देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के नामी शिक्षण संस्थानों में शामिल जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (JNU) की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने छात्रों व छात्राओं को यौन उत्पीड़न “क्या करें और क्या न करें” को लेकर मासिक परामर्श सत्र को आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसमें लड़के व लड़कियों दोनों को यौन उत्पीड़न से बचने की जानकारी भी मुहैया कराई जाएगी।
विश्वविद्यालय की वेबसाइट के मुताबिक, आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee) आगामी 17 जनवरी को निर्धारित पहला ऐसा सत्र आयोजित करेगी। यह सत्र लड़कियों व लड़कों दोनों को यौन उत्पीड़न के बारे में जागरूक करने के लिए आयोजित किया जाएगा। आईसीसी का कहना है कि हालांकि ऐसे कई काउंसलिंग ओरिएंटेशन प्रोग्राम पहले भी आयोजित हो चुके हैं लेकिन एक बार फिर से छात्रों व छात्राओं को इस बारे में अपनी समझ को और ताजा करने की जरूरत है।
इसमें यह भी कहा गया है कि इस तरह के सत्रों की आवश्यकता है, क्योंकि लड़कियों को पता होना चाहिए कि ऐसे किसी भी तरह के उत्पीड़न से बचने के लिए (लड़कियों व उनके पुरुष मित्रों के बीच) एक ठोस रेखा कैसे खींचनी है।
जेएनयू की आईसीसी (ICC) की पीठासीन अधिकारी पूनम अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, हमें इस तरह की कई शिकायतें मिलती रही हैं, जहां युवतियों और युवकों के बीच यौन उत्पीड़न के मामले होते हैं जो कि करीबी दोस्त होते हैं। वे एक-दूसरे को छूते है और गले लगाते हैं। लेकिन जैसे ही युवतियों/महिलाओं को लगता है कि यह सहज नहीं है तो उन्हें तत्काल इस बारे में अपने पुरुष मित्र को बता देना चाहिए। लेकिन वे अगर इस बारे में नहीं बोलती हैं और अपने तक ही इस बात को सीमित रखती हैं तो यह काम नहीं करता है।
ऐसे में लड़कों और लड़कियों दोनों को यह जानना बहुत जरूरी है कि हमें एक ठोस रेखा कहां खींचनी है। साथ ही लड़कियों को भी यह समझने की जरूरत है कि अगर उन्हें अपने पुरुष मित्रों के साथ (गले लगाना व छूना) सहज महसूस नहीं हो रहा है तो स्पष्ट रूप से उन्हें बताना होगा। नहीं तो सामने वाले इंसान को कैसे पता होगा कि आप क्या चाहते हैं? यही छोटी-छोटी बातें हैं जिनके बारे में हम आईसीसी के आगामी सत्र में नियमों के साथ-साथ बताएंगे।
ICC की इसी घोषणा में आगे कहा गया है कि, दो करीबी दोस्तों के बीच यौन उत्पीड़न के ऐसे कई मामले आंतरिक शिकायत समिति के सामने आएं है, जहां आमतौर पर कभी-कभी अनजाने में लड़के दोस्ती के मजाक और उत्पीड़न के बीच की एक पतली सीमा को लांघ जाते हैं। ऐसे में इस तरह के सत्र छात्रों को “यौन उत्पीड़न क्या है” व “ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर क्या परिणाम हो सकते हैं” के बारे में जानकारी देंगे।
आईसीसी ने कहा है कि इस तरह के परामर्श सत्र के माध्यम से, “ऐसे मामलों की संख्या निश्चित रूप से कम हो जाएगी और यह सत्र “यौन उत्पीड़न से सम्बंधित किसी भी प्रकार के भ्रम को ही दूर करेगा।
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देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के नामी शिक्षण संस्थानों में शामिल जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (JNU) की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने छात्रों व छात्राओं को यौन उत्पीड़न “क्या करें और क्या न करें” को लेकर मासिक परामर्श सत्र को आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसमें लड़के व लड़कियों दोनों को यौन उत्पीड़न से बचने की जानकारी भी मुहैया कराई जाएगी।
विश्वविद्यालय की वेबसाइट के मुताबिक, आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee) आगामी 17 जनवरी को निर्धारित पहला ऐसा सत्र आयोजित करेगी। यह सत्र लड़कियों व लड़कों दोनों को यौन उत्पीड़न के बारे में जागरूक करने के लिए आयोजित किया जाएगा। आईसीसी का कहना है कि हालांकि ऐसे कई काउंसलिंग ओरिएंटेशन प्रोग्राम पहले भी आयोजित हो चुके हैं लेकिन एक बार फिर से छात्रों व छात्राओं को इस बारे में अपनी समझ को और ताजा करने की जरूरत है।
इसमें यह भी कहा गया है कि इस तरह के सत्रों की आवश्यकता है, क्योंकि लड़कियों को पता होना चाहिए कि ऐसे किसी भी तरह के उत्पीड़न से बचने के लिए (लड़कियों व उनके पुरुष मित्रों के बीच) एक ठोस रेखा कैसे खींचनी है।
जेएनयू की आईसीसी (ICC) की पीठासीन अधिकारी पूनम अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, हमें इस तरह की कई शिकायतें मिलती रही हैं, जहां युवतियों और युवकों के बीच यौन उत्पीड़न के मामले होते हैं जो कि करीबी दोस्त होते हैं। वे एक-दूसरे को छूते है और गले लगाते हैं। लेकिन जैसे ही युवतियों/महिलाओं को लगता है कि यह सहज नहीं है तो उन्हें तत्काल इस बारे में अपने पुरुष मित्र को बता देना चाहिए। लेकिन वे अगर इस बारे में नहीं बोलती हैं और अपने तक ही इस बात को सीमित रखती हैं तो यह काम नहीं करता है।
ऐसे में लड़कों और लड़कियों दोनों को यह जानना बहुत जरूरी है कि हमें एक ठोस रेखा कहां खींचनी है। साथ ही लड़कियों को भी यह समझने की जरूरत है कि अगर उन्हें अपने पुरुष मित्रों के साथ (गले लगाना व छूना) सहज महसूस नहीं हो रहा है तो स्पष्ट रूप से उन्हें बताना होगा। नहीं तो सामने वाले इंसान को कैसे पता होगा कि आप क्या चाहते हैं? यही छोटी-छोटी बातें हैं जिनके बारे में हम आईसीसी के आगामी सत्र में नियमों के साथ-साथ बताएंगे।
ICC की इसी घोषणा में आगे कहा गया है कि, दो करीबी दोस्तों के बीच यौन उत्पीड़न के ऐसे कई मामले आंतरिक शिकायत समिति के सामने आएं है, जहां आमतौर पर कभी-कभी अनजाने में लड़के दोस्ती के मजाक और उत्पीड़न के बीच की एक पतली सीमा को लांघ जाते हैं। ऐसे में इस तरह के सत्र छात्रों को “यौन उत्पीड़न क्या है” व “ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर क्या परिणाम हो सकते हैं” के बारे में जानकारी देंगे।
आईसीसी ने कहा है कि इस तरह के परामर्श सत्र के माध्यम से, “ऐसे मामलों की संख्या निश्चित रूप से कम हो जाएगी और यह सत्र “यौन उत्पीड़न से सम्बंधित किसी भी प्रकार के भ्रम को ही दूर करेगा।
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