Success Story: कहते हैं कि संघर्ष करने वाले लोग अपनी मंजिल को पा ही जाते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के गरीब परिवार की बेटी संध्या भिलाला की है।
संध्या के पिता देवचंद भिलाला मजदूरी करते हैं लेकिन आज दुनिया के सामने संध्या ने अपने पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। संध्या का चयन साल 2021 में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में हुआ। उनकी इस सफलता के लिए उनके पिता देवचंद ने बहुत मेहनत की है, लेकिन बेटी की सफलता ने आज सारी मेहनत का ईनाम अपने पिता को सौंप दिया।
संध्या ने खुद भी पढ़ाई करने के लिए दूसरों के खेतों में मजदूरी की लेकिन हार नहीं मानी। सफल होकर संध्या जब अपने जिले में वापस लौटीं तो ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ उनका स्वागत किया। संध्या के पिता राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ तहसील के ग्राम पिपल्या रसोड़ा में रहते हैं। उनकी तीन बेटियां और दो बेटे हैं।
संध्या ने तमाम मुश्किलों के बाद भी अपनी पढ़ाई को जारी रखा और 12वीं पास करने के बाद एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी की। इसके बाद संध्या ने एमए की पढ़ाई पूरी की। यहीं से संध्या सेना में जाने के लिए प्रेरित हुईं और उन्होंने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी।
संध्या दिनभर काम करती थीं और सुबह 5 बजे उठकर दौड़ लगाने जाती थीं। उन्होंने अपनी परेशानियों के आगे घुटने टेकने से मना कर दिया और अपने हौसले से सफलता हासिल की। संध्या ने 7 साल तक कड़ी मेहनत की और आखिर में उनका चयन सीमा सुरक्षा बल के लिए हो गया।
The post Success Story: कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी करती थीं संध्या भिलाला, BSF में हुआ चयन तो खुशी में झूम उठा गांव, जानें संघर्ष की दास्तान appeared first on Jansatta.
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संध्या के पिता देवचंद भिलाला मजदूरी करते हैं लेकिन आज दुनिया के सामने संध्या ने अपने पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। संध्या का चयन साल 2021 में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में हुआ। उनकी इस सफलता के लिए उनके पिता देवचंद ने बहुत मेहनत की है, लेकिन बेटी की सफलता ने आज सारी मेहनत का ईनाम अपने पिता को सौंप दिया।
संध्या ने खुद भी पढ़ाई करने के लिए दूसरों के खेतों में मजदूरी की लेकिन हार नहीं मानी। सफल होकर संध्या जब अपने जिले में वापस लौटीं तो ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ उनका स्वागत किया। संध्या के पिता राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ तहसील के ग्राम पिपल्या रसोड़ा में रहते हैं। उनकी तीन बेटियां और दो बेटे हैं।
संध्या ने तमाम मुश्किलों के बाद भी अपनी पढ़ाई को जारी रखा और 12वीं पास करने के बाद एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी की। इसके बाद संध्या ने एमए की पढ़ाई पूरी की। यहीं से संध्या सेना में जाने के लिए प्रेरित हुईं और उन्होंने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी।
संध्या दिनभर काम करती थीं और सुबह 5 बजे उठकर दौड़ लगाने जाती थीं। उन्होंने अपनी परेशानियों के आगे घुटने टेकने से मना कर दिया और अपने हौसले से सफलता हासिल की। संध्या ने 7 साल तक कड़ी मेहनत की और आखिर में उनका चयन सीमा सुरक्षा बल के लिए हो गया।
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