Monday, April 18, 2022

Bihar ITI Exam 2022: बिहार आईटीआई भाषा परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, जानें कितना देना होगा आवेदन शुल्क

BSEB ITI Exam 2022: बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) ने औद्योगिक प्रशिक्षण उच्च माध्यमिक स्तरीय भाषा (हिंदी और अंग्रेजी) ‌परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया आज यानी 18 अप्रैल 2022 से शुरू कर दिया है। सभी योग्य उम्मीदवार BSEB ITI Language Exam 2022 के लिए आधिकारिक वेबसाइट secondary.biharboardonline.com पर 5 मई 2022 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

BSEB ITI Exam Pattern: ऐसे होगी परीक्षा
आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस परीक्षा में हिंदी और अंग्रेजी के कुल दो पेपर होते हैं।‌ दोनों ही विषयों में छात्रों से 100 अंकों के 100 सवाल पूछे जाएंगे। इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए छात्रों को प्रत्येक विषय में न्यूनतम 30 अंक प्राप्त करना होगा। इस परीक्षा के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर इन स्टेप्स के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

How to apply for BSEB Bihar ITI Language Exam 2022

स्टेप 1: सबसे पहले ऑनलाइन आधिकारिक वेबसाइट secondary.biharboardonline.com पर जाएं।

स्टेप 2: फिर होम पेज पर दिख रहे रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 3: इसके बाद यूजर आईडी और पासवर्ड के माध्यम से लॉगिन करें।

स्टेप 4: अब आवेदन के लिए मांगी गई सभी आवश्यक जानकारी भरें और सबमिट बटन पर क्लिक कर दें।

स्टेप 5: अब परीक्षा के लिए निर्धारित आवेदन शुल्क जमा कर दें।

Bihar ITI Application Fee: इतना देना होगा आवेदन शुल्क
इस परीक्षा में शामिल होने के लिए सामान्य वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को 1176 रुपए आवेदन शुल्क जमा करना होगा। जबकि, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 945 रुपए आवेदन शुल्क देना होगा। विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं।



from Education News Hindi, Latest Educational News In India, Today Education News (एजुकेशन न्यूज़), शिक्षा समाचार, Admit Card, Exam Results | Jansatta https://ift.tt/D6JuFNG
via IFTTT

BSEB ITI Exam 2022: बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) ने औद्योगिक प्रशिक्षण उच्च माध्यमिक स्तरीय भाषा (हिंदी और अंग्रेजी) ‌परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया आज यानी 18 अप्रैल 2022 से शुरू कर दिया है। सभी योग्य उम्मीदवार BSEB ITI Language Exam 2022 के लिए आधिकारिक वेबसाइट secondary.biharboardonline.com पर 5 मई 2022 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

BSEB ITI Exam Pattern: ऐसे होगी परीक्षा
आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस परीक्षा में हिंदी और अंग्रेजी के कुल दो पेपर होते हैं।‌ दोनों ही विषयों में छात्रों से 100 अंकों के 100 सवाल पूछे जाएंगे। इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए छात्रों को प्रत्येक विषय में न्यूनतम 30 अंक प्राप्त करना होगा। इस परीक्षा के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर इन स्टेप्स के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

How to apply for BSEB Bihar ITI Language Exam 2022

स्टेप 1: सबसे पहले ऑनलाइन आधिकारिक वेबसाइट secondary.biharboardonline.com पर जाएं।

स्टेप 2: फिर होम पेज पर दिख रहे रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 3: इसके बाद यूजर आईडी और पासवर्ड के माध्यम से लॉगिन करें।

स्टेप 4: अब आवेदन के लिए मांगी गई सभी आवश्यक जानकारी भरें और सबमिट बटन पर क्लिक कर दें।

स्टेप 5: अब परीक्षा के लिए निर्धारित आवेदन शुल्क जमा कर दें।

Bihar ITI Application Fee: इतना देना होगा आवेदन शुल्क
इस परीक्षा में शामिल होने के लिए सामान्य वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को 1176 रुपए आवेदन शुल्क जमा करना होगा। जबकि, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 945 रुपए आवेदन शुल्क देना होगा। विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं।

NTA JEE 2022: मेन्स परीक्षा के लिए फिर से खुली एप्लीकेशन विंडो, अब इस तारीख तक कर सकते हैं आवेदन

NTA JEE Main 2022: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने ज्वाइंट एंटरेंस एग्जामिनेशन (JEE) मेन्स 2022 के लिए छात्रों को फिर से आवेदन करने का मौका दिया है। सभी योग्य छात्र JEE Main 2022 के लिए आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in के माध्यम से आज यानी 18 अप्रैल 2022 से आवेदन कर सकते हैं। इस परीक्षा के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 25 अप्रैल 2022 निर्धारित की गई है।

JEE Main Exam 2022: इस तारीख को होगी परीक्षा
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा ज्वाइंट एंटरेंस एग्जामिनेशन के पहले सेशन की परीक्षा 20 जून से 29 जून 2022 तक सुबह 9:00 बजे से 12:00 बजे तक और दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा ऑनलाइन मोड में होगी। सभी छात्र आधिकारिक वेबसाइट पर इन स्टेप्स के माध्यम से परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

How to apply for NTA JEE Main 2022 Session 1

स्टेप 1: सबसे पहले छात्र आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जाएं।

स्टेप 2: इसके बाद होम पेज पर दिख रहे ‘Registration for JEE Main 2022’ के लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 3: इसके बाद एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड के माध्यम से लॉगिन करें।

स्टेप 4: फिर आवेदन के लिए मांगी गई सभी आवश्यक जानकारी दें और दस्तावेज अपलोड करें।

स्टेप 5: इसके बाद आवेदन शुल्क जमा करें और फिर आप अपना आवेदन पत्र डाउनलोड करके प्रिंट आउट भी निकाल सकते हैं।

NTA JEE Application: इतना देना होगा आवेदन शुल्क
इस परीक्षा में शामिल होने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 600 रुपए आवेदन शुल्क जमा करना होगा। जबकि, अन्य उम्मीदवारों को 325 रुपए आवेदन शुल्क देना होगा। किसी भी समस्या के समाधान के लिए छात्र एनटीए हेल्पलाइन नंबर 011-40759000 या 011-69227700 पर संपर्क कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर चेक करें।



from Education News Hindi, Latest Educational News In India, Today Education News (एजुकेशन न्यूज़), शिक्षा समाचार, Admit Card, Exam Results | Jansatta https://ift.tt/h4OdEix
via IFTTT

NTA JEE Main 2022: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने ज्वाइंट एंटरेंस एग्जामिनेशन (JEE) मेन्स 2022 के लिए छात्रों को फिर से आवेदन करने का मौका दिया है। सभी योग्य छात्र JEE Main 2022 के लिए आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in के माध्यम से आज यानी 18 अप्रैल 2022 से आवेदन कर सकते हैं। इस परीक्षा के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 25 अप्रैल 2022 निर्धारित की गई है।

JEE Main Exam 2022: इस तारीख को होगी परीक्षा
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा ज्वाइंट एंटरेंस एग्जामिनेशन के पहले सेशन की परीक्षा 20 जून से 29 जून 2022 तक सुबह 9:00 बजे से 12:00 बजे तक और दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा ऑनलाइन मोड में होगी। सभी छात्र आधिकारिक वेबसाइट पर इन स्टेप्स के माध्यम से परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

How to apply for NTA JEE Main 2022 Session 1

स्टेप 1: सबसे पहले छात्र आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जाएं।

स्टेप 2: इसके बाद होम पेज पर दिख रहे ‘Registration for JEE Main 2022’ के लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 3: इसके बाद एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड के माध्यम से लॉगिन करें।

स्टेप 4: फिर आवेदन के लिए मांगी गई सभी आवश्यक जानकारी दें और दस्तावेज अपलोड करें।

स्टेप 5: इसके बाद आवेदन शुल्क जमा करें और फिर आप अपना आवेदन पत्र डाउनलोड करके प्रिंट आउट भी निकाल सकते हैं।

NTA JEE Application: इतना देना होगा आवेदन शुल्क
इस परीक्षा में शामिल होने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 600 रुपए आवेदन शुल्क जमा करना होगा। जबकि, अन्य उम्मीदवारों को 325 रुपए आवेदन शुल्क देना होगा। किसी भी समस्या के समाधान के लिए छात्र एनटीए हेल्पलाइन नंबर 011-40759000 या 011-69227700 पर संपर्क कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर चेक करें।

UP Bed 2022 Registration: बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2022 के लिए आज से आवेदन शुरू, mjpru.ac.in पर करें रजिस्ट्रेशन, यहां देखें पूरा शेड्यूल

UP Bed 2022 Registration: उत्तर प्रदेश संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा 2022 के लिए आज यानी 18 अप्रैल 2022 से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस बार प्रवेश परीक्षा का आयोजन महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय (MJPRU), बरेली की ओर से किया जाएगा। परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट mjpru.ac.in के जरिए 15 मई 2022 तक आवेदन कर सकते हैं।

वहीं विलंब शुल्क के साथ 16 मई 2022 से 20 मई 2022 तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को 1600 रुपए और एससी व एसटी वर्ग के आवेदकों को 800 रुपए विलंब शुल्क देना होगा।

UP Bed Entrance Exam 2022: शैक्षणिक योग्यता
यूपी बीएड 2022 प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से 50 फीसदी नंबरों के साथ ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। अधिक शैक्षणिक योग्यता संबंधी जानकारी के लिए अभ्यर्थी जारी नोटिफिकेशन को चेक कर सकते हैं।

UP Bed Jee 2022 Exam Date: आवेदन शुल्क
सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को 1000 रुपए आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा। एससी व एसटी वर्ग के आवेदकों के लिए 500 रुपए आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है।

UP Bed Exam 2022: इन महत्वपूर्ण तिथियों का रखें ध्यान
आवेदन शुरू होने की तिथि – 18 अप्रैल 2022
आवेदन की अंतिम तिथि – 15 मई 2022
प्रवेश पत्र जारी होने की तिथि – 25 जून 2022
प्रवेश परीक्षा की तिथि – 6 जुलाई 2022
रिजल्ट घोषित होने की तिथि – 5 अगस्त 2022 (संभावित)

UP Bed 2022 Registration: ऐसे करें आवेदन
1.सबसे पहले अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट mjpru.ac.in पर जाएं।
2.होम पेज पर दिए गए उत्तर प्रदेश बी. एड. संयुक्त प्रवेश परीक्षा -2022 के लिंक पर क्लिक करें।
3.अब Click for Application Form के लिंक पर क्लिक करें।
4.Registration for New User पर क्लिक करें।
5.मांगी गई जानकारी को दर्ज कर रजिस्ट्रेशन करें।
6.सभी आवश्यक शैक्षणिक दस्तावेज को अपलोड करें।
7.आवेदन शुल्क का भुगतान कर सबमिट करें।
8.अंत में सबमिट किए गए फार्म का प्रिंट निकाल लें।



from Education News Hindi, Latest Educational News In India, Today Education News (एजुकेशन न्यूज़), शिक्षा समाचार, Admit Card, Exam Results | Jansatta https://ift.tt/FcQId82
via IFTTT

UP Bed 2022 Registration: उत्तर प्रदेश संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा 2022 के लिए आज यानी 18 अप्रैल 2022 से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस बार प्रवेश परीक्षा का आयोजन महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय (MJPRU), बरेली की ओर से किया जाएगा। परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट mjpru.ac.in के जरिए 15 मई 2022 तक आवेदन कर सकते हैं।

वहीं विलंब शुल्क के साथ 16 मई 2022 से 20 मई 2022 तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को 1600 रुपए और एससी व एसटी वर्ग के आवेदकों को 800 रुपए विलंब शुल्क देना होगा।

UP Bed Entrance Exam 2022: शैक्षणिक योग्यता
यूपी बीएड 2022 प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से 50 फीसदी नंबरों के साथ ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। अधिक शैक्षणिक योग्यता संबंधी जानकारी के लिए अभ्यर्थी जारी नोटिफिकेशन को चेक कर सकते हैं।

UP Bed Jee 2022 Exam Date: आवेदन शुल्क
सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को 1000 रुपए आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा। एससी व एसटी वर्ग के आवेदकों के लिए 500 रुपए आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है।

UP Bed Exam 2022: इन महत्वपूर्ण तिथियों का रखें ध्यान
आवेदन शुरू होने की तिथि – 18 अप्रैल 2022
आवेदन की अंतिम तिथि – 15 मई 2022
प्रवेश पत्र जारी होने की तिथि – 25 जून 2022
प्रवेश परीक्षा की तिथि – 6 जुलाई 2022
रिजल्ट घोषित होने की तिथि – 5 अगस्त 2022 (संभावित)

UP Bed 2022 Registration: ऐसे करें आवेदन
1.सबसे पहले अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट mjpru.ac.in पर जाएं।
2.होम पेज पर दिए गए उत्तर प्रदेश बी. एड. संयुक्त प्रवेश परीक्षा -2022 के लिंक पर क्लिक करें।
3.अब Click for Application Form के लिंक पर क्लिक करें।
4.Registration for New User पर क्लिक करें।
5.मांगी गई जानकारी को दर्ज कर रजिस्ट्रेशन करें।
6.सभी आवश्यक शैक्षणिक दस्तावेज को अपलोड करें।
7.आवेदन शुल्क का भुगतान कर सबमिट करें।
8.अंत में सबमिट किए गए फार्म का प्रिंट निकाल लें।

Sunday, April 17, 2022

परीक्षा बोर्ड : बदलाव की जरूरत

दुनिया भर में विद्यार्थियों के मूल्यांकन को लेकर माथापच्ची होती रही है। इस पर लंबे समय से विचार किया जाता रहा है कि परीक्षा की क्या पद्धति अपनाई जाए, जिससे विद्यार्थियों में मानसिक तनाव भी न पैदा हो और उनमें पाठ्यक्रम को सीखने की ललक भी बनी रहे। कई विशेषज्ञ परीक्षा पद्धति का ही विरोध करते रहे हैं। इन तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा बोर्ड परीक्षा के तरीकों पर विचार करते रहे हैं।

आने वाले वर्षों में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में होने वाली प्रवेश परीक्षा में अन्य सरकारी-निजी विश्वविद्यालयों के शामिल होने की संभावना है। ऐसे में क्या देश में स्कूली परीक्षा के लिए बने बोर्ड की सचमुच जरूरत रह जाएगी? बोर्ड परीक्षा कराने में जो संसाधन लगते हैं, उनका उपयोग स्कूल स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति और कक्षा के ढांचे को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। छात्रों का मूल्यांकन करने के लिए स्कूल को ही स्वायत्तता दे दी जाए! जो छात्र देश से बाहर जाना चाहते हैं, उनके सर्टिफिकेशन के लिए आइएलटीएस जैसी एक अलग पात्रता परीक्षा रखी जा सकती है।

परीक्षा पद्धति में बदलाव के लिए लगातार प्रयास होने चाहिए। 1993 में प्रोफेसर यशपाल की अगुआई वाली समिति ‘शिक्षा बिना बोझ के’ ने भी स्कूली शिक्षा की परीक्षा पद्धति को बदलने की बात कही थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी बोर्ड परीक्षा के वर्तमान स्वरूप को बदलने की अनुशंसा करती है। शिक्षा अधिकार कानून-2009 में सतत शिक्षण मूल्यांकन का प्रावधान था।

हालांकि यह कानून सिर्फ कक्षा आठवीं तक के लिए बना, लेकिन इसमें शिक्षकों को नियमित रूप से यह पता चलता था कि उनकी कक्षा के किस छात्र को कौन-सी अवधारणा सीखने में कठिनाई है और शिक्षक उस छात्र की समय रहते मदद कर सकते थे। लेकिन शिक्षकों के एक वर्ग के विरोध के चलते सतत शिक्षण मूल्यांकन को हटा दिया गया। एशिया-अफ्रीका के देशों में शिक्षा-व्यवस्था में मैनेजमेंट सिद्धांतों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और सीखने की प्रक्रिया, शिक्षकों की भर्ती से अधिक जोर परीक्षा/ मूल्यांकन पर दिया जा रहा है। तार्किक चिंतन की जगह बहुविकल्पीय प्रश्नों का जोर देखा जा रहा है।



from Education News Hindi, Latest Educational News In India, Today Education News (एजुकेशन न्यूज़), शिक्षा समाचार, Admit Card, Exam Results | Jansatta https://ift.tt/gN7r0sc
via IFTTT

दुनिया भर में विद्यार्थियों के मूल्यांकन को लेकर माथापच्ची होती रही है। इस पर लंबे समय से विचार किया जाता रहा है कि परीक्षा की क्या पद्धति अपनाई जाए, जिससे विद्यार्थियों में मानसिक तनाव भी न पैदा हो और उनमें पाठ्यक्रम को सीखने की ललक भी बनी रहे। कई विशेषज्ञ परीक्षा पद्धति का ही विरोध करते रहे हैं। इन तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा बोर्ड परीक्षा के तरीकों पर विचार करते रहे हैं।

आने वाले वर्षों में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में होने वाली प्रवेश परीक्षा में अन्य सरकारी-निजी विश्वविद्यालयों के शामिल होने की संभावना है। ऐसे में क्या देश में स्कूली परीक्षा के लिए बने बोर्ड की सचमुच जरूरत रह जाएगी? बोर्ड परीक्षा कराने में जो संसाधन लगते हैं, उनका उपयोग स्कूल स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति और कक्षा के ढांचे को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। छात्रों का मूल्यांकन करने के लिए स्कूल को ही स्वायत्तता दे दी जाए! जो छात्र देश से बाहर जाना चाहते हैं, उनके सर्टिफिकेशन के लिए आइएलटीएस जैसी एक अलग पात्रता परीक्षा रखी जा सकती है।

परीक्षा पद्धति में बदलाव के लिए लगातार प्रयास होने चाहिए। 1993 में प्रोफेसर यशपाल की अगुआई वाली समिति ‘शिक्षा बिना बोझ के’ ने भी स्कूली शिक्षा की परीक्षा पद्धति को बदलने की बात कही थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी बोर्ड परीक्षा के वर्तमान स्वरूप को बदलने की अनुशंसा करती है। शिक्षा अधिकार कानून-2009 में सतत शिक्षण मूल्यांकन का प्रावधान था।

हालांकि यह कानून सिर्फ कक्षा आठवीं तक के लिए बना, लेकिन इसमें शिक्षकों को नियमित रूप से यह पता चलता था कि उनकी कक्षा के किस छात्र को कौन-सी अवधारणा सीखने में कठिनाई है और शिक्षक उस छात्र की समय रहते मदद कर सकते थे। लेकिन शिक्षकों के एक वर्ग के विरोध के चलते सतत शिक्षण मूल्यांकन को हटा दिया गया। एशिया-अफ्रीका के देशों में शिक्षा-व्यवस्था में मैनेजमेंट सिद्धांतों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और सीखने की प्रक्रिया, शिक्षकों की भर्ती से अधिक जोर परीक्षा/ मूल्यांकन पर दिया जा रहा है। तार्किक चिंतन की जगह बहुविकल्पीय प्रश्नों का जोर देखा जा रहा है।

प्रतिभा का पैमाना अंक कतई नहीं

परीक्षा में बैठने वाले छात्र स्वयं कई तरह के दबाव से गुजर रहे होते हैं। ऐसे में परीक्षा के दो हफ्ते पहले अभिभावक उनकी पढ़ाई की प्रक्रिया में अधिक हस्तक्षेप न करें। छात्रों की परीक्षा अभिभावकों की सामाजिक प्रतिष्ठा का अखाड़ा नहीं है और न तो बच्चों की मार्कशीट, सार्वजनिक प्रदर्शन की वस्तु है। जब परीक्षा नजदीक है, तो माता-पिता को यह देखना चाहिए कि कहीं वह अपनी महत्त्वाकांक्षा के बहाने, बच्चों पर अनावश्यक दबाव तो नहीं बना रहे हैं?

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. यतनपाल सिंह बल्हारा कहते हैं कि ‘परीक्षा नजदीक आ चुकी है, तो अभिभावकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों का आत्मविश्वास बना रहे और उनकी नींद पूरी हो। छात्रों को ताजा फल-सब्जी और स्वास्थवर्धक भोजन लेना चाहिए और नियमित रूप से थोड़ा व्यायाम करना चाहिए, जिससे तनाव कम रहेगा। इस दौरान छात्रों को अनावश्यक इंटरनेट सर्फिंग और अत्यधिक वीडियो गेम से बचना चाहिए।’ वीडियो-गेम पर अत्यधिक समय देने से बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है और उनके लिए एकाग्रचित्त होकर कुछ पढ़ना मुश्किल कार्य हो सकता है।

अभिभावकों को यह याद रखना होगा कि सीखना, एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें शिक्षक-छात्र, स्कूल-समाज, पाठ्यक्रम, रुचि-जरूरत जैसे अनेक कारक भगीदारी करते हैं। यह अलग बात है कि बोर्ड परीक्षा के जरिए सीखने का मूल्यांकन करने में विफलता का दोष अकेले छात्र के ऊपर आ जाता है और शिक्षा में व्याप्त असमानता, बहस से ओझल हो जाती है। अभिभावक अपने छात्र जीवन के अनुभव से बता सकते हैं कि उनकी कक्षा के मेधावी छात्र अब क्या करते हैं। यह भी संभव है कि कल का वह मेधावी छात्र, आज नौकरी छोड़ कर समाजसेवा या खेती कर रहा हो!

जो अभिभावक अपने बच्चों के कम अंक आने की आशंका से ग्रसित हैं, क्या वे यह नहीं जानते कि जीवन में सफलता कोई स्थायी भाव लेकर नहीं आती है! जीवन की हर विधा में कोई अव्वल नहीं रह सकता है। समाज का सफल से सफल व्यक्ति भी विफलता की राह से गुजरा हुआ होता है। अव्वल बने रहने की होड़, जीवन में हर समय किसी को ‘सबसे आगे’ नहीं रखेगी और तब क्या पराजयबोध का सामना करना आसान होगा? क्या स्कूली परीक्षा के प्राप्तांक, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता की गारंटी देते हैं? आप दुनिया में प्रसिद्ध व्यक्तियों की सूची उठा लीजिए और देखिए, कितने लोगों ने स्कूलों में अधिक नंबर पाने के कारण समाज में, व्यापार में, खेल में, फिल्म-साहित्य में अपनी जगह बनाई है! नवाचार और नाम कमाने वाले लोगों से कौन उनकी मार्कशीट मांगता है?

बुनियादी रूप से, प्रत्येक छात्र दूसरों से अलग होता है। परीक्षा के अंकों की तुलना छात्रों में एक प्रकार की कुंठा को जन्म देती है, जबकि स्कूलों से यह अपेक्षा रहती है कि वह छात्रों में हौसला, हिम्मत और हुनर पैदा करेगा! अगर कोई छात्र, परीक्षा परिणाम की आशंका से अपना आत्मविश्वास खोता है, तो स्कूल की प्रासंगिकता पर सवाल उठना स्वभाविक है? अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को अंकों की मैराथन के बजाय वास्तविक मैराथन के लिए तैयार करें।



from Education News Hindi, Latest Educational News In India, Today Education News (एजुकेशन न्यूज़), शिक्षा समाचार, Admit Card, Exam Results | Jansatta https://ift.tt/Q6JuE0F
via IFTTT

परीक्षा में बैठने वाले छात्र स्वयं कई तरह के दबाव से गुजर रहे होते हैं। ऐसे में परीक्षा के दो हफ्ते पहले अभिभावक उनकी पढ़ाई की प्रक्रिया में अधिक हस्तक्षेप न करें। छात्रों की परीक्षा अभिभावकों की सामाजिक प्रतिष्ठा का अखाड़ा नहीं है और न तो बच्चों की मार्कशीट, सार्वजनिक प्रदर्शन की वस्तु है। जब परीक्षा नजदीक है, तो माता-पिता को यह देखना चाहिए कि कहीं वह अपनी महत्त्वाकांक्षा के बहाने, बच्चों पर अनावश्यक दबाव तो नहीं बना रहे हैं?

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. यतनपाल सिंह बल्हारा कहते हैं कि ‘परीक्षा नजदीक आ चुकी है, तो अभिभावकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों का आत्मविश्वास बना रहे और उनकी नींद पूरी हो। छात्रों को ताजा फल-सब्जी और स्वास्थवर्धक भोजन लेना चाहिए और नियमित रूप से थोड़ा व्यायाम करना चाहिए, जिससे तनाव कम रहेगा। इस दौरान छात्रों को अनावश्यक इंटरनेट सर्फिंग और अत्यधिक वीडियो गेम से बचना चाहिए।’ वीडियो-गेम पर अत्यधिक समय देने से बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है और उनके लिए एकाग्रचित्त होकर कुछ पढ़ना मुश्किल कार्य हो सकता है।

अभिभावकों को यह याद रखना होगा कि सीखना, एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें शिक्षक-छात्र, स्कूल-समाज, पाठ्यक्रम, रुचि-जरूरत जैसे अनेक कारक भगीदारी करते हैं। यह अलग बात है कि बोर्ड परीक्षा के जरिए सीखने का मूल्यांकन करने में विफलता का दोष अकेले छात्र के ऊपर आ जाता है और शिक्षा में व्याप्त असमानता, बहस से ओझल हो जाती है। अभिभावक अपने छात्र जीवन के अनुभव से बता सकते हैं कि उनकी कक्षा के मेधावी छात्र अब क्या करते हैं। यह भी संभव है कि कल का वह मेधावी छात्र, आज नौकरी छोड़ कर समाजसेवा या खेती कर रहा हो!

जो अभिभावक अपने बच्चों के कम अंक आने की आशंका से ग्रसित हैं, क्या वे यह नहीं जानते कि जीवन में सफलता कोई स्थायी भाव लेकर नहीं आती है! जीवन की हर विधा में कोई अव्वल नहीं रह सकता है। समाज का सफल से सफल व्यक्ति भी विफलता की राह से गुजरा हुआ होता है। अव्वल बने रहने की होड़, जीवन में हर समय किसी को ‘सबसे आगे’ नहीं रखेगी और तब क्या पराजयबोध का सामना करना आसान होगा? क्या स्कूली परीक्षा के प्राप्तांक, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता की गारंटी देते हैं? आप दुनिया में प्रसिद्ध व्यक्तियों की सूची उठा लीजिए और देखिए, कितने लोगों ने स्कूलों में अधिक नंबर पाने के कारण समाज में, व्यापार में, खेल में, फिल्म-साहित्य में अपनी जगह बनाई है! नवाचार और नाम कमाने वाले लोगों से कौन उनकी मार्कशीट मांगता है?

बुनियादी रूप से, प्रत्येक छात्र दूसरों से अलग होता है। परीक्षा के अंकों की तुलना छात्रों में एक प्रकार की कुंठा को जन्म देती है, जबकि स्कूलों से यह अपेक्षा रहती है कि वह छात्रों में हौसला, हिम्मत और हुनर पैदा करेगा! अगर कोई छात्र, परीक्षा परिणाम की आशंका से अपना आत्मविश्वास खोता है, तो स्कूल की प्रासंगिकता पर सवाल उठना स्वभाविक है? अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को अंकों की मैराथन के बजाय वास्तविक मैराथन के लिए तैयार करें।

परीक्षा का तनाव: मूल्यांकन की मुश्किल

हर साल बोर्ड परीक्षाएं नजदीक आते ही बच्चों और अभिभावकों में तनाव कुछ बढ़ जाता है। हालांकि परीक्षा का तनाव कम करने के मकसद से स्कूल और शिक्षा बोर्ड लगातार प्रयास करते रहे हैं, मगर स्कूली शिक्षा का जुड़ाव चूंकि आगे उच्च शिक्षा के लिए दाखिले, विभिन्न नौकरियों के लिए आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं से भी होता है, इसलिए बोर्ड परीक्षाओं का स्वरूप जानबूझ कर थोड़ा सख्त रखना ही पड़ता है। यह स्कूलों के लिए भी एक पैमाना बनता है। मगर इन सबके बावजूद अगर विद्यार्थी और अभिभावक थोड़ा सतर्क और जागरूक रहें, तो इन परीक्षाओं का तनाव पास फटकेगा ही नहीं। ऐसे वक्त में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, इसी पर विशेष।

कोरोना काल से प्रभावित रहे स्कूल, एक बार फिर सामान्य दिनों की तरह अपनी गतिविधियां शुरू कर चुके हैं। एक तरफ जहां छोटी कक्षाओं के लिए नया सत्र शुरू हो रहा है, तो केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा को लेकर कोरोना काल में कई सुधार किए। 2020-21 में जब स्कूल अचानक बंद हो गए, तो बोर्ड परीक्षा के लिए तीस प्रतिशत कम पाठ्यक्रम रखा गया और मूल्यांकन के लिए एक उदार प्रक्रिया अपनाई गई थी।

ब्रिटेन, फ्रांस, आयरलैंड ने भी उन दिनों स्कूलों की परीक्षाएं निरस्त कर दी और इटली ने अपने छात्रों के लिए मौखिक परीक्षा कराने का निर्णय किया था। फ्रांस में स्कूली परीक्षा में सुधार पर कार्य हो रहा है और भारत में अकादमिक सत्र 2021-2022 में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में आधे-आधे पाठ्यक्रम पर आधारित, दो खंडों में बोर्ड परीक्षा का प्रावधान किया गया है। परीक्षा के पुराने स्वरूप को बदल कर अब बहुविकल्पीय और केस आधारित परीक्षा का निर्णय लिया गया है।

भारत सहित दुनिया के अधिकांश देशों में बोर्ड परीक्षा के प्राप्तांक, उच्च शिक्षा और प्रगति का रास्ता खोलते हैं। हमारी शिक्षा व्यवस्था की यह विडंबना है कि स्कूल कक्षा के भीतर जिन मूल्यों की बात होती है, वह व्यवहार समाज की गतिविधियों में नहीं दिखता। परीक्षा में नंबरों की दौड़ से यह पता चलता है कि हम अपने निजी जीवन में प्रतियोगिता को कितना महत्त्व देते हैं!

इस संदर्भ में जापान की कक्षाओं से कुछ सीखा जा सकता है। वहां अगर कक्षा में कोई छात्र कोई अवधारणा नहीं सीख पाता, तो कक्षाध्यापक सहित पूरी कक्षा के छात्रों की नैतिक जिम्मेदारी होती है कि वे उस छात्र की मदद करें। जापान के स्कूलों में सामूहिकता, समन्यवय और संतोष सिखाया जाता है, जो वहां के समाज में आमतौर पर प्रचलन में है। उनका दर्शन- ‘लेस इस मोर’ (जो है वह पर्याप्त है), जीवन में नंबरों की दौड़ से बच्चों को बचा लेता है।

अंकों की मैराथन :

हर साल कई लाख छात्र बारहवीं की परीक्षा पास करते हैं और उनमें से एक बड़ी संख्या उन छात्रों की होती है, जो केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के इच्छुक होते हैं। चूंकि पिछले वर्ष तक दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में प्रवेश का आधार बारहवीं की परीक्षा में प्राप्त अंक होते थे, तो मध्यवर्गीय छात्रों के ऊपर अधिक नंबर लाने का दबाव रहता था। परीक्षा में अंक लाने का दबाव छात्रों-अभिभावकों-स्कूलों के ऊपर इतना अधिक रहने लगा कि छात्रों के बीच तनाव, अनिद्रा और आत्महत्या की घटनाएं भी होने लगीं। स्कूलों के बीच भी अव्वल रहने को होड़ लग गई। इस प्रक्रिया में छात्रों को क्या सीखना चाहिए, यह पीछे छूट गया और कैसे अधिक नंबर लाए जाएं, यह बात स्कूल-अध्यापक-विद्यार्थी के लिए महत्त्वपूर्ण हो गई।

अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा दो खंडों में कराना सुनिश्चित किया है, ताकि छात्रों के ऊपर दबाव कम हो सके। पहले हुई परीक्षा और इस माह से शुरू हो रही परीक्षा के संयुक्त अंक से, बारहवीं का प्राप्तांक तय होगा। अकादमिक वर्ष के अंत में बोर्ड परीक्षा का दूसरा हिस्सा केवल पचास प्रतिशत पाठ्यक्रम पर केंद्रित रहेगा। बारहवीं की परीक्षा की तैयारी करने वाले एक छात्र की मां इस बात से चिंतित है कि इसी वर्ष केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा का स्वरूप बदला और अब विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए भी परीक्षा होनी है!

इस वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय सहित अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अब प्रवेश के लिए एक संयुक्त परीक्षा होनी है, जिसमें छात्रों के सामान्य अध्ययन, भाषा के साथ सामान्य बोध का मूल्यांकन किया जाएगा। पिछले वर्षों में कुछ राज्यों पर अपने छात्रों को अधिक अंक देने का आरोप लगा, क्योंकि अंकों के आधार पर अच्छे कालेजों में कुछ ही राज्यों के छात्रों से सीट भर जाती थी। राज्यों के बोर्ड, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के बीच भी छात्रों के मूल्यांकन की एकरूपता न होने का सवाल उठता रहा है। अब उम्मीद है कि विश्वविद्यालयी प्रवेश परीक्षा में सभी छात्रों को प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश का एक समान अवसर मिलेगा।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में होने वाली प्रवेश परीक्षा के चलते आने वाले वर्षों में यह भी संभव है कि स्कूलों में पढ़ाई के केंद्र में प्रवेश परीक्षा की सफलता आ जाए। इंजीनियरिंग-मेडिकल को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि विश्वविद्यालयों में प्रवेश परीक्षा के लिए अलग से आनलाइन-आफलाइन कोचिंग की बड़े पैमाने पर शुरुआत हो जाएगी और जिनके पास अधिक संसाधन होंगे, उनके लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे अपेक्षाकृत आसानी से खुल जाएंगे।



from Education News Hindi, Latest Educational News In India, Today Education News (एजुकेशन न्यूज़), शिक्षा समाचार, Admit Card, Exam Results | Jansatta https://ift.tt/1V53Z7m
via IFTTT

हर साल बोर्ड परीक्षाएं नजदीक आते ही बच्चों और अभिभावकों में तनाव कुछ बढ़ जाता है। हालांकि परीक्षा का तनाव कम करने के मकसद से स्कूल और शिक्षा बोर्ड लगातार प्रयास करते रहे हैं, मगर स्कूली शिक्षा का जुड़ाव चूंकि आगे उच्च शिक्षा के लिए दाखिले, विभिन्न नौकरियों के लिए आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं से भी होता है, इसलिए बोर्ड परीक्षाओं का स्वरूप जानबूझ कर थोड़ा सख्त रखना ही पड़ता है। यह स्कूलों के लिए भी एक पैमाना बनता है। मगर इन सबके बावजूद अगर विद्यार्थी और अभिभावक थोड़ा सतर्क और जागरूक रहें, तो इन परीक्षाओं का तनाव पास फटकेगा ही नहीं। ऐसे वक्त में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, इसी पर विशेष।

कोरोना काल से प्रभावित रहे स्कूल, एक बार फिर सामान्य दिनों की तरह अपनी गतिविधियां शुरू कर चुके हैं। एक तरफ जहां छोटी कक्षाओं के लिए नया सत्र शुरू हो रहा है, तो केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा को लेकर कोरोना काल में कई सुधार किए। 2020-21 में जब स्कूल अचानक बंद हो गए, तो बोर्ड परीक्षा के लिए तीस प्रतिशत कम पाठ्यक्रम रखा गया और मूल्यांकन के लिए एक उदार प्रक्रिया अपनाई गई थी।

ब्रिटेन, फ्रांस, आयरलैंड ने भी उन दिनों स्कूलों की परीक्षाएं निरस्त कर दी और इटली ने अपने छात्रों के लिए मौखिक परीक्षा कराने का निर्णय किया था। फ्रांस में स्कूली परीक्षा में सुधार पर कार्य हो रहा है और भारत में अकादमिक सत्र 2021-2022 में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में आधे-आधे पाठ्यक्रम पर आधारित, दो खंडों में बोर्ड परीक्षा का प्रावधान किया गया है। परीक्षा के पुराने स्वरूप को बदल कर अब बहुविकल्पीय और केस आधारित परीक्षा का निर्णय लिया गया है।

भारत सहित दुनिया के अधिकांश देशों में बोर्ड परीक्षा के प्राप्तांक, उच्च शिक्षा और प्रगति का रास्ता खोलते हैं। हमारी शिक्षा व्यवस्था की यह विडंबना है कि स्कूल कक्षा के भीतर जिन मूल्यों की बात होती है, वह व्यवहार समाज की गतिविधियों में नहीं दिखता। परीक्षा में नंबरों की दौड़ से यह पता चलता है कि हम अपने निजी जीवन में प्रतियोगिता को कितना महत्त्व देते हैं!

इस संदर्भ में जापान की कक्षाओं से कुछ सीखा जा सकता है। वहां अगर कक्षा में कोई छात्र कोई अवधारणा नहीं सीख पाता, तो कक्षाध्यापक सहित पूरी कक्षा के छात्रों की नैतिक जिम्मेदारी होती है कि वे उस छात्र की मदद करें। जापान के स्कूलों में सामूहिकता, समन्यवय और संतोष सिखाया जाता है, जो वहां के समाज में आमतौर पर प्रचलन में है। उनका दर्शन- ‘लेस इस मोर’ (जो है वह पर्याप्त है), जीवन में नंबरों की दौड़ से बच्चों को बचा लेता है।

अंकों की मैराथन :

हर साल कई लाख छात्र बारहवीं की परीक्षा पास करते हैं और उनमें से एक बड़ी संख्या उन छात्रों की होती है, जो केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के इच्छुक होते हैं। चूंकि पिछले वर्ष तक दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में प्रवेश का आधार बारहवीं की परीक्षा में प्राप्त अंक होते थे, तो मध्यवर्गीय छात्रों के ऊपर अधिक नंबर लाने का दबाव रहता था। परीक्षा में अंक लाने का दबाव छात्रों-अभिभावकों-स्कूलों के ऊपर इतना अधिक रहने लगा कि छात्रों के बीच तनाव, अनिद्रा और आत्महत्या की घटनाएं भी होने लगीं। स्कूलों के बीच भी अव्वल रहने को होड़ लग गई। इस प्रक्रिया में छात्रों को क्या सीखना चाहिए, यह पीछे छूट गया और कैसे अधिक नंबर लाए जाएं, यह बात स्कूल-अध्यापक-विद्यार्थी के लिए महत्त्वपूर्ण हो गई।

अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा दो खंडों में कराना सुनिश्चित किया है, ताकि छात्रों के ऊपर दबाव कम हो सके। पहले हुई परीक्षा और इस माह से शुरू हो रही परीक्षा के संयुक्त अंक से, बारहवीं का प्राप्तांक तय होगा। अकादमिक वर्ष के अंत में बोर्ड परीक्षा का दूसरा हिस्सा केवल पचास प्रतिशत पाठ्यक्रम पर केंद्रित रहेगा। बारहवीं की परीक्षा की तैयारी करने वाले एक छात्र की मां इस बात से चिंतित है कि इसी वर्ष केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा का स्वरूप बदला और अब विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए भी परीक्षा होनी है!

इस वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय सहित अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अब प्रवेश के लिए एक संयुक्त परीक्षा होनी है, जिसमें छात्रों के सामान्य अध्ययन, भाषा के साथ सामान्य बोध का मूल्यांकन किया जाएगा। पिछले वर्षों में कुछ राज्यों पर अपने छात्रों को अधिक अंक देने का आरोप लगा, क्योंकि अंकों के आधार पर अच्छे कालेजों में कुछ ही राज्यों के छात्रों से सीट भर जाती थी। राज्यों के बोर्ड, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के बीच भी छात्रों के मूल्यांकन की एकरूपता न होने का सवाल उठता रहा है। अब उम्मीद है कि विश्वविद्यालयी प्रवेश परीक्षा में सभी छात्रों को प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश का एक समान अवसर मिलेगा।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में होने वाली प्रवेश परीक्षा के चलते आने वाले वर्षों में यह भी संभव है कि स्कूलों में पढ़ाई के केंद्र में प्रवेश परीक्षा की सफलता आ जाए। इंजीनियरिंग-मेडिकल को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि विश्वविद्यालयों में प्रवेश परीक्षा के लिए अलग से आनलाइन-आफलाइन कोचिंग की बड़े पैमाने पर शुरुआत हो जाएगी और जिनके पास अधिक संसाधन होंगे, उनके लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे अपेक्षाकृत आसानी से खुल जाएंगे।

KTET 2022: केरल शिक्षक पात्रता परीक्षा की तारीख घोषित, ऐसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड

Kerala Teacher Eligibility Test 2022: केरल शिक्षा भवन ने केरल शिक्षक पात्रता परीक्षा (KTET) 2022 के लिए परीक्षा कार्यक्रम जारी कर दिया है। केरल शिक्षक पात्रता परीक्षा 4 और 5 मई को आयोजित की जाएगी। जो उम्मीदवार इस परीक्षा में सामिल होने वाले हैं, वे 25 अप्रैल से आधिकारिक वेबसाइट ktet.kerala.gov.in पर जाकर एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।

कार्यक्रम के अनुसार, श्रेणी 1 और 2 के उम्मीदवारों के लिए परीक्षा 4 मई, 2022 को आयोजित होगी, जबकि श्रेणी 3 और 4 के उम्मीदवारों के लिए 5 मई, 2022 को परीक्षा आयोजित की जाएगी। केरल टीईटी परीक्षा 2022 को दो पालियों में आयोजित किया जाएगा। पहली पाली की परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर 1:30 बजे से शाम 4 बजे तक होगी।

आसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड
चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट ktet.kerala.gov.in पर जाएं।
चरण 2: वेबसाइट के होमपेज पर केरल टीईटी 2022 एडमिट कार्ड के लिंक पर क्लिक करें।
चरण 3: लॉगिन करें और सबमिट बटन पर क्लिक करें।
चरण 4: आपकी स्क्रीन पर एडमिट कार्ड खुल जाएगा।

कब शुरू हुई रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
बता दें कि KTET 2022 परीक्षा के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 9 फरवरी से शुरू हुई थी और 19 फरवरी, 2022 को समाप्त हुई थी। 25 अप्रैल, 2022 से पंजीकृत उम्मीदवारों के लिए एडमिट कार्ड जारी किया जाएगा। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर अपना पंजीकृत क्रेडेंशियल दर्ज करके एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे।



from Education News Hindi, Latest Educational News In India, Today Education News (एजुकेशन न्यूज़), शिक्षा समाचार, Admit Card, Exam Results | Jansatta https://ift.tt/ODLj4Cq
via IFTTT

Kerala Teacher Eligibility Test 2022: केरल शिक्षा भवन ने केरल शिक्षक पात्रता परीक्षा (KTET) 2022 के लिए परीक्षा कार्यक्रम जारी कर दिया है। केरल शिक्षक पात्रता परीक्षा 4 और 5 मई को आयोजित की जाएगी। जो उम्मीदवार इस परीक्षा में सामिल होने वाले हैं, वे 25 अप्रैल से आधिकारिक वेबसाइट ktet.kerala.gov.in पर जाकर एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।

कार्यक्रम के अनुसार, श्रेणी 1 और 2 के उम्मीदवारों के लिए परीक्षा 4 मई, 2022 को आयोजित होगी, जबकि श्रेणी 3 और 4 के उम्मीदवारों के लिए 5 मई, 2022 को परीक्षा आयोजित की जाएगी। केरल टीईटी परीक्षा 2022 को दो पालियों में आयोजित किया जाएगा। पहली पाली की परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर 1:30 बजे से शाम 4 बजे तक होगी।

आसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड
चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट ktet.kerala.gov.in पर जाएं।
चरण 2: वेबसाइट के होमपेज पर केरल टीईटी 2022 एडमिट कार्ड के लिंक पर क्लिक करें।
चरण 3: लॉगिन करें और सबमिट बटन पर क्लिक करें।
चरण 4: आपकी स्क्रीन पर एडमिट कार्ड खुल जाएगा।

कब शुरू हुई रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
बता दें कि KTET 2022 परीक्षा के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 9 फरवरी से शुरू हुई थी और 19 फरवरी, 2022 को समाप्त हुई थी। 25 अप्रैल, 2022 से पंजीकृत उम्मीदवारों के लिए एडमिट कार्ड जारी किया जाएगा। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर अपना पंजीकृत क्रेडेंशियल दर्ज करके एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे।