Wednesday, April 20, 2022

पशु चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अनेक मौके

भारत में पशुधन लाखों लोगों की आय और रोजगार सृजन के लिए एक महत्त्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभरा है। पशु चिकित्सक दवा विकास और दवा उद्योग, खाद्य उद्योग, सरकार और नियामक मामलों, शिक्षण व अनुसंधान में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत में पशु चिकित्सा शिक्षा

भारत में पशु चिकित्सा शिक्षा वर्तमान शिक्षा प्रणाली का एक अभिन्न अंग है। देश में 41 पशु चिकित्सा महाविद्यालय हैं जो पशु चिकित्सक स्नातक तैयार करते हैं इसके अलावा सात पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय और 37 राज्य कृषि विश्वविद्यालय और दो डीम्ड विश्वविद्यालय (आइवीआरआइ और एनडीआरआइ) पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान में स्नातकोत्तर योग्यता से संबंधित हैं। पशु चिकित्सा महाविद्यालय प्रति वर्ष 2,500 से अधिक पशु चिकित्सा स्नातकों को तैयार करते हैं। डिग्री प्रोग्राम के लिए ‘कोर्स वर्क’ के नौ सेमेस्टर और उसके बाद छह महीने के अनिवार्य प्रशिक्षु कार्यक्रम से गुजरना पड़ता है।

पशु चिकित्सा स्नातकों के लिए अवसर

स्नातक पशु चिकित्सक के लिए कई रास्ते खुले हैं और पशु चिकित्सा स्नातकों को नियुक्त करने वाले कुछ महत्त्वपूर्ण संस्थान निम्नलिखित हैं:
राज्य सरकारों के पशुपालन विभाग: विभिन्न राज्य सरकारें पशु चिकित्सा स्नातकों को पशु चिकित्सा अधिकारी/पशु चिकित्सा सर्जन के पद पर भर्ती करती हैं। ये भर्तियां संबंधित राज्य लोक सेवा आयोगों के माध्यम से की जाती हैं और पदों के लिए आवश्यक बुनियादी योग्यता पशु चिकित्सा विज्ञान में स्नातक की डिग्री है। राज्य के विभागों में पशु चिकित्सकों को पशु स्वास्थ्य कवर, पशु प्रजनन, पशु चिकित्सा और पशुपालन विस्तार, मांस निरीक्षण और मवेशी, भैंस, भेड़, बकरी, सुअर और मुर्गी उत्पादन, प्रजनन फार्म आदि की देखभाल जैसी भूमिकाओं का निर्वहन करना होता है।

फार्मास्युटिकल कंपनियां: बड़ी संख्या में भारतीय और बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों ने पशु चिकित्सा दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स के उत्पादन में प्रवेश किया है। वे दवाओं और टीकों के उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन के लिए पशु चिकित्सा स्नातकों को नियुक्त करते हैं। यह काम काफी चुनौतीपूर्ण, मांग वाला, व्यावसायिकता से जुड़ा हुआ और अपार अवसरों से भरा है।

प्रादेशिक सहकारी डेयरी संघ (पीसीडीएफ): पीसीडीएफ सहकारी समितियों के माध्यम से काम करते हैं और दूध और दूध उत्पादों के उत्पादन / खरीद और डेयरी पशुओं के उत्थान में शामिल हैं। यह पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य देखभाल, पशु चिकित्सा विस्तार और पशु प्रजनन सुविधाएं प्रदान करता है। इसमें बड़ी संख्या में पशु चिकित्सा स्नातकों की वहां आवश्यकता पडती है।

स्व-उद्यमिता : अपने स्वयं के पशु चिकित्सालय की स्थापना करिअर निर्माण का बेहतरीन अवसर देता है। इस क्रम में गांवों, महानगरों और कस्बों में निजी पशु चिकित्सा केंद्र खोल कर स्व-उद्यमिता को नये आयाम दिए जा सकते हैं। रिमाउंट वेटरनरी कोर (आरवीसी) : भारतीय सेना का आरवीसी अनुशासित और सक्रिय जीवन में रुचि रखने वाले इच्छुक और समर्पित पशु चिकित्सा स्नातक के लिए बहुत ही फायदेमंद करिअर प्रदान करता है। पशु चिकित्सा स्नातकों का चयन शार्ट सर्विस कमीशन में या स्थायी कमीशन के लिए किया जाता है और भर्ती सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से की जाती है। नौकरी के लिए सेना द्वारा बनाए गए जानवरों के प्रजनन, भोजन, प्रबंधन, रोग नियंत्रण और उपचार, प्रजनन केंद्रों का प्रबंधन, रिमाउंट डिपो, वधशालाओं और सैन्य डेयरी फार्म आदि की जरूरत होती है।

अर्धसैनिक बल: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और अन्य अर्धसैनिक बलों द्वारा सीमित संख्या में पशु चिकित्सा स्नातकों को कुत्ते और घोड़े के प्रजनन केंद्रों का प्रबंधन करने और पशु स्वास्थ्य कवर और निगरानी प्रदान करने के लिए भर्ती किया जाता है। स्टड फार्म / रेस कोर्स : स्टड फार्म भी पशु चिकित्सकों की भर्ती करते हैं जो घोड़ों के प्रजनन, भोजन और प्रबंधन की देखभाल करते हैं। नौकरी काफी चुनौतीपूर्ण है, इसलिए परिलब्धियां हैं, पशु चिकित्सकों के लिए रुचि और योग्यता रखने वाले पशु चिकित्सकों को सलाहकार के रूप में और जानवरों के इलाज के लिए महानगरीय शहरों में विभिन्न रेस कोर्स द्वारा लगाया जाता है।

बैंक और बीमा कंपनियां: दुधारू पशुओं की खरीद, विभिन्न परियोजना प्रस्तावों की तैयारी, स्क्रीनिंग आदि के लिए धन की मंजूरी / पुरस्कार की निगरानी और निगरानी के लिए होती हैं। इस क्षेत्र में पशु चिकित्सकों की आवश्यकता होती है।निजी पोल्ट्री उत्पादन और डेयरी फार्म: कई निजी पोल्ट्री और डेयरी फार्म और निजी हैचरी भी उस क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव रखने वाले पशु चिकित्सा स्नातकों को आकर्षक रोजगार प्रदान करते हैं।

पवन विजय (शिक्षक, डीआइआरडी, आइपीयू)



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भारत में पशुधन लाखों लोगों की आय और रोजगार सृजन के लिए एक महत्त्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभरा है। पशु चिकित्सक दवा विकास और दवा उद्योग, खाद्य उद्योग, सरकार और नियामक मामलों, शिक्षण व अनुसंधान में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत में पशु चिकित्सा शिक्षा

भारत में पशु चिकित्सा शिक्षा वर्तमान शिक्षा प्रणाली का एक अभिन्न अंग है। देश में 41 पशु चिकित्सा महाविद्यालय हैं जो पशु चिकित्सक स्नातक तैयार करते हैं इसके अलावा सात पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय और 37 राज्य कृषि विश्वविद्यालय और दो डीम्ड विश्वविद्यालय (आइवीआरआइ और एनडीआरआइ) पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान में स्नातकोत्तर योग्यता से संबंधित हैं। पशु चिकित्सा महाविद्यालय प्रति वर्ष 2,500 से अधिक पशु चिकित्सा स्नातकों को तैयार करते हैं। डिग्री प्रोग्राम के लिए ‘कोर्स वर्क’ के नौ सेमेस्टर और उसके बाद छह महीने के अनिवार्य प्रशिक्षु कार्यक्रम से गुजरना पड़ता है।

पशु चिकित्सा स्नातकों के लिए अवसर

स्नातक पशु चिकित्सक के लिए कई रास्ते खुले हैं और पशु चिकित्सा स्नातकों को नियुक्त करने वाले कुछ महत्त्वपूर्ण संस्थान निम्नलिखित हैं:
राज्य सरकारों के पशुपालन विभाग: विभिन्न राज्य सरकारें पशु चिकित्सा स्नातकों को पशु चिकित्सा अधिकारी/पशु चिकित्सा सर्जन के पद पर भर्ती करती हैं। ये भर्तियां संबंधित राज्य लोक सेवा आयोगों के माध्यम से की जाती हैं और पदों के लिए आवश्यक बुनियादी योग्यता पशु चिकित्सा विज्ञान में स्नातक की डिग्री है। राज्य के विभागों में पशु चिकित्सकों को पशु स्वास्थ्य कवर, पशु प्रजनन, पशु चिकित्सा और पशुपालन विस्तार, मांस निरीक्षण और मवेशी, भैंस, भेड़, बकरी, सुअर और मुर्गी उत्पादन, प्रजनन फार्म आदि की देखभाल जैसी भूमिकाओं का निर्वहन करना होता है।

फार्मास्युटिकल कंपनियां: बड़ी संख्या में भारतीय और बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों ने पशु चिकित्सा दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स के उत्पादन में प्रवेश किया है। वे दवाओं और टीकों के उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन के लिए पशु चिकित्सा स्नातकों को नियुक्त करते हैं। यह काम काफी चुनौतीपूर्ण, मांग वाला, व्यावसायिकता से जुड़ा हुआ और अपार अवसरों से भरा है।

प्रादेशिक सहकारी डेयरी संघ (पीसीडीएफ): पीसीडीएफ सहकारी समितियों के माध्यम से काम करते हैं और दूध और दूध उत्पादों के उत्पादन / खरीद और डेयरी पशुओं के उत्थान में शामिल हैं। यह पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य देखभाल, पशु चिकित्सा विस्तार और पशु प्रजनन सुविधाएं प्रदान करता है। इसमें बड़ी संख्या में पशु चिकित्सा स्नातकों की वहां आवश्यकता पडती है।

स्व-उद्यमिता : अपने स्वयं के पशु चिकित्सालय की स्थापना करिअर निर्माण का बेहतरीन अवसर देता है। इस क्रम में गांवों, महानगरों और कस्बों में निजी पशु चिकित्सा केंद्र खोल कर स्व-उद्यमिता को नये आयाम दिए जा सकते हैं। रिमाउंट वेटरनरी कोर (आरवीसी) : भारतीय सेना का आरवीसी अनुशासित और सक्रिय जीवन में रुचि रखने वाले इच्छुक और समर्पित पशु चिकित्सा स्नातक के लिए बहुत ही फायदेमंद करिअर प्रदान करता है। पशु चिकित्सा स्नातकों का चयन शार्ट सर्विस कमीशन में या स्थायी कमीशन के लिए किया जाता है और भर्ती सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से की जाती है। नौकरी के लिए सेना द्वारा बनाए गए जानवरों के प्रजनन, भोजन, प्रबंधन, रोग नियंत्रण और उपचार, प्रजनन केंद्रों का प्रबंधन, रिमाउंट डिपो, वधशालाओं और सैन्य डेयरी फार्म आदि की जरूरत होती है।

अर्धसैनिक बल: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और अन्य अर्धसैनिक बलों द्वारा सीमित संख्या में पशु चिकित्सा स्नातकों को कुत्ते और घोड़े के प्रजनन केंद्रों का प्रबंधन करने और पशु स्वास्थ्य कवर और निगरानी प्रदान करने के लिए भर्ती किया जाता है। स्टड फार्म / रेस कोर्स : स्टड फार्म भी पशु चिकित्सकों की भर्ती करते हैं जो घोड़ों के प्रजनन, भोजन और प्रबंधन की देखभाल करते हैं। नौकरी काफी चुनौतीपूर्ण है, इसलिए परिलब्धियां हैं, पशु चिकित्सकों के लिए रुचि और योग्यता रखने वाले पशु चिकित्सकों को सलाहकार के रूप में और जानवरों के इलाज के लिए महानगरीय शहरों में विभिन्न रेस कोर्स द्वारा लगाया जाता है।

बैंक और बीमा कंपनियां: दुधारू पशुओं की खरीद, विभिन्न परियोजना प्रस्तावों की तैयारी, स्क्रीनिंग आदि के लिए धन की मंजूरी / पुरस्कार की निगरानी और निगरानी के लिए होती हैं। इस क्षेत्र में पशु चिकित्सकों की आवश्यकता होती है।निजी पोल्ट्री उत्पादन और डेयरी फार्म: कई निजी पोल्ट्री और डेयरी फार्म और निजी हैचरी भी उस क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव रखने वाले पशु चिकित्सा स्नातकों को आकर्षक रोजगार प्रदान करते हैं।

पवन विजय (शिक्षक, डीआइआरडी, आइपीयू)

योग सिखाएं सेहत के साथ धन भी कमाएं

आज की भागदौड़ से भरी दुनिया में लोगों के शारीरिक कार्यों में कमी आई है और मानसिक तनाव बढ़ गया है। यही वजह है कि लोग शरीर को रोगमुक्त और मन को शांत रखने के लिए योग को अपनाने लगे हैं। लेकिन गलत तरीके से किया गया योग फायदे के स्थान पर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए लोग योग प्रशिक्षक के जरिए योग करना पसंद करते हैं। यही वजह है कि इन दिनों अच्छे और योग्य योग प्रशिक्षकों की मांग बढ़ गई है और योग एक बेहतर करिअर विकल्प के रूप में उभरा है।

वैसे तो योग सिखाने के लिए किसी डिग्री की जरूरत से ज्यादा खुद की जानकारी ही काम आती है लेकिन, अपना योग केंद्र खोलने के लिए आपको योग में डिग्री हासिल करनी चाहिए। देश में कई ऐसे संस्थान हैं जो योग में अलग-अलग स्तर पर पाठ्यक्रम चलाते हैं। ये पाठ्यक्रम प्रमाणपत्र से लेकर पीएचडी तक हैं। इन्हें करने के बाद आप योग को बतौर करिअर अपना सकते है।

भारत में दसवीं या बारहवीं के बाद भी योग से जुड़े कई प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इसके अलावा योग में डिप्लोमा, बीएड और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी किए जा सकते हैं। एक अच्छे योग प्रशिक्षक को पोषण, फिटनेस, वजन प्रबंधन, तनाव प्रबंधन आदि जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देना होता है। योग प्रशिक्षक बनने के लिए योग की विधियों का ज्ञान होना बहुत आवश्यक है। योग प्रशिक्षक बनने से पहले जरूरी है कि आपको योग की पूरी समझ और जानकारी हो। योग में आसनों को बिल्कुल सही तरीके से करना आवश्यक होता है।

योग से संबंधित पाठ्यक्रम करने के बाद योग प्रशिक्षक बनने के इच्छुक लोगों को चाहिए कि वह कुछ साल योग का गहनता के साथ अभ्यास करें। योग की जानकारी के साथ योग करने की गुणवत्ता भी महत्त्वपूर्ण होती है। आप योग का पाठ्यक्रम करने के बाद किसी स्कूल या कालेज में योग शिक्षक के पद पर नियुक्त हो सकते हैं। देश में कई ऐसे योग शिक्षण संस्थान हैं, जहां योग शिक्षकों के लिए भरपूर जगह है।

इतना ही नहीं योग शिक्षक अपना खुद का काम भी शुरू कर सकते हैं। प्रशिक्षण केंद्र खोलकर एक अच्छा प्रशिक्षक आराम से 20-30 हजार रुपए महीना कमा सकता है। वहीं, अगर प्रशिक्षक किसी के घर पर जाकर योग सिखाता है तो वहां का शुल्क और ज्यादा होता है। जबकि खास बामीर से जूझ रहे मरीजों को योग सिखाने पर प्रति महीने करीब 50-60 हजार रुपए कमाए जा सकते हैं। अनुभव के साथ प्रशिक्षक की कमाई भी बढ़ती जाती है। कई बार यह कमाई एक से दो लाख रुपए महीने भी हो सकती है।

प्रस्तुति : सुशील राघव



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आज की भागदौड़ से भरी दुनिया में लोगों के शारीरिक कार्यों में कमी आई है और मानसिक तनाव बढ़ गया है। यही वजह है कि लोग शरीर को रोगमुक्त और मन को शांत रखने के लिए योग को अपनाने लगे हैं। लेकिन गलत तरीके से किया गया योग फायदे के स्थान पर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए लोग योग प्रशिक्षक के जरिए योग करना पसंद करते हैं। यही वजह है कि इन दिनों अच्छे और योग्य योग प्रशिक्षकों की मांग बढ़ गई है और योग एक बेहतर करिअर विकल्प के रूप में उभरा है।

वैसे तो योग सिखाने के लिए किसी डिग्री की जरूरत से ज्यादा खुद की जानकारी ही काम आती है लेकिन, अपना योग केंद्र खोलने के लिए आपको योग में डिग्री हासिल करनी चाहिए। देश में कई ऐसे संस्थान हैं जो योग में अलग-अलग स्तर पर पाठ्यक्रम चलाते हैं। ये पाठ्यक्रम प्रमाणपत्र से लेकर पीएचडी तक हैं। इन्हें करने के बाद आप योग को बतौर करिअर अपना सकते है।

भारत में दसवीं या बारहवीं के बाद भी योग से जुड़े कई प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इसके अलावा योग में डिप्लोमा, बीएड और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी किए जा सकते हैं। एक अच्छे योग प्रशिक्षक को पोषण, फिटनेस, वजन प्रबंधन, तनाव प्रबंधन आदि जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देना होता है। योग प्रशिक्षक बनने के लिए योग की विधियों का ज्ञान होना बहुत आवश्यक है। योग प्रशिक्षक बनने से पहले जरूरी है कि आपको योग की पूरी समझ और जानकारी हो। योग में आसनों को बिल्कुल सही तरीके से करना आवश्यक होता है।

योग से संबंधित पाठ्यक्रम करने के बाद योग प्रशिक्षक बनने के इच्छुक लोगों को चाहिए कि वह कुछ साल योग का गहनता के साथ अभ्यास करें। योग की जानकारी के साथ योग करने की गुणवत्ता भी महत्त्वपूर्ण होती है। आप योग का पाठ्यक्रम करने के बाद किसी स्कूल या कालेज में योग शिक्षक के पद पर नियुक्त हो सकते हैं। देश में कई ऐसे योग शिक्षण संस्थान हैं, जहां योग शिक्षकों के लिए भरपूर जगह है।

इतना ही नहीं योग शिक्षक अपना खुद का काम भी शुरू कर सकते हैं। प्रशिक्षण केंद्र खोलकर एक अच्छा प्रशिक्षक आराम से 20-30 हजार रुपए महीना कमा सकता है। वहीं, अगर प्रशिक्षक किसी के घर पर जाकर योग सिखाता है तो वहां का शुल्क और ज्यादा होता है। जबकि खास बामीर से जूझ रहे मरीजों को योग सिखाने पर प्रति महीने करीब 50-60 हजार रुपए कमाए जा सकते हैं। अनुभव के साथ प्रशिक्षक की कमाई भी बढ़ती जाती है। कई बार यह कमाई एक से दो लाख रुपए महीने भी हो सकती है।

प्रस्तुति : सुशील राघव

CGBSE Result 2022: कक्षा 10वीं और 12वीं परीक्षा का रिजल्ट जल्द, छात्र ऐसे करें डाउनलोड

CGBSE Result 2022: छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CGBSE), रायपुर द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं परीक्षा का रिजल्ट जल्द ही जारी किया जाएगा। जिसके बाद सभी छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in के माध्यम से अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे।

CGBSE 10th, 12th Exam 2022: मार्च में हुई थी परीक्षा
छत्तीसगढ़ बोर्ड द्वारा कक्षा 10वीं की परीक्षा 3 मार्च से 23 मार्च 2022 तक सुबह 9:15 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित की गई थी। जबकि, कक्षा 12वीं की परीक्षा 2 मार्च से 30 मार्च 2022 तक हुई थी। इन परीक्षाओं के दौरान कोविड-19 नियमों का कड़ाई से पालन किया गया थी। सभी छात्र बोर्ड की वेबसाइट पर इन स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे।

How to check CGBSE Chhattisgarh Board 10th, 12th Result 2022

स्टेप 1: सबसे पहले छात्र छत्तीसगढ़ बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in पर जाएं।

स्टेप 2: फिर होम पेज पर दिख रहे ‘Chhattisgarh Board 10th / 12th Result 2022’ के लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 3: अब आपके सामने एक नया पेज खुल जाएगा। यहां सभी आवश्यक जानकारी भरें और सबमिट बटन पर क्लिक कर दें।

स्टेप 4: अब आप CGBSE 10th, 12th Result 2022 चेक करके डाउनलोड भी कर सकते हैं।

CGBSE Result 2022: मई में जारी हो सकता है रिजल्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की चेकिंग का काम तेजी से चल रहा है। ऐसे में इन परीक्षाओं का रिजल्ट मई के दूसरे या तीसरे सप्ताह में जारी किया जा सकता है। हालांकि, बोर्ड की तरफ से रिजल्ट की तारीख के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। छत्तीसगढ़ 10वीं और 12वीं रिजल्ट से जुड़े लेटेस्ट अपडेट्स के लिए छात्र यहां और आधिकारिक वेबसाइट पर चेक करते रहें।



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CGBSE Result 2022: छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CGBSE), रायपुर द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं परीक्षा का रिजल्ट जल्द ही जारी किया जाएगा। जिसके बाद सभी छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in के माध्यम से अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे।

CGBSE 10th, 12th Exam 2022: मार्च में हुई थी परीक्षा
छत्तीसगढ़ बोर्ड द्वारा कक्षा 10वीं की परीक्षा 3 मार्च से 23 मार्च 2022 तक सुबह 9:15 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित की गई थी। जबकि, कक्षा 12वीं की परीक्षा 2 मार्च से 30 मार्च 2022 तक हुई थी। इन परीक्षाओं के दौरान कोविड-19 नियमों का कड़ाई से पालन किया गया थी। सभी छात्र बोर्ड की वेबसाइट पर इन स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे।

How to check CGBSE Chhattisgarh Board 10th, 12th Result 2022

स्टेप 1: सबसे पहले छात्र छत्तीसगढ़ बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in पर जाएं।

स्टेप 2: फिर होम पेज पर दिख रहे ‘Chhattisgarh Board 10th / 12th Result 2022’ के लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 3: अब आपके सामने एक नया पेज खुल जाएगा। यहां सभी आवश्यक जानकारी भरें और सबमिट बटन पर क्लिक कर दें।

स्टेप 4: अब आप CGBSE 10th, 12th Result 2022 चेक करके डाउनलोड भी कर सकते हैं।

CGBSE Result 2022: मई में जारी हो सकता है रिजल्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की चेकिंग का काम तेजी से चल रहा है। ऐसे में इन परीक्षाओं का रिजल्ट मई के दूसरे या तीसरे सप्ताह में जारी किया जा सकता है। हालांकि, बोर्ड की तरफ से रिजल्ट की तारीख के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। छत्तीसगढ़ 10वीं और 12वीं रिजल्ट से जुड़े लेटेस्ट अपडेट्स के लिए छात्र यहां और आधिकारिक वेबसाइट पर चेक करते रहें।

UPSC New Chairman: मनोज सोनी ने संघर्षों के बीच गुजारा बचपन, ऐसा रहा कुलपति से लेकर UPSC चेयरमैन बनने तक का सफर

मनोज सोनी को संघ लोक सेवा आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बचपन में अगरबत्ती बेचने से लेकर सबसे कम उम्र में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने की उनकी यह कहानी काफी प्रेरणादायक है। यहां हम आपको उनके अब तक के सफर के बारे में बताएंगे।

Manoj Soni Early Life: संघर्षों में गुजरा बचपन
मनोज का जन्म 17 फरवरी 1965 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता फुटपाथ मार्केट में कपड़े बेचा करते थे। जब मनोज कक्षा 5वीं में थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद परिवार के पालन पोषण के लिए उन्होंने अगरबत्ती बेचना शुरू कर दिया था। फिर कुछ साल बाद वह‌ अपनी मां के साथ गुजरात चले आए थे। यहां मनोज ने कक्षा 12वीं की साइंस परीक्षा में फेल होने के बाद राज रत्न पीटी पटेल कॉलेज में आर्ट्स विषय को चुन लिया था।

UPSC New Chairman: दो विश्वविद्यालयों के बनें कुलपति
मनोज के पिता मुंबई में एक मिशन से जुड़े हुए थे। उनके देहांत के बाद मनोज भी इस मिशन से जुड़ गए थे और यहां उन्हें पढ़ाई लिखाई में काफी सहायता मिली। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मनोज ने एसपी विश्वविद्यालय में पढ़ाना शुरू कर दिया था। इसके बाद साल 1991 से 2016 तक उन्होंने सरदार पटेल यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस विषय भी पढ़ाया। इस दौरान उन्होंने साल 2005 से 2008 तक एमएसयू वडोदरा में और फिर साल 2009 से 2015 तक डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी में कुलपति का कार्यभार भी संभाला।

Manoj Soni Education: इन‌ विषयों में है रुचि
मनोज को अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अलावा राजनीति विज्ञान में काफी रुचि है। सोनी ने साल 1995 में डॉक्टर की पढ़ाई पूरी की और फिर ‘पोस्ट कोल्ड वॉर इंटरनेशनल सिस्टमैटिक ट्रांजिशन एंड इंडो-यूएस रिलेशन्स’ पर रिसर्च किया। इसके अलावा उन्होंने ‘अंडरस्टैंडिंग तक ग्लोबल पॉलीटिकल अर्थक्वेक’ नामक एक किताब भी लिखी है।

UPSC New Chairman: राहुल गांधी ने क्यों कसा तंज
जहां ‘द वायर’ ने मनोज सोनी को बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के निकट बताया। वहीं, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी उनकी नियुक्ति पर तंज कसते हुए यूपीएससी को यूनियन प्रचार संघ कमीशन कहा। उनके इस ट्वीट पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।



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मनोज सोनी को संघ लोक सेवा आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बचपन में अगरबत्ती बेचने से लेकर सबसे कम उम्र में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने की उनकी यह कहानी काफी प्रेरणादायक है। यहां हम आपको उनके अब तक के सफर के बारे में बताएंगे।

Manoj Soni Early Life: संघर्षों में गुजरा बचपन
मनोज का जन्म 17 फरवरी 1965 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता फुटपाथ मार्केट में कपड़े बेचा करते थे। जब मनोज कक्षा 5वीं में थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद परिवार के पालन पोषण के लिए उन्होंने अगरबत्ती बेचना शुरू कर दिया था। फिर कुछ साल बाद वह‌ अपनी मां के साथ गुजरात चले आए थे। यहां मनोज ने कक्षा 12वीं की साइंस परीक्षा में फेल होने के बाद राज रत्न पीटी पटेल कॉलेज में आर्ट्स विषय को चुन लिया था।

UPSC New Chairman: दो विश्वविद्यालयों के बनें कुलपति
मनोज के पिता मुंबई में एक मिशन से जुड़े हुए थे। उनके देहांत के बाद मनोज भी इस मिशन से जुड़ गए थे और यहां उन्हें पढ़ाई लिखाई में काफी सहायता मिली। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मनोज ने एसपी विश्वविद्यालय में पढ़ाना शुरू कर दिया था। इसके बाद साल 1991 से 2016 तक उन्होंने सरदार पटेल यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस विषय भी पढ़ाया। इस दौरान उन्होंने साल 2005 से 2008 तक एमएसयू वडोदरा में और फिर साल 2009 से 2015 तक डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी में कुलपति का कार्यभार भी संभाला।

Manoj Soni Education: इन‌ विषयों में है रुचि
मनोज को अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अलावा राजनीति विज्ञान में काफी रुचि है। सोनी ने साल 1995 में डॉक्टर की पढ़ाई पूरी की और फिर ‘पोस्ट कोल्ड वॉर इंटरनेशनल सिस्टमैटिक ट्रांजिशन एंड इंडो-यूएस रिलेशन्स’ पर रिसर्च किया। इसके अलावा उन्होंने ‘अंडरस्टैंडिंग तक ग्लोबल पॉलीटिकल अर्थक्वेक’ नामक एक किताब भी लिखी है।

UPSC New Chairman: राहुल गांधी ने क्यों कसा तंज
जहां ‘द वायर’ ने मनोज सोनी को बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के निकट बताया। वहीं, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी उनकी नियुक्ति पर तंज कसते हुए यूपीएससी को यूनियन प्रचार संघ कमीशन कहा। उनके इस ट्वीट पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

UPSC New Chairman: मनोज सोनी ने संघर्षों के बीच गुजारा बचपन, ऐसा रहा कुलपति से लेकर UPSC चेयरमैन बनने तक का सफर

मनोज सोनी को संघ लोक सेवा आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बचपन में अगरबत्ती बेचने से लेकर सबसे कम उम्र में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने की उनकी यह कहानी काफी प्रेरणादायक है। यहां हम आपको उनके अब तक के सफर के बारे में बताएंगे।

Manoj Soni Early Life: संघर्षों में गुजरा बचपन
मनोज का जन्म 17 फरवरी 1965 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता फुटपाथ मार्केट में कपड़े बेचा करते थे। जब मनोज कक्षा 5वीं में थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद परिवार के पालन पोषण के लिए उन्होंने अगरबत्ती बेचना शुरू कर दिया था। फिर कुछ साल बाद वह‌ अपनी मां के साथ गुजरात चले आए थे। यहां मनोज ने कक्षा 12वीं की साइंस परीक्षा में फेल होने के बाद राज रत्न पीटी पटेल कॉलेज में आर्ट्स विषय को चुन लिया था।

UPSC New Chairman: दो विश्वविद्यालयों के बनें कुलपति
मनोज के पिता मुंबई में एक मिशन से जुड़े हुए थे। उनके देहांत के बाद मनोज भी इस मिशन से जुड़ गए थे और यहां उन्हें पढ़ाई लिखाई में काफी सहायता मिली। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मनोज ने एसपी विश्वविद्यालय में पढ़ाना शुरू कर दिया था। इसके बाद साल 1991 से 2016 तक उन्होंने सरदार पटेल यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस विषय भी पढ़ाया। इस दौरान उन्होंने साल 2005 से 2008 तक एमएसयू वडोदरा में और फिर साल 2009 से 2015 तक डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी में कुलपति का कार्यभार भी संभाला।

Manoj Soni Education: इन‌ विषयों में है रुचि
मनोज को अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अलावा राजनीति विज्ञान में काफी रुचि है। सोनी ने साल 1995 में डॉक्टर की पढ़ाई पूरी की और फिर ‘पोस्ट कोल्ड वॉर इंटरनेशनल सिस्टमैटिक ट्रांजिशन एंड इंडो-यूएस रिलेशन्स’ पर रिसर्च किया। इसके अलावा उन्होंने ‘अंडरस्टैंडिंग तक ग्लोबल पॉलीटिकल अर्थक्वेक’ नामक एक किताब भी लिखी है।

UPSC New Chairman: राहुल गांधी ने क्यों कसा तंज
जहां ‘द वायर’ ने मनोज सोनी को बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के निकट बताया। वहीं, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी उनकी नियुक्ति पर तंज कसते हुए यूपीएससी को यूनियन प्रचार संघ कमीशन कहा। उनके इस ट्वीट पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।



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मनोज सोनी को संघ लोक सेवा आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बचपन में अगरबत्ती बेचने से लेकर सबसे कम उम्र में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने की उनकी यह कहानी काफी प्रेरणादायक है। यहां हम आपको उनके अब तक के सफर के बारे में बताएंगे।

Manoj Soni Early Life: संघर्षों में गुजरा बचपन
मनोज का जन्म 17 फरवरी 1965 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता फुटपाथ मार्केट में कपड़े बेचा करते थे। जब मनोज कक्षा 5वीं में थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद परिवार के पालन पोषण के लिए उन्होंने अगरबत्ती बेचना शुरू कर दिया था। फिर कुछ साल बाद वह‌ अपनी मां के साथ गुजरात चले आए थे। यहां मनोज ने कक्षा 12वीं की साइंस परीक्षा में फेल होने के बाद राज रत्न पीटी पटेल कॉलेज में आर्ट्स विषय को चुन लिया था।

UPSC New Chairman: दो विश्वविद्यालयों के बनें कुलपति
मनोज के पिता मुंबई में एक मिशन से जुड़े हुए थे। उनके देहांत के बाद मनोज भी इस मिशन से जुड़ गए थे और यहां उन्हें पढ़ाई लिखाई में काफी सहायता मिली। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मनोज ने एसपी विश्वविद्यालय में पढ़ाना शुरू कर दिया था। इसके बाद साल 1991 से 2016 तक उन्होंने सरदार पटेल यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस विषय भी पढ़ाया। इस दौरान उन्होंने साल 2005 से 2008 तक एमएसयू वडोदरा में और फिर साल 2009 से 2015 तक डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी में कुलपति का कार्यभार भी संभाला।

Manoj Soni Education: इन‌ विषयों में है रुचि
मनोज को अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अलावा राजनीति विज्ञान में काफी रुचि है। सोनी ने साल 1995 में डॉक्टर की पढ़ाई पूरी की और फिर ‘पोस्ट कोल्ड वॉर इंटरनेशनल सिस्टमैटिक ट्रांजिशन एंड इंडो-यूएस रिलेशन्स’ पर रिसर्च किया। इसके अलावा उन्होंने ‘अंडरस्टैंडिंग तक ग्लोबल पॉलीटिकल अर्थक्वेक’ नामक एक किताब भी लिखी है।

UPSC New Chairman: राहुल गांधी ने क्यों कसा तंज
जहां ‘द वायर’ ने मनोज सोनी को बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के निकट बताया। वहीं, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी उनकी नियुक्ति पर तंज कसते हुए यूपीएससी को यूनियन प्रचार संघ कमीशन कहा। उनके इस ट्वीट पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

UGC Dual Degree: डुअल डिग्री प्रोग्राम को लेकर यूजीसी ने जारी की गाइडलाइंस, जानें सभी डिटेल्स

UGC Dual Degree Programmes: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) ने डुअल डिग्री और ज्वॉइंट डिग्री प्रोग्राम को लेकर गाइडलाइंस जारी कर दी है। यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने इससे जुड़ी कंफ्यूजन को दूर करते हुए कहा कि भारतीय और विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान जल्द ही ज्वॉइंट डिग्री और डुअल डिग्री प्रोग्राम की पेशकश कर सकते हैं। यूजीसी ने इन कार्यक्रमों के लिए नियमों को मंजूरी दे दी है।

मंगलवार को उच्च शिक्षा नियामक की बैठक में यह फैसला लिया गया। इक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुमार ने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत छात्र विदेशी संस्थानों से 30 प्रतिशत से अधिक ‘क्रेडिट’ प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इन नियमों के तहत किसी विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान और भारतीय उच्च शिक्षण संस्थान के बीच किसी भी प्रकार की ‘फ्रेंचाइजी’ व्यवस्था या अध्ययन केंद्र की अनुमति नहीं दी जाएगी।

यूजीसी की गाइडलाइंस के अनुसार, डुअल डिग्री एक सहयोगात्मक व्यवस्था होगी जिसके तहत भारतीय उच्च शिक्षण संस्थान में नामांकित छात्र यूजीसी नियमों का पालन करते हुए विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान में अध्ययन कर सकते हैं। इस तरह के डुअल डिग्री कार्यक्रमों के तहत दी जाने वाली डिग्री भारतीय संस्थान द्वारा प्रदान की जाएगी।

छात्रों को मिलेगी एक डिग्री
उन्होंने कहा कि ज्वॉइंट डिग्री प्रोग्राम के लिए पाठ्यक्रम भारतीय और विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया जाएगा और कार्यक्रम के पूरा होने पर दोनों संस्थानों द्वारा एक ही प्रमाणपत्र के साथ डिग्री प्रदान की जाएगी। कुमार ने कहा कि इसके तहत प्रदान की गई डिग्री भारतीय उच्च शिक्षण संस्थान द्वारा प्रदान की जाने वाली किसी भी संबंधित डिग्री के बराबर होगी।

बढ़ेगी छात्रों की संख्या
कुमार ने कहा, ”यह प्रयास हमारी उच्च शिक्षा को अंतरराष्ट्रीयकरण की ओर ले जाएगा। यह हमारे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक पाठ्यक्रम के माध्यम से बहु-विषयक शिक्षा प्राप्त करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करेगा। इससे उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कुमार के मुताबिक, कम से कम चार करोड़ विदेशी छात्र भारत में पढ़ते हैं और यह संख्या बढ़कर 10 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है।



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UGC Dual Degree Programmes: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) ने डुअल डिग्री और ज्वॉइंट डिग्री प्रोग्राम को लेकर गाइडलाइंस जारी कर दी है। यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने इससे जुड़ी कंफ्यूजन को दूर करते हुए कहा कि भारतीय और विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान जल्द ही ज्वॉइंट डिग्री और डुअल डिग्री प्रोग्राम की पेशकश कर सकते हैं। यूजीसी ने इन कार्यक्रमों के लिए नियमों को मंजूरी दे दी है।

मंगलवार को उच्च शिक्षा नियामक की बैठक में यह फैसला लिया गया। इक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुमार ने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत छात्र विदेशी संस्थानों से 30 प्रतिशत से अधिक ‘क्रेडिट’ प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इन नियमों के तहत किसी विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान और भारतीय उच्च शिक्षण संस्थान के बीच किसी भी प्रकार की ‘फ्रेंचाइजी’ व्यवस्था या अध्ययन केंद्र की अनुमति नहीं दी जाएगी।

यूजीसी की गाइडलाइंस के अनुसार, डुअल डिग्री एक सहयोगात्मक व्यवस्था होगी जिसके तहत भारतीय उच्च शिक्षण संस्थान में नामांकित छात्र यूजीसी नियमों का पालन करते हुए विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान में अध्ययन कर सकते हैं। इस तरह के डुअल डिग्री कार्यक्रमों के तहत दी जाने वाली डिग्री भारतीय संस्थान द्वारा प्रदान की जाएगी।

छात्रों को मिलेगी एक डिग्री
उन्होंने कहा कि ज्वॉइंट डिग्री प्रोग्राम के लिए पाठ्यक्रम भारतीय और विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया जाएगा और कार्यक्रम के पूरा होने पर दोनों संस्थानों द्वारा एक ही प्रमाणपत्र के साथ डिग्री प्रदान की जाएगी। कुमार ने कहा कि इसके तहत प्रदान की गई डिग्री भारतीय उच्च शिक्षण संस्थान द्वारा प्रदान की जाने वाली किसी भी संबंधित डिग्री के बराबर होगी।

बढ़ेगी छात्रों की संख्या
कुमार ने कहा, ”यह प्रयास हमारी उच्च शिक्षा को अंतरराष्ट्रीयकरण की ओर ले जाएगा। यह हमारे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक पाठ्यक्रम के माध्यम से बहु-विषयक शिक्षा प्राप्त करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करेगा। इससे उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कुमार के मुताबिक, कम से कम चार करोड़ विदेशी छात्र भारत में पढ़ते हैं और यह संख्या बढ़कर 10 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है।

Maharashtra Open School Result 2022: महाराष्ट्र बोर्ड ओपन स्कूल का रिजल्ट जारी, msos.ac.in पर करें चेक

Maharashtra Open School Result 2022: महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ ओपन स्कूलिंग(MSBOS) ने ओपन स्कूल का रिजल्ट घोषित कर दिया गया है। रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट msos.ac.in पर जारी किया गया है। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट के जरिए परीक्षा परिणाम चेक कर सकते हैं।

कक्षा 5वीं और 8वीं महाराष्ट्र ओपन स्कूल परीक्षा 2022 का आयोजन 30 दिसंबर 2021 से 8 जनवरी 2022 के बीच किया गया था। परीक्षा महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, पुणे, औरंगाबाद, कोल्हापुर के सभी छह डिवीजनों में आयोजित की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महाराष्ट्र 5वीं और 8वीं ओपन स्कूल के छात्र आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अपने स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते है।

Maharashtra Open School Result 2022 How to Check: ऐसे चेक करें रिजल्ट
1.सबसे पहले छात्र आधिकारिक वेबसाइट
2.महाराष्ट्र ओपन स्कूल रिजल्ट कैसे चेक करें http://www.msos.ac.in पर जाएं।
3.होम पेज पर दिए गए रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें।
3.यहां मांगी गई जानकारी को दर्ज कर सबमिट करें।
4.रिजल्ट आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा।
5.अब चेक करें डाउनलोड करें।



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Maharashtra Open School Result 2022: महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ ओपन स्कूलिंग(MSBOS) ने ओपन स्कूल का रिजल्ट घोषित कर दिया गया है। रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट msos.ac.in पर जारी किया गया है। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट के जरिए परीक्षा परिणाम चेक कर सकते हैं।

कक्षा 5वीं और 8वीं महाराष्ट्र ओपन स्कूल परीक्षा 2022 का आयोजन 30 दिसंबर 2021 से 8 जनवरी 2022 के बीच किया गया था। परीक्षा महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, पुणे, औरंगाबाद, कोल्हापुर के सभी छह डिवीजनों में आयोजित की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महाराष्ट्र 5वीं और 8वीं ओपन स्कूल के छात्र आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अपने स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते है।

Maharashtra Open School Result 2022 How to Check: ऐसे चेक करें रिजल्ट
1.सबसे पहले छात्र आधिकारिक वेबसाइट
2.महाराष्ट्र ओपन स्कूल रिजल्ट कैसे चेक करें http://www.msos.ac.in पर जाएं।
3.होम पेज पर दिए गए रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें।
3.यहां मांगी गई जानकारी को दर्ज कर सबमिट करें।
4.रिजल्ट आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा।
5.अब चेक करें डाउनलोड करें।