Thursday, April 21, 2022

Bihar Board Matric Compartment Admit Card 2022: 10वीं कंपार्टमेंट परीक्षा का एडमिट कार्ड आज होगा जारी, ऐसे कर सकेंगे डाउनलोड

Bihar Board Matric Compartment Admit Card 2022: बिहार बोर्ड 10वीं कंपार्टमेंट परीक्षा का एडमिट कार्ड आज यानी 22 अप्रैल को जारी किया जाएगा। एडमिट कार्ड आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in पर जारी किया जाएगा। जारी होने के बाद छात्र आधिकारिक वेबसाइट के जरिए परीक्षा प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।

बोर्ड परीक्षा की तिथियां पहले ही घोषित कर दी थी। परीक्षा का आयोजन 5 मई 2022 से 9 मई 2022 तक किया जाएगा। एडमिट कार्ड संबंधी किसी भी समस्या के लिए छात्र बिहार बोर्ड की ओर से जारी हेल्प लाइन नंबर 0612-2232074, 2232257 और 2232239 पर संपर्क कर सकते हैं।

Bihar Board 10th Compartment Exam 2022: दो पालियों में होगी परीक्षा
परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी- पहली पाली सुबह 9.30 बजे से दोपहर 12.45 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 1.45 से शाम 4.30 बजे तक चलेगी। परीक्षा शुरू होने से पहले छात्रों को प्रश्न पत्र पढ़ने और समझने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

Bihar Board 10th Compartment Admit Card 2022 How to Download: ऐसे डाउनलोड कर सकेंगे एडमिट कार्ड
1.सबसे पहले छात्र आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in पर जाएं।
2.होम पेज पर दिए गए बिहार बोर्ड 10वीं कंपार्टमेंटल सह विशेष परीक्षा एडमिट कार्ड 2022 के लिंक पर क्लिक करें।
3.यहां मांगी गई जानकारी को दर्ज कर सबमिट करें।
4.एडमिट कार्ड आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा।
5.अब चेक करें और डाउनलोड करें।



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Bihar Board Matric Compartment Admit Card 2022: बिहार बोर्ड 10वीं कंपार्टमेंट परीक्षा का एडमिट कार्ड आज यानी 22 अप्रैल को जारी किया जाएगा। एडमिट कार्ड आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in पर जारी किया जाएगा। जारी होने के बाद छात्र आधिकारिक वेबसाइट के जरिए परीक्षा प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।

बोर्ड परीक्षा की तिथियां पहले ही घोषित कर दी थी। परीक्षा का आयोजन 5 मई 2022 से 9 मई 2022 तक किया जाएगा। एडमिट कार्ड संबंधी किसी भी समस्या के लिए छात्र बिहार बोर्ड की ओर से जारी हेल्प लाइन नंबर 0612-2232074, 2232257 और 2232239 पर संपर्क कर सकते हैं।

Bihar Board 10th Compartment Exam 2022: दो पालियों में होगी परीक्षा
परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी- पहली पाली सुबह 9.30 बजे से दोपहर 12.45 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 1.45 से शाम 4.30 बजे तक चलेगी। परीक्षा शुरू होने से पहले छात्रों को प्रश्न पत्र पढ़ने और समझने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

Bihar Board 10th Compartment Admit Card 2022 How to Download: ऐसे डाउनलोड कर सकेंगे एडमिट कार्ड
1.सबसे पहले छात्र आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in पर जाएं।
2.होम पेज पर दिए गए बिहार बोर्ड 10वीं कंपार्टमेंटल सह विशेष परीक्षा एडमिट कार्ड 2022 के लिंक पर क्लिक करें।
3.यहां मांगी गई जानकारी को दर्ज कर सबमिट करें।
4.एडमिट कार्ड आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा।
5.अब चेक करें और डाउनलोड करें।

Civil Service Day 2022: राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस आज, जानें 21 अप्रैल को क्यों मनाया जाता है?

National Civil Service Day 2022 : 21 अप्रैल को भारत में राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस (Civil Service Day 2022) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन सभी विभागों के सिविल सेवकों और प्रशासनिक तंत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए अथक परिश्रम करने वालों के प्रयासों को याद करने के लिए मनाया जाता है।

राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस: इतिहास
भारत सरकार हर साल 21 अप्रैल को राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस के रूप में मनाती है। यह दिवस पहली बार वर्ष 2006 में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में मनाया गया था। इस दिन, लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार सिविल सेवकों को राष्ट्र और लोगों की सेवा में उनके योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

21 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है?
भारत सरकार ने 21 अप्रैल को राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस मनाने के लिए दिन के रूप में इसलिए चुना है क्योंकि इस दिन भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने नवगठित और नव नियुक्त प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को संबोधित किया था। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 1947 में नई दिल्ली के मेटकाफ हाउस में इन अधिकारियों को संबोधित किया था।

राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस: महत्व
यह दिन सिविल सेवाओं में विभिन्न स्तरों और विभागों में शामिल और काम करने वाले सभी लोगों को याद करने के लिए समर्पित है। नौकरशाही शासन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसलिए देश के दिन-प्रतिदिन के कामकाज में इसका बहुत महत्व है।

भारतीय सिविल सेवा के जनक
चार्ल्स कार्नवालिस को देश में सिविल सेवाओं के सुधार और आधुनिकीकरण में उनके योगदान के लिए भारतीय सिविल सेवा के पिता के रूप में जाना जाता है। हमारे देश में सिविल सेवा में भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय विदेश सेवा और अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवा समूह ए और बी की एक विस्तृत सूची शामिल है।



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National Civil Service Day 2022 : 21 अप्रैल को भारत में राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस (Civil Service Day 2022) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन सभी विभागों के सिविल सेवकों और प्रशासनिक तंत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए अथक परिश्रम करने वालों के प्रयासों को याद करने के लिए मनाया जाता है।

राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस: इतिहास
भारत सरकार हर साल 21 अप्रैल को राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस के रूप में मनाती है। यह दिवस पहली बार वर्ष 2006 में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में मनाया गया था। इस दिन, लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार सिविल सेवकों को राष्ट्र और लोगों की सेवा में उनके योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

21 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है?
भारत सरकार ने 21 अप्रैल को राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस मनाने के लिए दिन के रूप में इसलिए चुना है क्योंकि इस दिन भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने नवगठित और नव नियुक्त प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को संबोधित किया था। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 1947 में नई दिल्ली के मेटकाफ हाउस में इन अधिकारियों को संबोधित किया था।

राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस: महत्व
यह दिन सिविल सेवाओं में विभिन्न स्तरों और विभागों में शामिल और काम करने वाले सभी लोगों को याद करने के लिए समर्पित है। नौकरशाही शासन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसलिए देश के दिन-प्रतिदिन के कामकाज में इसका बहुत महत्व है।

भारतीय सिविल सेवा के जनक
चार्ल्स कार्नवालिस को देश में सिविल सेवाओं के सुधार और आधुनिकीकरण में उनके योगदान के लिए भारतीय सिविल सेवा के पिता के रूप में जाना जाता है। हमारे देश में सिविल सेवा में भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय विदेश सेवा और अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवा समूह ए और बी की एक विस्तृत सूची शामिल है।

MHT-CET 2022 Postponed: एमएचटी सीईटी परीक्षा हुई स्थगित, जानें अब कब होगा एग्जाम

MHT-CET 2022 Postponed: राज्य में इंजीनियरिंग प्रवेश के लिए महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (MHT-CET 2022) को स्थगित कर दिया गया है। इसके लिए जल्द ही नई तारीखों की घोषणा की जाएगी। महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत ने गुरुवार को यह घोषणा की।

संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE Main 2022) और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET 2022) के साथ टकराव के कारण महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET 2022) को स्थगित करना पड़ा है। अब यह परीक्षा अगस्त 2022 के पहले सप्ताह में आयोजित की जा सकती है।

मंत्री ने अपने आधिकारिक हैंडल से इसके बारे में ट्वीट करते हुए कहा, “जेईई और एनईईटी के कारण सीईटी को अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।”

बता दें कि महाराष्ट्र सीईटी 11 से 28 जून, 2022 के बीच आयोजित होने वाला था। जेईई-मेन के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, यह परीक्षा 20 से 29 जून, 2022 तक आयोजित की जाएगी। पहले यह परीक्षा मई के महीने में आयोजित होने वाली थी। वहीं, नीट 2022 जुलाई में आयोजित की जाएगी।

महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) सेल के आयुक्त आरएस जगताप के अनुसार, “नई तारीखों की घोषणा जल्द कर दी जाएगी।” केवल इंजीनियरिंग सीईटी को स्थगित कर दिया गया है, जबकि अन्य सभी सीईटी पहले घोषित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किए जाएंगे।



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MHT-CET 2022 Postponed: राज्य में इंजीनियरिंग प्रवेश के लिए महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (MHT-CET 2022) को स्थगित कर दिया गया है। इसके लिए जल्द ही नई तारीखों की घोषणा की जाएगी। महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत ने गुरुवार को यह घोषणा की।

संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE Main 2022) और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET 2022) के साथ टकराव के कारण महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET 2022) को स्थगित करना पड़ा है। अब यह परीक्षा अगस्त 2022 के पहले सप्ताह में आयोजित की जा सकती है।

मंत्री ने अपने आधिकारिक हैंडल से इसके बारे में ट्वीट करते हुए कहा, “जेईई और एनईईटी के कारण सीईटी को अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।”

बता दें कि महाराष्ट्र सीईटी 11 से 28 जून, 2022 के बीच आयोजित होने वाला था। जेईई-मेन के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, यह परीक्षा 20 से 29 जून, 2022 तक आयोजित की जाएगी। पहले यह परीक्षा मई के महीने में आयोजित होने वाली थी। वहीं, नीट 2022 जुलाई में आयोजित की जाएगी।

महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) सेल के आयुक्त आरएस जगताप के अनुसार, “नई तारीखों की घोषणा जल्द कर दी जाएगी।” केवल इंजीनियरिंग सीईटी को स्थगित कर दिया गया है, जबकि अन्य सभी सीईटी पहले घोषित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किए जाएंगे।

UP Board New Exam Pattern: अब नए पैटर्न से होंगी यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं की परीक्षा, जानें क्या होगा बदलाव

UP Board New Exam Pattern: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board Exam New Pattern) की कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा अब नए पैटर्न से होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा क्षेत्र में प्रमुख सुधारों को लागू करने का निर्णय लिया है। इसके अनुसार, कक्षा 10वीं की परीक्षा आगामी शैक्षणिक सत्र 2023 से नए पैटर्न के आधार पर होगी, जबकि 12वीं के लिए नया पैटर्न 2025 से लाग होगा।

राज्य की समग्र शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में सीएम योगी ने कुशल पेशेवरों के तहत कक्षा 9वीं और कक्षा 11वीं के छात्रों के लिए इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरू करने का निर्देश दिया। इसके अलावा सीएम ने दो साल के भीतर संस्कृत शिक्षा निदेशालय का गठन करने को कहा है।

एनआईआरएफ की तर्ज पर शुरू होगा एसआईआरएफ
सीएम ने अधिकारियों से एनआईआरएफ की तर्ज पर शिक्षा संस्थानों के लिए राज्य स्तरीय रैंकिंग ढांचा शुरू करने के लिए भी कहा है। सीएम ने कहा कि एनआईआरएफ की तर्ज पर एक एसआईआरएफ शुरू किया जाना चाहिए। यह संस्थानों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और सभी को सुधार के लिए प्रयास करने में मदद करेगा। यह छात्रों को प्रवेश हासिल करने और संस्थानों के चयन में प्लेसमेंट एजेंसियों की भी मदद करेगा।

पेशेवरों की मदद से बनेगी नई खेल नीति
उन्होंने खिलाडियों के सहयोग से राज्य की नई खेल नीति तैयार करने के निर्देश दिए है। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि राज्य के लिए नई खेल नीति जल्द से जल्द तैयार की जाए। इसके लिए खेल पेशेवरों की मदद ली जानी चाहिए। सके अलावा, उन्होंने अधिकारियों को मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय के काम में तेजी लाने और एक प्रतिष्ठित खिलाड़ी को कुलपति के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया है।

शिक्षकों को कैशलेस इलाज की सुविधा
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हर संस्थान में करियर काउंसलिंग सेल स्थापित करने, सरकारी स्कूल के शिक्षकों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने और अगले छह महीने में कैश ट्रांसफर के रूप में छात्रों को ड्रैस और अन्य सामान के लिए पैसा सुनिश्चित करने को कहा है। इसके अलावा, सीएम ने उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय फार्मेसी, एक बायो-इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान और योजना और शहरी प्रबंधन के एक स्कूल की स्थापना के लिए एक योजना तैयार करने का निर्देश दिया।



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UP Board New Exam Pattern: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board Exam New Pattern) की कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा अब नए पैटर्न से होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा क्षेत्र में प्रमुख सुधारों को लागू करने का निर्णय लिया है। इसके अनुसार, कक्षा 10वीं की परीक्षा आगामी शैक्षणिक सत्र 2023 से नए पैटर्न के आधार पर होगी, जबकि 12वीं के लिए नया पैटर्न 2025 से लाग होगा।

राज्य की समग्र शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में सीएम योगी ने कुशल पेशेवरों के तहत कक्षा 9वीं और कक्षा 11वीं के छात्रों के लिए इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरू करने का निर्देश दिया। इसके अलावा सीएम ने दो साल के भीतर संस्कृत शिक्षा निदेशालय का गठन करने को कहा है।

एनआईआरएफ की तर्ज पर शुरू होगा एसआईआरएफ
सीएम ने अधिकारियों से एनआईआरएफ की तर्ज पर शिक्षा संस्थानों के लिए राज्य स्तरीय रैंकिंग ढांचा शुरू करने के लिए भी कहा है। सीएम ने कहा कि एनआईआरएफ की तर्ज पर एक एसआईआरएफ शुरू किया जाना चाहिए। यह संस्थानों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और सभी को सुधार के लिए प्रयास करने में मदद करेगा। यह छात्रों को प्रवेश हासिल करने और संस्थानों के चयन में प्लेसमेंट एजेंसियों की भी मदद करेगा।

पेशेवरों की मदद से बनेगी नई खेल नीति
उन्होंने खिलाडियों के सहयोग से राज्य की नई खेल नीति तैयार करने के निर्देश दिए है। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि राज्य के लिए नई खेल नीति जल्द से जल्द तैयार की जाए। इसके लिए खेल पेशेवरों की मदद ली जानी चाहिए। सके अलावा, उन्होंने अधिकारियों को मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय के काम में तेजी लाने और एक प्रतिष्ठित खिलाड़ी को कुलपति के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया है।

शिक्षकों को कैशलेस इलाज की सुविधा
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हर संस्थान में करियर काउंसलिंग सेल स्थापित करने, सरकारी स्कूल के शिक्षकों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने और अगले छह महीने में कैश ट्रांसफर के रूप में छात्रों को ड्रैस और अन्य सामान के लिए पैसा सुनिश्चित करने को कहा है। इसके अलावा, सीएम ने उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय फार्मेसी, एक बायो-इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान और योजना और शहरी प्रबंधन के एक स्कूल की स्थापना के लिए एक योजना तैयार करने का निर्देश दिया।

Wednesday, April 20, 2022

डीयू : स्नातक प्रथम वर्ष का पाठ्यक्रम जल्द

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलपति योगेश सिंह का कहना है कि चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के तहत प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम दो-तीन महीने में तैयार हो जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुसार तैयार स्नातक पाठ्यक्रम रूपरेखा (यूजीसीएफ) को 11 फरवरी को विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (ईसी) ने मंजूरी दी थी। सिंह ने कहा कि समितियों का गठन किया गया है।

वे पाठ्यक्रम पर काम कर रहे हैं और यह शैक्षणिक सत्र 2022-23 शुरू होने से पहले दो-तीन महीने में तैयार हो जाएगा। कुलपति ने कहा कि सामान्य विवि प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) के जरिए डीयू में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थी नए पाठ्यक्रम का अध्ययन करेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मसविदे में कहा गया है कि विद्यार्थियों को आनर्स/शोध के साथ चार साल की डिग्री के लिए 160 से 176 ‘क्रेडिट’ अर्जित करने होंगे।

अब एक साथ दो शैक्षणिक पाठ्यक्रम करना संभव, दिशानिर्देश जारी

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दो शैक्षणिक कार्यक्रमों को एक साथ प्रत्यक्ष, आनलाइन या दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से करने की अनुमति के लिए दिशानिर्देश अधिसूचित कर दिए। उन विद्यार्थियों द्वारा कोई पूर्व समय से लाभ का दावा नहीं किया जा सकता है, जिन्होंने इन दिशानिर्देशों की अधिसूचना से पहले एक साथ दो शैक्षणिक कार्यक्रम किए हैं।

दिशानिर्देश में कहा गया है कि कोई विद्यार्थी प्रत्यक्ष माध्यम में दो पूर्णकालिक शैक्षणिक कार्यक्रमों को कर सकता है बशर्ते कि ऐसे मामलों में एक कार्यक्रम के लिए कक्षा के समय का दूसरे कार्यक्रम की कक्षा के समय के साथ मिलान न हो। कोई विद्यार्थी दो शैक्षणिक कार्यक्रमों को एक पूर्णकालिक प्रत्यक्ष मोड में और दूसरा खुला एवं दूरस्थ माध्यम (ओडीएल), आनलाइन माध्यम में या एक साथ दो ओडीएल और आनलाइन कार्यक्रम के जरिए पूरा कर सकता है।

इसमें कहा गया कि ओडीएल या आनलाइन माध्यम के तहत डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रमों को केवल ऐसे एचईआइ (उच्च शिक्षा संस्थानों) के साथ आगे बढ़ाया जाएगा जिन्हें यूजीसी, वैधानिक परिषद या केंद्र सरकार द्वारा ऐसे कार्यक्रम चलाने के लिए मान्यता प्राप्त है। यूजीसी ने सूचित किया है कि इन दिशानिर्देशों के तहत डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रम उसके द्वारा अधिसूचित नियमों और संबंधित वैधानिक और पेशेवर परिषदों, जहां भी लागू हो, द्वारा शासित होंगे।

यूजीसी ने कहा कि दिशानिर्देश केवल पीएचडी कार्यक्रम के अलावा अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों का अनुसरण करने वाले विद्यार्थियों पर लागू होंगे। दिशानिर्देशों के आधार पर, विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को एक साथ दो शैक्षणिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की अनुमति देने के लिए अपने वैधानिक निकायों के माध्यम से तंत्र तैयार कर सकते हैं।

जून में आयोजित होगी यूजीसी-नेट परीक्षा

यूजीसी की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) का आयोजन जून के पहले या दूसरे सप्ताह में होगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजंसी जल्द ही तिथियों का एलान करेगी। दूसरी ओर, असम, मणिपुर, सिक्किम, त्रिपुरा, बिहार और झारखंड के राज्य विश्वविद्यालय भी साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) के माध्यम से स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला देंगे। यूजीसी के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार के मुताबिक दिसंबर 2021 और जून 2022 की यूजीसी नेट परीक्षा का आयोजन एक साथ कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह परीक्षा जून के पहले या दूसरे सप्ताह में होगी।

परीक्षा का विस्तृत कार्यक्रम राष्ट्रीय परीक्षा एजंसी जारी करेगी। परीक्षा कार्यक्रम जारी होने के बाद इसके लिए आनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। यह परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाती रही है लेकिन कोरोना महामारी के चलते परीक्षा को एक साथ किया जा रहा है। यह परीक्षा भारतीय युवाओं के लिए विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर, जूनियर रिसर्च फेलो या दोनों योग्यताओं के लिए आयोजित की जाती है।



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दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलपति योगेश सिंह का कहना है कि चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के तहत प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम दो-तीन महीने में तैयार हो जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुसार तैयार स्नातक पाठ्यक्रम रूपरेखा (यूजीसीएफ) को 11 फरवरी को विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (ईसी) ने मंजूरी दी थी। सिंह ने कहा कि समितियों का गठन किया गया है।

वे पाठ्यक्रम पर काम कर रहे हैं और यह शैक्षणिक सत्र 2022-23 शुरू होने से पहले दो-तीन महीने में तैयार हो जाएगा। कुलपति ने कहा कि सामान्य विवि प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) के जरिए डीयू में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थी नए पाठ्यक्रम का अध्ययन करेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मसविदे में कहा गया है कि विद्यार्थियों को आनर्स/शोध के साथ चार साल की डिग्री के लिए 160 से 176 ‘क्रेडिट’ अर्जित करने होंगे।

अब एक साथ दो शैक्षणिक पाठ्यक्रम करना संभव, दिशानिर्देश जारी

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दो शैक्षणिक कार्यक्रमों को एक साथ प्रत्यक्ष, आनलाइन या दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से करने की अनुमति के लिए दिशानिर्देश अधिसूचित कर दिए। उन विद्यार्थियों द्वारा कोई पूर्व समय से लाभ का दावा नहीं किया जा सकता है, जिन्होंने इन दिशानिर्देशों की अधिसूचना से पहले एक साथ दो शैक्षणिक कार्यक्रम किए हैं।

दिशानिर्देश में कहा गया है कि कोई विद्यार्थी प्रत्यक्ष माध्यम में दो पूर्णकालिक शैक्षणिक कार्यक्रमों को कर सकता है बशर्ते कि ऐसे मामलों में एक कार्यक्रम के लिए कक्षा के समय का दूसरे कार्यक्रम की कक्षा के समय के साथ मिलान न हो। कोई विद्यार्थी दो शैक्षणिक कार्यक्रमों को एक पूर्णकालिक प्रत्यक्ष मोड में और दूसरा खुला एवं दूरस्थ माध्यम (ओडीएल), आनलाइन माध्यम में या एक साथ दो ओडीएल और आनलाइन कार्यक्रम के जरिए पूरा कर सकता है।

इसमें कहा गया कि ओडीएल या आनलाइन माध्यम के तहत डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रमों को केवल ऐसे एचईआइ (उच्च शिक्षा संस्थानों) के साथ आगे बढ़ाया जाएगा जिन्हें यूजीसी, वैधानिक परिषद या केंद्र सरकार द्वारा ऐसे कार्यक्रम चलाने के लिए मान्यता प्राप्त है। यूजीसी ने सूचित किया है कि इन दिशानिर्देशों के तहत डिग्री या डिप्लोमा कार्यक्रम उसके द्वारा अधिसूचित नियमों और संबंधित वैधानिक और पेशेवर परिषदों, जहां भी लागू हो, द्वारा शासित होंगे।

यूजीसी ने कहा कि दिशानिर्देश केवल पीएचडी कार्यक्रम के अलावा अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों का अनुसरण करने वाले विद्यार्थियों पर लागू होंगे। दिशानिर्देशों के आधार पर, विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को एक साथ दो शैक्षणिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की अनुमति देने के लिए अपने वैधानिक निकायों के माध्यम से तंत्र तैयार कर सकते हैं।

जून में आयोजित होगी यूजीसी-नेट परीक्षा

यूजीसी की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) का आयोजन जून के पहले या दूसरे सप्ताह में होगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजंसी जल्द ही तिथियों का एलान करेगी। दूसरी ओर, असम, मणिपुर, सिक्किम, त्रिपुरा, बिहार और झारखंड के राज्य विश्वविद्यालय भी साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) के माध्यम से स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला देंगे। यूजीसी के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार के मुताबिक दिसंबर 2021 और जून 2022 की यूजीसी नेट परीक्षा का आयोजन एक साथ कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह परीक्षा जून के पहले या दूसरे सप्ताह में होगी।

परीक्षा का विस्तृत कार्यक्रम राष्ट्रीय परीक्षा एजंसी जारी करेगी। परीक्षा कार्यक्रम जारी होने के बाद इसके लिए आनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। यह परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाती रही है लेकिन कोरोना महामारी के चलते परीक्षा को एक साथ किया जा रहा है। यह परीक्षा भारतीय युवाओं के लिए विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर, जूनियर रिसर्च फेलो या दोनों योग्यताओं के लिए आयोजित की जाती है।

पशु चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अनेक मौके

भारत में पशुधन लाखों लोगों की आय और रोजगार सृजन के लिए एक महत्त्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभरा है। पशु चिकित्सक दवा विकास और दवा उद्योग, खाद्य उद्योग, सरकार और नियामक मामलों, शिक्षण व अनुसंधान में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत में पशु चिकित्सा शिक्षा

भारत में पशु चिकित्सा शिक्षा वर्तमान शिक्षा प्रणाली का एक अभिन्न अंग है। देश में 41 पशु चिकित्सा महाविद्यालय हैं जो पशु चिकित्सक स्नातक तैयार करते हैं इसके अलावा सात पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय और 37 राज्य कृषि विश्वविद्यालय और दो डीम्ड विश्वविद्यालय (आइवीआरआइ और एनडीआरआइ) पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान में स्नातकोत्तर योग्यता से संबंधित हैं। पशु चिकित्सा महाविद्यालय प्रति वर्ष 2,500 से अधिक पशु चिकित्सा स्नातकों को तैयार करते हैं। डिग्री प्रोग्राम के लिए ‘कोर्स वर्क’ के नौ सेमेस्टर और उसके बाद छह महीने के अनिवार्य प्रशिक्षु कार्यक्रम से गुजरना पड़ता है।

पशु चिकित्सा स्नातकों के लिए अवसर

स्नातक पशु चिकित्सक के लिए कई रास्ते खुले हैं और पशु चिकित्सा स्नातकों को नियुक्त करने वाले कुछ महत्त्वपूर्ण संस्थान निम्नलिखित हैं:
राज्य सरकारों के पशुपालन विभाग: विभिन्न राज्य सरकारें पशु चिकित्सा स्नातकों को पशु चिकित्सा अधिकारी/पशु चिकित्सा सर्जन के पद पर भर्ती करती हैं। ये भर्तियां संबंधित राज्य लोक सेवा आयोगों के माध्यम से की जाती हैं और पदों के लिए आवश्यक बुनियादी योग्यता पशु चिकित्सा विज्ञान में स्नातक की डिग्री है। राज्य के विभागों में पशु चिकित्सकों को पशु स्वास्थ्य कवर, पशु प्रजनन, पशु चिकित्सा और पशुपालन विस्तार, मांस निरीक्षण और मवेशी, भैंस, भेड़, बकरी, सुअर और मुर्गी उत्पादन, प्रजनन फार्म आदि की देखभाल जैसी भूमिकाओं का निर्वहन करना होता है।

फार्मास्युटिकल कंपनियां: बड़ी संख्या में भारतीय और बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों ने पशु चिकित्सा दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स के उत्पादन में प्रवेश किया है। वे दवाओं और टीकों के उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन के लिए पशु चिकित्सा स्नातकों को नियुक्त करते हैं। यह काम काफी चुनौतीपूर्ण, मांग वाला, व्यावसायिकता से जुड़ा हुआ और अपार अवसरों से भरा है।

प्रादेशिक सहकारी डेयरी संघ (पीसीडीएफ): पीसीडीएफ सहकारी समितियों के माध्यम से काम करते हैं और दूध और दूध उत्पादों के उत्पादन / खरीद और डेयरी पशुओं के उत्थान में शामिल हैं। यह पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य देखभाल, पशु चिकित्सा विस्तार और पशु प्रजनन सुविधाएं प्रदान करता है। इसमें बड़ी संख्या में पशु चिकित्सा स्नातकों की वहां आवश्यकता पडती है।

स्व-उद्यमिता : अपने स्वयं के पशु चिकित्सालय की स्थापना करिअर निर्माण का बेहतरीन अवसर देता है। इस क्रम में गांवों, महानगरों और कस्बों में निजी पशु चिकित्सा केंद्र खोल कर स्व-उद्यमिता को नये आयाम दिए जा सकते हैं। रिमाउंट वेटरनरी कोर (आरवीसी) : भारतीय सेना का आरवीसी अनुशासित और सक्रिय जीवन में रुचि रखने वाले इच्छुक और समर्पित पशु चिकित्सा स्नातक के लिए बहुत ही फायदेमंद करिअर प्रदान करता है। पशु चिकित्सा स्नातकों का चयन शार्ट सर्विस कमीशन में या स्थायी कमीशन के लिए किया जाता है और भर्ती सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से की जाती है। नौकरी के लिए सेना द्वारा बनाए गए जानवरों के प्रजनन, भोजन, प्रबंधन, रोग नियंत्रण और उपचार, प्रजनन केंद्रों का प्रबंधन, रिमाउंट डिपो, वधशालाओं और सैन्य डेयरी फार्म आदि की जरूरत होती है।

अर्धसैनिक बल: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और अन्य अर्धसैनिक बलों द्वारा सीमित संख्या में पशु चिकित्सा स्नातकों को कुत्ते और घोड़े के प्रजनन केंद्रों का प्रबंधन करने और पशु स्वास्थ्य कवर और निगरानी प्रदान करने के लिए भर्ती किया जाता है। स्टड फार्म / रेस कोर्स : स्टड फार्म भी पशु चिकित्सकों की भर्ती करते हैं जो घोड़ों के प्रजनन, भोजन और प्रबंधन की देखभाल करते हैं। नौकरी काफी चुनौतीपूर्ण है, इसलिए परिलब्धियां हैं, पशु चिकित्सकों के लिए रुचि और योग्यता रखने वाले पशु चिकित्सकों को सलाहकार के रूप में और जानवरों के इलाज के लिए महानगरीय शहरों में विभिन्न रेस कोर्स द्वारा लगाया जाता है।

बैंक और बीमा कंपनियां: दुधारू पशुओं की खरीद, विभिन्न परियोजना प्रस्तावों की तैयारी, स्क्रीनिंग आदि के लिए धन की मंजूरी / पुरस्कार की निगरानी और निगरानी के लिए होती हैं। इस क्षेत्र में पशु चिकित्सकों की आवश्यकता होती है।निजी पोल्ट्री उत्पादन और डेयरी फार्म: कई निजी पोल्ट्री और डेयरी फार्म और निजी हैचरी भी उस क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव रखने वाले पशु चिकित्सा स्नातकों को आकर्षक रोजगार प्रदान करते हैं।

पवन विजय (शिक्षक, डीआइआरडी, आइपीयू)



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भारत में पशुधन लाखों लोगों की आय और रोजगार सृजन के लिए एक महत्त्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभरा है। पशु चिकित्सक दवा विकास और दवा उद्योग, खाद्य उद्योग, सरकार और नियामक मामलों, शिक्षण व अनुसंधान में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत में पशु चिकित्सा शिक्षा

भारत में पशु चिकित्सा शिक्षा वर्तमान शिक्षा प्रणाली का एक अभिन्न अंग है। देश में 41 पशु चिकित्सा महाविद्यालय हैं जो पशु चिकित्सक स्नातक तैयार करते हैं इसके अलावा सात पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय और 37 राज्य कृषि विश्वविद्यालय और दो डीम्ड विश्वविद्यालय (आइवीआरआइ और एनडीआरआइ) पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान में स्नातकोत्तर योग्यता से संबंधित हैं। पशु चिकित्सा महाविद्यालय प्रति वर्ष 2,500 से अधिक पशु चिकित्सा स्नातकों को तैयार करते हैं। डिग्री प्रोग्राम के लिए ‘कोर्स वर्क’ के नौ सेमेस्टर और उसके बाद छह महीने के अनिवार्य प्रशिक्षु कार्यक्रम से गुजरना पड़ता है।

पशु चिकित्सा स्नातकों के लिए अवसर

स्नातक पशु चिकित्सक के लिए कई रास्ते खुले हैं और पशु चिकित्सा स्नातकों को नियुक्त करने वाले कुछ महत्त्वपूर्ण संस्थान निम्नलिखित हैं:
राज्य सरकारों के पशुपालन विभाग: विभिन्न राज्य सरकारें पशु चिकित्सा स्नातकों को पशु चिकित्सा अधिकारी/पशु चिकित्सा सर्जन के पद पर भर्ती करती हैं। ये भर्तियां संबंधित राज्य लोक सेवा आयोगों के माध्यम से की जाती हैं और पदों के लिए आवश्यक बुनियादी योग्यता पशु चिकित्सा विज्ञान में स्नातक की डिग्री है। राज्य के विभागों में पशु चिकित्सकों को पशु स्वास्थ्य कवर, पशु प्रजनन, पशु चिकित्सा और पशुपालन विस्तार, मांस निरीक्षण और मवेशी, भैंस, भेड़, बकरी, सुअर और मुर्गी उत्पादन, प्रजनन फार्म आदि की देखभाल जैसी भूमिकाओं का निर्वहन करना होता है।

फार्मास्युटिकल कंपनियां: बड़ी संख्या में भारतीय और बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों ने पशु चिकित्सा दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स के उत्पादन में प्रवेश किया है। वे दवाओं और टीकों के उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन के लिए पशु चिकित्सा स्नातकों को नियुक्त करते हैं। यह काम काफी चुनौतीपूर्ण, मांग वाला, व्यावसायिकता से जुड़ा हुआ और अपार अवसरों से भरा है।

प्रादेशिक सहकारी डेयरी संघ (पीसीडीएफ): पीसीडीएफ सहकारी समितियों के माध्यम से काम करते हैं और दूध और दूध उत्पादों के उत्पादन / खरीद और डेयरी पशुओं के उत्थान में शामिल हैं। यह पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य देखभाल, पशु चिकित्सा विस्तार और पशु प्रजनन सुविधाएं प्रदान करता है। इसमें बड़ी संख्या में पशु चिकित्सा स्नातकों की वहां आवश्यकता पडती है।

स्व-उद्यमिता : अपने स्वयं के पशु चिकित्सालय की स्थापना करिअर निर्माण का बेहतरीन अवसर देता है। इस क्रम में गांवों, महानगरों और कस्बों में निजी पशु चिकित्सा केंद्र खोल कर स्व-उद्यमिता को नये आयाम दिए जा सकते हैं। रिमाउंट वेटरनरी कोर (आरवीसी) : भारतीय सेना का आरवीसी अनुशासित और सक्रिय जीवन में रुचि रखने वाले इच्छुक और समर्पित पशु चिकित्सा स्नातक के लिए बहुत ही फायदेमंद करिअर प्रदान करता है। पशु चिकित्सा स्नातकों का चयन शार्ट सर्विस कमीशन में या स्थायी कमीशन के लिए किया जाता है और भर्ती सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से की जाती है। नौकरी के लिए सेना द्वारा बनाए गए जानवरों के प्रजनन, भोजन, प्रबंधन, रोग नियंत्रण और उपचार, प्रजनन केंद्रों का प्रबंधन, रिमाउंट डिपो, वधशालाओं और सैन्य डेयरी फार्म आदि की जरूरत होती है।

अर्धसैनिक बल: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और अन्य अर्धसैनिक बलों द्वारा सीमित संख्या में पशु चिकित्सा स्नातकों को कुत्ते और घोड़े के प्रजनन केंद्रों का प्रबंधन करने और पशु स्वास्थ्य कवर और निगरानी प्रदान करने के लिए भर्ती किया जाता है। स्टड फार्म / रेस कोर्स : स्टड फार्म भी पशु चिकित्सकों की भर्ती करते हैं जो घोड़ों के प्रजनन, भोजन और प्रबंधन की देखभाल करते हैं। नौकरी काफी चुनौतीपूर्ण है, इसलिए परिलब्धियां हैं, पशु चिकित्सकों के लिए रुचि और योग्यता रखने वाले पशु चिकित्सकों को सलाहकार के रूप में और जानवरों के इलाज के लिए महानगरीय शहरों में विभिन्न रेस कोर्स द्वारा लगाया जाता है।

बैंक और बीमा कंपनियां: दुधारू पशुओं की खरीद, विभिन्न परियोजना प्रस्तावों की तैयारी, स्क्रीनिंग आदि के लिए धन की मंजूरी / पुरस्कार की निगरानी और निगरानी के लिए होती हैं। इस क्षेत्र में पशु चिकित्सकों की आवश्यकता होती है।निजी पोल्ट्री उत्पादन और डेयरी फार्म: कई निजी पोल्ट्री और डेयरी फार्म और निजी हैचरी भी उस क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव रखने वाले पशु चिकित्सा स्नातकों को आकर्षक रोजगार प्रदान करते हैं।

पवन विजय (शिक्षक, डीआइआरडी, आइपीयू)

योग सिखाएं सेहत के साथ धन भी कमाएं

आज की भागदौड़ से भरी दुनिया में लोगों के शारीरिक कार्यों में कमी आई है और मानसिक तनाव बढ़ गया है। यही वजह है कि लोग शरीर को रोगमुक्त और मन को शांत रखने के लिए योग को अपनाने लगे हैं। लेकिन गलत तरीके से किया गया योग फायदे के स्थान पर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए लोग योग प्रशिक्षक के जरिए योग करना पसंद करते हैं। यही वजह है कि इन दिनों अच्छे और योग्य योग प्रशिक्षकों की मांग बढ़ गई है और योग एक बेहतर करिअर विकल्प के रूप में उभरा है।

वैसे तो योग सिखाने के लिए किसी डिग्री की जरूरत से ज्यादा खुद की जानकारी ही काम आती है लेकिन, अपना योग केंद्र खोलने के लिए आपको योग में डिग्री हासिल करनी चाहिए। देश में कई ऐसे संस्थान हैं जो योग में अलग-अलग स्तर पर पाठ्यक्रम चलाते हैं। ये पाठ्यक्रम प्रमाणपत्र से लेकर पीएचडी तक हैं। इन्हें करने के बाद आप योग को बतौर करिअर अपना सकते है।

भारत में दसवीं या बारहवीं के बाद भी योग से जुड़े कई प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इसके अलावा योग में डिप्लोमा, बीएड और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी किए जा सकते हैं। एक अच्छे योग प्रशिक्षक को पोषण, फिटनेस, वजन प्रबंधन, तनाव प्रबंधन आदि जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देना होता है। योग प्रशिक्षक बनने के लिए योग की विधियों का ज्ञान होना बहुत आवश्यक है। योग प्रशिक्षक बनने से पहले जरूरी है कि आपको योग की पूरी समझ और जानकारी हो। योग में आसनों को बिल्कुल सही तरीके से करना आवश्यक होता है।

योग से संबंधित पाठ्यक्रम करने के बाद योग प्रशिक्षक बनने के इच्छुक लोगों को चाहिए कि वह कुछ साल योग का गहनता के साथ अभ्यास करें। योग की जानकारी के साथ योग करने की गुणवत्ता भी महत्त्वपूर्ण होती है। आप योग का पाठ्यक्रम करने के बाद किसी स्कूल या कालेज में योग शिक्षक के पद पर नियुक्त हो सकते हैं। देश में कई ऐसे योग शिक्षण संस्थान हैं, जहां योग शिक्षकों के लिए भरपूर जगह है।

इतना ही नहीं योग शिक्षक अपना खुद का काम भी शुरू कर सकते हैं। प्रशिक्षण केंद्र खोलकर एक अच्छा प्रशिक्षक आराम से 20-30 हजार रुपए महीना कमा सकता है। वहीं, अगर प्रशिक्षक किसी के घर पर जाकर योग सिखाता है तो वहां का शुल्क और ज्यादा होता है। जबकि खास बामीर से जूझ रहे मरीजों को योग सिखाने पर प्रति महीने करीब 50-60 हजार रुपए कमाए जा सकते हैं। अनुभव के साथ प्रशिक्षक की कमाई भी बढ़ती जाती है। कई बार यह कमाई एक से दो लाख रुपए महीने भी हो सकती है।

प्रस्तुति : सुशील राघव



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आज की भागदौड़ से भरी दुनिया में लोगों के शारीरिक कार्यों में कमी आई है और मानसिक तनाव बढ़ गया है। यही वजह है कि लोग शरीर को रोगमुक्त और मन को शांत रखने के लिए योग को अपनाने लगे हैं। लेकिन गलत तरीके से किया गया योग फायदे के स्थान पर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए लोग योग प्रशिक्षक के जरिए योग करना पसंद करते हैं। यही वजह है कि इन दिनों अच्छे और योग्य योग प्रशिक्षकों की मांग बढ़ गई है और योग एक बेहतर करिअर विकल्प के रूप में उभरा है।

वैसे तो योग सिखाने के लिए किसी डिग्री की जरूरत से ज्यादा खुद की जानकारी ही काम आती है लेकिन, अपना योग केंद्र खोलने के लिए आपको योग में डिग्री हासिल करनी चाहिए। देश में कई ऐसे संस्थान हैं जो योग में अलग-अलग स्तर पर पाठ्यक्रम चलाते हैं। ये पाठ्यक्रम प्रमाणपत्र से लेकर पीएचडी तक हैं। इन्हें करने के बाद आप योग को बतौर करिअर अपना सकते है।

भारत में दसवीं या बारहवीं के बाद भी योग से जुड़े कई प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इसके अलावा योग में डिप्लोमा, बीएड और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी किए जा सकते हैं। एक अच्छे योग प्रशिक्षक को पोषण, फिटनेस, वजन प्रबंधन, तनाव प्रबंधन आदि जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देना होता है। योग प्रशिक्षक बनने के लिए योग की विधियों का ज्ञान होना बहुत आवश्यक है। योग प्रशिक्षक बनने से पहले जरूरी है कि आपको योग की पूरी समझ और जानकारी हो। योग में आसनों को बिल्कुल सही तरीके से करना आवश्यक होता है।

योग से संबंधित पाठ्यक्रम करने के बाद योग प्रशिक्षक बनने के इच्छुक लोगों को चाहिए कि वह कुछ साल योग का गहनता के साथ अभ्यास करें। योग की जानकारी के साथ योग करने की गुणवत्ता भी महत्त्वपूर्ण होती है। आप योग का पाठ्यक्रम करने के बाद किसी स्कूल या कालेज में योग शिक्षक के पद पर नियुक्त हो सकते हैं। देश में कई ऐसे योग शिक्षण संस्थान हैं, जहां योग शिक्षकों के लिए भरपूर जगह है।

इतना ही नहीं योग शिक्षक अपना खुद का काम भी शुरू कर सकते हैं। प्रशिक्षण केंद्र खोलकर एक अच्छा प्रशिक्षक आराम से 20-30 हजार रुपए महीना कमा सकता है। वहीं, अगर प्रशिक्षक किसी के घर पर जाकर योग सिखाता है तो वहां का शुल्क और ज्यादा होता है। जबकि खास बामीर से जूझ रहे मरीजों को योग सिखाने पर प्रति महीने करीब 50-60 हजार रुपए कमाए जा सकते हैं। अनुभव के साथ प्रशिक्षक की कमाई भी बढ़ती जाती है। कई बार यह कमाई एक से दो लाख रुपए महीने भी हो सकती है।

प्रस्तुति : सुशील राघव