर्ड के विद्यार्थियों में से करीब 39.18% को प्रवेश मिला। वहीं राजस्थान बोर्ड के लिए यह आंकड़ा 27.75%, हरियाणा बोर्ड के लिए 18.39%, आईसीएसई के लिए 16.63% और सीबीएसई के लिए 16.47% रहा।

इन पांचों बोर्डों में भी काफी असमानता देखने को मिली। प्रवेश पाने वाले छात्रों के औसत प्रतिशत में भी काफी अंतर रहा। केरल बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए औसत प्रतिशत 98.43% रहा। जबकि राजस्थान और हरियाणा बोर्ड के लिए 94.68% और 92.69% रहा। वहीं सीबीएसई के लिए औसत प्रतिशत 91.3% और आईसीएसई के लिए 92.33% रहा है। इन्हीं असमानताओं को देखते हुए एडमिशन संबंधी मुद्दों को लेकर बनाई गई कमेटी ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय को एक केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के नाते एडमिशन के दौरान सभी बोर्डों के विद्यार्थियों को उचित और बराबर अवसर देना उसकी जिम्मेदारी है।

डीन डीएस रावत की अध्यक्षता में बनाई गई नौ सदस्यीय कमेटी ने ही यह सिफारिश की है। इस कमेटी का गठन अक्टूबर में किया गया था और स्नातक एडमिशन के लिए वैकल्पिक रणनीति का सुझाव देने के लिए कहा गया था। समिति ने सिफारिश की है कि सभी कॉलेजों और विभागों में प्रवेश के लिए योग्य उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद एक एडमिशन टेस्ट आयोजित किया जाए। साथ ही समिति ने यह भी कहा कि इससे सभी को एक न्यायसंगत अवसर मिलेगा।

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