Wednesday, February 23, 2022

दसवीं, बारहवीं के दूसरे सत्र की परीक्षा 26 अप्रैल से

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) दसवीं और बारहवीं की दूसरे सत्र (सेकेंड टर्म) की बोर्ड परीक्षाएं 26 अप्रैल से आफलाइन आयोजित करेगा। बोर्ड ने विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा के बाद और देश में कोरोना की स्थिति को ध्यान में रखते हुए दूसरे सत्र की बोर्ड परीक्षा केवल आफलाइन आयोजित करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि लिखित परीक्षाएं 26 अप्रैल, 2022 से शुरू होंगी। कक्षा दसवीं और बारहवीं का विस्तृत परीक्षा कार्यक्रम जल्द ही जारी किया जाएगा। कोरोना महामारी के चलते वर्तमान शैक्षणिक सत्र की परीक्षा का दो बार में कराने का निर्णय किया था। पहले सत्र की परीक्षाएं भी आफलाइन आयोजित हुई थीं।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आइआइटी दिल्ली ने शुरू की वेबसाइट

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों की सहायता के लिए एक वेबसाइट शुरू की है। इस वेबसाइट में माध्यम से इंजीनियरिंग, मेडिकल आदि परीक्षाओं की तैयारी में लगे विद्यार्थी अपने सवाल भी आइआइटी के शिक्षकों से पूछ सकते हैं। इस वेबसाइट के माध्यम से कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों की सहायता की जाएगी। वेबसाइट ‘डब्लूडब्लूडब्लू डाट आइआइटीपीएएल डाट आइआइटीडी डाट आइएन’ के माध्यम से विद्यार्थी भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित से संबंधित सवाल पूछ सकते हैं। यह केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और आइआइटी दिल्ली की पहल है। यह वेबसाइट ऐसे विद्यार्थियों की मदद के लिए विशेष रूप से विकसित की गई है जिनकी कोचिंग या अच्छे शिक्षकों तक पहुंच नहीं होती है।

इस साल दो चरणों में आयोजित होगी संयुक्त प्रवेश परीक्षा!

राष्ट्रीय परीक्षा एजंसी (एनटीए) 2022 के लिए इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के लिए आयोजित होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) मुख्य का आयोजन दो चरणों कर सकता है। ये चरण अप्रैल और मई के दौरान आयोजित किए जाएंगे। पिछले साल कोरोना महामारी के चलते बाधित हुई शैक्षणिक गतिविधियों और विद्यार्थियों की गैर-परंपरागत तैयारियों के मद्देनजर जेईई मुख्य परीक्षा का आयोजन चार चरणों में किया गया था, जिसकी शुरुआत फरवरी हुई थी। एनटीए ने विद्यार्थियों को सभी चरणों में सम्मिलित होने का विकल्प दिया गया था और इनमें से बेहतर स्कोर और रैंक को ही अंतिम माना गया था। हालांकि, इस वर्ष परिस्थितियां अलग होने के कारण एनटीए इस परीक्षा का आयोजन दो चरणों में ही कराने के बारे में सोच रहा है।

कोरोना से माता-पिता को खो चुके बच्चों को इलाहाबाद विश्वविद्यालय देगा मुफ्त शिक्षा

इलाहाबाद विश्वविद्यालय उन विद्यार्थियों को एक बड़ी राहत देने जा रहा है जिन्होंने कोरोना महामारी में अपने माता-पिता को खो दिया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने घोषणा की है कि वह उन विद्यार्थियों से कोई शैक्षणिक शुल्क नहीं लेगा जिन्होंने कोविड में अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है। साथ ही विश्वविद्यालय शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए छात्रावास शुल्क का 50 फीसद माफ भी करेगा। कुल शैक्षणिक शुल्क और 50 फीसद शैक्षणिक शुल्क माफ करने का निर्णय कोविड की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। बता दें कि यह रियायत विश्वविद्यालय और उससे संबंधित कालेजों के सभी विद्यार्थियों पर लागू होगी। हालांकि एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह प्रावधान उन विद्यार्थियों के लिए लागू नहीं होगा, जिन्होंने सिर्फ माता या पिता को खो दिया है।

इग्नू में स्पेनिश, फ्रेंच का आनलाइन पाठ्यक्रम शुरू

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने दो विदेशी भाषाओं में आनलाइन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। ये पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के विदेशी भाषा स्कूल द्वारा शुरू किए गए हैं। जो भी उम्मीदवार इन पाठ्यक्रमों में दाखिला लेना चाहते हैं, वे उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इन पाठ्यक्रमों की अवधि छह महीने की होगी। वहीं, इस पाठ्यक्रम का शुल्क 4,500 रुपए होगा।

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) दसवीं और बारहवीं की दूसरे सत्र (सेकेंड टर्म) की बोर्ड परीक्षाएं 26 अप्रैल से आफलाइन आयोजित करेगा। बोर्ड ने विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा के बाद और देश में कोरोना की स्थिति को ध्यान में रखते हुए दूसरे सत्र की बोर्ड परीक्षा केवल आफलाइन आयोजित करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि लिखित परीक्षाएं 26 अप्रैल, 2022 से शुरू होंगी। कक्षा दसवीं और बारहवीं का विस्तृत परीक्षा कार्यक्रम जल्द ही जारी किया जाएगा। कोरोना महामारी के चलते वर्तमान शैक्षणिक सत्र की परीक्षा का दो बार में कराने का निर्णय किया था। पहले सत्र की परीक्षाएं भी आफलाइन आयोजित हुई थीं।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आइआइटी दिल्ली ने शुरू की वेबसाइट

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों की सहायता के लिए एक वेबसाइट शुरू की है। इस वेबसाइट में माध्यम से इंजीनियरिंग, मेडिकल आदि परीक्षाओं की तैयारी में लगे विद्यार्थी अपने सवाल भी आइआइटी के शिक्षकों से पूछ सकते हैं। इस वेबसाइट के माध्यम से कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों की सहायता की जाएगी। वेबसाइट ‘डब्लूडब्लूडब्लू डाट आइआइटीपीएएल डाट आइआइटीडी डाट आइएन’ के माध्यम से विद्यार्थी भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित से संबंधित सवाल पूछ सकते हैं। यह केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और आइआइटी दिल्ली की पहल है। यह वेबसाइट ऐसे विद्यार्थियों की मदद के लिए विशेष रूप से विकसित की गई है जिनकी कोचिंग या अच्छे शिक्षकों तक पहुंच नहीं होती है।

इस साल दो चरणों में आयोजित होगी संयुक्त प्रवेश परीक्षा!

राष्ट्रीय परीक्षा एजंसी (एनटीए) 2022 के लिए इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के लिए आयोजित होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) मुख्य का आयोजन दो चरणों कर सकता है। ये चरण अप्रैल और मई के दौरान आयोजित किए जाएंगे। पिछले साल कोरोना महामारी के चलते बाधित हुई शैक्षणिक गतिविधियों और विद्यार्थियों की गैर-परंपरागत तैयारियों के मद्देनजर जेईई मुख्य परीक्षा का आयोजन चार चरणों में किया गया था, जिसकी शुरुआत फरवरी हुई थी। एनटीए ने विद्यार्थियों को सभी चरणों में सम्मिलित होने का विकल्प दिया गया था और इनमें से बेहतर स्कोर और रैंक को ही अंतिम माना गया था। हालांकि, इस वर्ष परिस्थितियां अलग होने के कारण एनटीए इस परीक्षा का आयोजन दो चरणों में ही कराने के बारे में सोच रहा है।

कोरोना से माता-पिता को खो चुके बच्चों को इलाहाबाद विश्वविद्यालय देगा मुफ्त शिक्षा

इलाहाबाद विश्वविद्यालय उन विद्यार्थियों को एक बड़ी राहत देने जा रहा है जिन्होंने कोरोना महामारी में अपने माता-पिता को खो दिया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने घोषणा की है कि वह उन विद्यार्थियों से कोई शैक्षणिक शुल्क नहीं लेगा जिन्होंने कोविड में अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है। साथ ही विश्वविद्यालय शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए छात्रावास शुल्क का 50 फीसद माफ भी करेगा। कुल शैक्षणिक शुल्क और 50 फीसद शैक्षणिक शुल्क माफ करने का निर्णय कोविड की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। बता दें कि यह रियायत विश्वविद्यालय और उससे संबंधित कालेजों के सभी विद्यार्थियों पर लागू होगी। हालांकि एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह प्रावधान उन विद्यार्थियों के लिए लागू नहीं होगा, जिन्होंने सिर्फ माता या पिता को खो दिया है।

इग्नू में स्पेनिश, फ्रेंच का आनलाइन पाठ्यक्रम शुरू

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने दो विदेशी भाषाओं में आनलाइन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। ये पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के विदेशी भाषा स्कूल द्वारा शुरू किए गए हैं। जो भी उम्मीदवार इन पाठ्यक्रमों में दाखिला लेना चाहते हैं, वे उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इन पाठ्यक्रमों की अवधि छह महीने की होगी। वहीं, इस पाठ्यक्रम का शुल्क 4,500 रुपए होगा।

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‘जलो नहीं, रीस करो’

ट्रकों पर आपने अकसर ‘जलो नहीं, रीस करो’ पंक्ति लिखी देखी होगी। यह महज एक पंक्ति नहीं है बल्कि सफल लोग की सोच है। किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने वाले लोगों में जो गुण होते हैं, ये उनमें से एक है। अपने दोस्तों, रिश्तेदारों, सहकर्मियों आदि की सफलता से जलने या ईर्ष्या करने वाले लोग कभी सफल नहीं होते हैं और उन्हें जिंदगी भर संघर्ष ही करते रहना पड़ता है।

ईर्ष्या के स्थान पर यदि आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या सहकर्मी से प्रतिस्पर्धा करेंगे तो परिणाम एकदम अलग होंगे। किसी सफल व्यक्ति को देखकर उत्साहित होना चाहिए और उसके कुछ गुणों को भी अपनाया जा सकता है। इससे आपके अंदर दोगुना काम करने की इच्छा पैदा होगी। ऐसा करने से आपके अंदर सकारात्मकता का संचार होगा जो आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सहायता करेगी।

इसके अलावा सफल व्यक्ति बहुत जुझारू होते हैं। वे आसानी से हार नहीं मानते हैं। कुछ लोग एक-दो बार विफल होने पर अपनी राह बदल लेते हैं। लेकिन सफल लोग लगातार कोशिश करते रहते हैं। विफल होने पर वे विफलता का कारण ढंूढ़ते हैं और उसका समाधान करने के बाद अगली कोशिश में जुट जाते हैं और सफलता प्राप्त करने तक रूकते नहीं हैं।

सफलता हासिल करने वाले लोग कभी अपने ऊपर किसी भी तरह का डर हावी नहीं होने देते हैं। ये लोग अपने डर के बारे में जानते तो हैं लेकिन उसे कभी अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने देते हैं। सफलता प्राप्त कर करने वाले लोग डर की तरह ही नकारात्मकता को भी अपने जीवन पर हावी नहीं होने देते हैं। ये लोग खुद तो सकारात्मक रहते ही हैं, अपने आसपास के लोगों को भी सकारात्मक रखते हैं।

सफल लोगों में एक और आवश्यक योग्यता होती है। ये लोग हर किसी को खुश और संतुष्ट करने के चक्कर में नहीं पड़ते हैं। यदि ये ऐसा करने में जुट जाएंगे तो इनका अपने लक्ष्य से भटकना तय है। ऐसे में ये बीच का रास्ता अपनाते हैं और कोशिश करते हैं कम से कम लोगों को नाराज करके अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहते हैं।

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इसके अलावा सफल व्यक्ति बहुत जुझारू होते हैं। वे आसानी से हार नहीं मानते हैं। कुछ लोग एक-दो बार विफल होने पर अपनी राह बदल लेते हैं। लेकिन सफल लोग लगातार कोशिश करते रहते हैं। विफल होने पर वे विफलता का कारण ढंूढ़ते हैं और उसका समाधान करने के बाद अगली कोशिश में जुट जाते हैं और सफलता प्राप्त करने तक रूकते नहीं हैं।

सफलता हासिल करने वाले लोग कभी अपने ऊपर किसी भी तरह का डर हावी नहीं होने देते हैं। ये लोग अपने डर के बारे में जानते तो हैं लेकिन उसे कभी अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने देते हैं। सफलता प्राप्त कर करने वाले लोग डर की तरह ही नकारात्मकता को भी अपने जीवन पर हावी नहीं होने देते हैं। ये लोग खुद तो सकारात्मक रहते ही हैं, अपने आसपास के लोगों को भी सकारात्मक रखते हैं।

सफल लोगों में एक और आवश्यक योग्यता होती है। ये लोग हर किसी को खुश और संतुष्ट करने के चक्कर में नहीं पड़ते हैं। यदि ये ऐसा करने में जुट जाएंगे तो इनका अपने लक्ष्य से भटकना तय है। ऐसे में ये बीच का रास्ता अपनाते हैं और कोशिश करते हैं कम से कम लोगों को नाराज करके अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहते हैं।

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अंग्रेजी भाषा में अनेक विकल्प

यदि आपने अंग्रेजी विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की है या लेने की सोच रहे हैं तो यह विषय आपके करिअर में बहुत सारे विकल्प प्रदान करता है। कुछ विद्यार्थियों को इस विषय के बारे में अनेक भ्रांतियां हैं जैसे कि इस विषय के सहारे केवल अकादमिक करिअर ही बनाया जा सकता है किंतु आपने अंग्रेजी भाषा में डिग्री प्राप्त की है तो आप किसी भी उद्योग में आसानी से कदम रख सकते हैं। अंग्रेजी में डिग्री हासिल करने के बाद करिअर के ढेर सारे विकल्प खुल जाते हैं जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं :

पत्रकारिता और जनसंचार

इस विषय में डिग्री प्राप्त कर आप आसानी से अपना करिअर पत्रकारिता में बना सकते हैं। मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है जिसके कारण लोगों में इसके प्रति दिलचस्पी रहती है। अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने बहुत सारे कार्यों को पढ़ा व उनका विश्लेषण किया हुआ होता है। ऐसा करने से न केवल उनकी समझ का स्तर बढ़ता है बल्कि विद्यार्थियों में रचनात्मक पहलू का भी विकास होता है। ऐसे विद्यार्थी परिस्थितियों का सही प्रकार से मूल्यांकन करते हुए विश्लेषण करते हैं जिससे उनकी कार्य क्षमता का विस्तार होता है। मीडिया करिअर में ब्लागिंग, संवाद व पाठ्य कथा लेखन और अन्य कई कार्य शामिल होते हैं।

प्रकाशन कार्य

अंग्रेजी में डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है कि वह लेखन के कार्य के उस स्वभाव को न जाने दे जो कि उसने साहित्यिक अध्ययन से प्राप्त किया है। विद्यार्थियों द्वारा इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न उपन्यासों के बारे में कठिन लेख लिखने के बाद, स्वाभाविक रूप से लिखने की कला विकसित हो जाती है। प्रकाशन उन लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है जो अपने विचारों को अपनी कलम से प्रस्तुत कर सकते हैं और शब्दों के इर्द-गिर्द अपना रास्ता बना सकते हैं। आप पत्रिकाओं, समाचार पत्रों, पत्रकारों और स्तंभ के लिए भी काम कर सकते हैं।

शोध और शिक्षण

अंग्रेजी में स्नातक डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए शोध और शिक्षण प्रणाली से जुड़े हुए कार्यों में अपना करिअर बनाना बहुत आम बात है। सभी संस्थाओं को हमेशा अच्छे शिक्षकों की आवश्यकता रही है। यदि आप इस विषय में अच्छा प्रदर्शन करेंगे तो अच्छी आय का स्रोत प्राप्त कर सकते हैं। यदि आपने सेट, नेट या जेआरएफ जैसी उच्च स्तरीय परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं तो आप आसानी से शिक्षण के क्षेत्र में एक सफल करिअर बना सकते हैं।

जनसंपर्क और विज्ञापन

आपने अपनी डिग्री हासिल करने के दौरान जो संप्रेषण दक्षता हासिल की है, वह बेकार क्यों जाएं? इस दक्षता के दम पर आप एक रचनात्मक प्रमुख, इवेंट प्रबंधक और पीआर प्रबंधक के रूप में कार्य कर सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप अपने लेखन कौशल, रचनात्मकता, तर्क-वितर्क शक्ति का सही से उपयोग करें। विज्ञापन उद्योग हमेशा एक ऐसे व्यक्तियों की तलाश करता है जो कुछ रचनात्मक सोच रखते हों। जनसंपर्क और विज्ञापन उद्योग में हमेशा ही रचनात्मक कार्य की आवश्यकता रहती है और उसका सही मूल्यांकन भी किया जाता है।

स्वतंत्र लेखन

हम देख रहे हैं कि हाल के रुझानों में तेजी से बदलाव आ रहा है, जिससे पता चलता है कि फ्रीलांसर (स्वतंत्र) लेखकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा विषय हो सकता है जो दूसरे लोगों के लिए विषय वस्तु तैयार कर सकते हैं। फ्रीलांस यानी स्वतंत्र लेखन उद्योग बहुत बड़ा है और आप थोड़ा सा धैर्य और शब्दों पर अच्छी पकड़ के साथ इस उद्योग में अपनी स्थापना बहुत आसानी से कर सकते हैं।

संपादन/अनुवादक

इस क्षेत्र में नौकरी के कई बेहतर विकल्प मौजूद हैं। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार एजंसियों को उप संपादकों की आवश्यकता रहती है। इसके अलावा विभिन्न देश के दूतावास अनुवादक को नौकरी पर रख रहे हैं जो अंग्रेजी भाषा को जानते समझते हों और उसका अनुवाद कर सकते हों। अनुवाद क्षेत्र में वेतनमान/मानदेय काफी बेहतर मौजूद है। इस रचनात्मक क्षेत्र में करिअर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए अनुवादक बनना एक बेहतर करिअर विकल्प साबित हो सकता है।

अंग्रेजी में डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थी पुस्तकालय विज्ञान में भी अपना करिअर बना सकते हैं। पुस्तकालय अध्यक्ष का पद एक बेहद ही सम्मानीय पद होता है। अंग्रेजी भाषा साहित्य में डिग्री धारक विद्यार्थियों के लिए करिअर के विकल्प बहुत सारे हैं और यदि विद्यार्थी उनका लाभ उठाना चाहे तो वह अपना करिअर बहुत अच्छा बना सकता है।

  • नेहा जैन (निदेशक, गुरुकुलम अकादमी, नई दिल्ली)

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पत्रकारिता और जनसंचार

इस विषय में डिग्री प्राप्त कर आप आसानी से अपना करिअर पत्रकारिता में बना सकते हैं। मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है जिसके कारण लोगों में इसके प्रति दिलचस्पी रहती है। अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने बहुत सारे कार्यों को पढ़ा व उनका विश्लेषण किया हुआ होता है। ऐसा करने से न केवल उनकी समझ का स्तर बढ़ता है बल्कि विद्यार्थियों में रचनात्मक पहलू का भी विकास होता है। ऐसे विद्यार्थी परिस्थितियों का सही प्रकार से मूल्यांकन करते हुए विश्लेषण करते हैं जिससे उनकी कार्य क्षमता का विस्तार होता है। मीडिया करिअर में ब्लागिंग, संवाद व पाठ्य कथा लेखन और अन्य कई कार्य शामिल होते हैं।

प्रकाशन कार्य

अंग्रेजी में डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है कि वह लेखन के कार्य के उस स्वभाव को न जाने दे जो कि उसने साहित्यिक अध्ययन से प्राप्त किया है। विद्यार्थियों द्वारा इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न उपन्यासों के बारे में कठिन लेख लिखने के बाद, स्वाभाविक रूप से लिखने की कला विकसित हो जाती है। प्रकाशन उन लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है जो अपने विचारों को अपनी कलम से प्रस्तुत कर सकते हैं और शब्दों के इर्द-गिर्द अपना रास्ता बना सकते हैं। आप पत्रिकाओं, समाचार पत्रों, पत्रकारों और स्तंभ के लिए भी काम कर सकते हैं।

शोध और शिक्षण

अंग्रेजी में स्नातक डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए शोध और शिक्षण प्रणाली से जुड़े हुए कार्यों में अपना करिअर बनाना बहुत आम बात है। सभी संस्थाओं को हमेशा अच्छे शिक्षकों की आवश्यकता रही है। यदि आप इस विषय में अच्छा प्रदर्शन करेंगे तो अच्छी आय का स्रोत प्राप्त कर सकते हैं। यदि आपने सेट, नेट या जेआरएफ जैसी उच्च स्तरीय परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं तो आप आसानी से शिक्षण के क्षेत्र में एक सफल करिअर बना सकते हैं।

जनसंपर्क और विज्ञापन

आपने अपनी डिग्री हासिल करने के दौरान जो संप्रेषण दक्षता हासिल की है, वह बेकार क्यों जाएं? इस दक्षता के दम पर आप एक रचनात्मक प्रमुख, इवेंट प्रबंधक और पीआर प्रबंधक के रूप में कार्य कर सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप अपने लेखन कौशल, रचनात्मकता, तर्क-वितर्क शक्ति का सही से उपयोग करें। विज्ञापन उद्योग हमेशा एक ऐसे व्यक्तियों की तलाश करता है जो कुछ रचनात्मक सोच रखते हों। जनसंपर्क और विज्ञापन उद्योग में हमेशा ही रचनात्मक कार्य की आवश्यकता रहती है और उसका सही मूल्यांकन भी किया जाता है।

स्वतंत्र लेखन

हम देख रहे हैं कि हाल के रुझानों में तेजी से बदलाव आ रहा है, जिससे पता चलता है कि फ्रीलांसर (स्वतंत्र) लेखकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा विषय हो सकता है जो दूसरे लोगों के लिए विषय वस्तु तैयार कर सकते हैं। फ्रीलांस यानी स्वतंत्र लेखन उद्योग बहुत बड़ा है और आप थोड़ा सा धैर्य और शब्दों पर अच्छी पकड़ के साथ इस उद्योग में अपनी स्थापना बहुत आसानी से कर सकते हैं।

संपादन/अनुवादक

इस क्षेत्र में नौकरी के कई बेहतर विकल्प मौजूद हैं। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार एजंसियों को उप संपादकों की आवश्यकता रहती है। इसके अलावा विभिन्न देश के दूतावास अनुवादक को नौकरी पर रख रहे हैं जो अंग्रेजी भाषा को जानते समझते हों और उसका अनुवाद कर सकते हों। अनुवाद क्षेत्र में वेतनमान/मानदेय काफी बेहतर मौजूद है। इस रचनात्मक क्षेत्र में करिअर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए अनुवादक बनना एक बेहतर करिअर विकल्प साबित हो सकता है।

अंग्रेजी में डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थी पुस्तकालय विज्ञान में भी अपना करिअर बना सकते हैं। पुस्तकालय अध्यक्ष का पद एक बेहद ही सम्मानीय पद होता है। अंग्रेजी भाषा साहित्य में डिग्री धारक विद्यार्थियों के लिए करिअर के विकल्प बहुत सारे हैं और यदि विद्यार्थी उनका लाभ उठाना चाहे तो वह अपना करिअर बहुत अच्छा बना सकता है।

  • नेहा जैन (निदेशक, गुरुकुलम अकादमी, नई दिल्ली)

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10वीं, 12वीं की ऑफलाइन बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने की याचिका पर सुनवाई से SC का इनकार, कहा- भ्रम पैदा न करें

सुप्रीम कोर्ट ने इस साल सीबीएसई और कई अन्य बोर्ड की तरफ सेआयोजित की जाने वाली 10वीं और 12वीं कक्षा की ऑफलाइन बोर्ड परीक्षा रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से बुधवार को इनकार कर दिया। जस्टिस ए एम खानविल्कर, दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि ऐसी याचिकाओं से गलत उम्मीदें बंधती हैं और हर जगह भ्रम फैलता है। कोर्ट ने कहा कि छात्रों और अधिकारियों को उनका काम करने दें। बेवजह गफलत पैदा न करें।

याचिका में सीबीएसई और अन्य शिक्षा बोर्ड को अन्य माध्यमों से परीक्षा लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। सीबीएसई और अन्य शिक्षा बोर्ड ने 10वीं और 12वीं के लिए ऑफलाइन परीक्षाएं कराने का प्रस्ताव दिया है। यानि बोर्ड की परीक्षाएं स्कूल परिसर में फिजिकल मोड पर होने जा रही हैं।

छात्रों ने ये याचिका अपनी वकील अनुभा श्रीवास्तव के जरिए दाखिल की थी। वो चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट भी हैं। छात्रों का कहना था कि सभी बोर्डों को कहा जाए कि वो रिजल्ट समय पर निकालें और विगत की चुनौतियों को देखते हुए इंप्रूवमेंट का एक मौका छात्रों को मुहैया कराएं। उनका कहना था कि कुछ स्टेट बोर्ड ने अपना टाइमटेबल जारी कर दिया है जबकि कुछ मौका की नजाकर को देख रहे हैं। छात्र उनके इस तरह के रवैये से परेशान हैं। उन्होंने करोना की वजह से पैदा हुई तकलीफों का हवाला दे कोर्ट से अपने साथ न्याय करने की अपील की।

सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं कक्षा के लिए 26 अप्रैल से बोर्ड परीक्षाएं कराने का फैसला किया है। जबकि आईसीएसई ने परीक्षाओं पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। आज की सुनवाई में सीबीएसई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शिरकत की। छात्रों की तरफ से पेश वकील ने कहा कि कोरोना की वजह से क्लास भी ठीक तरीके से नहीं लग पाई हैं। चुनाव भी चल रहे हैं।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि वो इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं करेंगे। बेंच ने याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये किस तरह की दलील है। अथॉरिटी को अपना काम करने दो। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ये याचिका भ्रम पैदा करने वाली है। कोर्ट ने जुर्माना लगाते हुए याचिका को रद्द कर दिया।

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सुप्रीम कोर्ट ने इस साल सीबीएसई और कई अन्य बोर्ड की तरफ सेआयोजित की जाने वाली 10वीं और 12वीं कक्षा की ऑफलाइन बोर्ड परीक्षा रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से बुधवार को इनकार कर दिया। जस्टिस ए एम खानविल्कर, दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि ऐसी याचिकाओं से गलत उम्मीदें बंधती हैं और हर जगह भ्रम फैलता है। कोर्ट ने कहा कि छात्रों और अधिकारियों को उनका काम करने दें। बेवजह गफलत पैदा न करें।

याचिका में सीबीएसई और अन्य शिक्षा बोर्ड को अन्य माध्यमों से परीक्षा लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। सीबीएसई और अन्य शिक्षा बोर्ड ने 10वीं और 12वीं के लिए ऑफलाइन परीक्षाएं कराने का प्रस्ताव दिया है। यानि बोर्ड की परीक्षाएं स्कूल परिसर में फिजिकल मोड पर होने जा रही हैं।

छात्रों ने ये याचिका अपनी वकील अनुभा श्रीवास्तव के जरिए दाखिल की थी। वो चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट भी हैं। छात्रों का कहना था कि सभी बोर्डों को कहा जाए कि वो रिजल्ट समय पर निकालें और विगत की चुनौतियों को देखते हुए इंप्रूवमेंट का एक मौका छात्रों को मुहैया कराएं। उनका कहना था कि कुछ स्टेट बोर्ड ने अपना टाइमटेबल जारी कर दिया है जबकि कुछ मौका की नजाकर को देख रहे हैं। छात्र उनके इस तरह के रवैये से परेशान हैं। उन्होंने करोना की वजह से पैदा हुई तकलीफों का हवाला दे कोर्ट से अपने साथ न्याय करने की अपील की।

सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं कक्षा के लिए 26 अप्रैल से बोर्ड परीक्षाएं कराने का फैसला किया है। जबकि आईसीएसई ने परीक्षाओं पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। आज की सुनवाई में सीबीएसई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शिरकत की। छात्रों की तरफ से पेश वकील ने कहा कि कोरोना की वजह से क्लास भी ठीक तरीके से नहीं लग पाई हैं। चुनाव भी चल रहे हैं।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि वो इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं करेंगे। बेंच ने याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये किस तरह की दलील है। अथॉरिटी को अपना काम करने दो। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ये याचिका भ्रम पैदा करने वाली है। कोर्ट ने जुर्माना लगाते हुए याचिका को रद्द कर दिया।

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Board Exams 2022: 10वीं और 12वीं की ऑफलाइन परीक्षाओं को कैंसल करने की याचिका SC ने रद्द की, कही ये बात

Board Exams 2022: सीबीएसई,आईसीएसई समते कई बोर्ड की 10वीं और 12वीं क्लास की ऑफलाइन परीक्षाएं रद्द कराने को लेकर की गई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जस्टिस एएम खानविलकर (Justice AM Khanwilkar) की बेंच ने बुधवार को ये याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं स्टूडेंट्स को झूठा दिलासा देती हैं।

कोर्ट ने कहा है कि फिलहाल ऐसी संकट जैसी स्थिति नहीं है कि परीक्षाओं को रद्द किया जाए। ये याचिकाएं छात्रों में भ्रम पैदा करती हैं। कोर्ट के इस कदम से ऐसा लग रहा है कि अब बोर्ड की परीक्षाएं तय समय पर ही आयोजित होंगी। हालांकि इस मामले में अभी संबंधित राज्यों और शिक्षा बोर्ड के फैसले का इंतजार है।

गौरतलब है कि देश के कई राज्यों के 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए ऑफलाइन परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की गई थी और इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी।

इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ ने याचिकाकर्ता को फटकार भी लगाई है और नाराजगी जताते हुए जुर्माना लगाने की भी चेतावनी दी। हालांकि बाद में कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर कोई जुर्माना नहीं लगाया।

क्या है पूरा मामला: 15 राज्यों के छात्रों ने ये मांग रखी कि ऑफलाइन परीक्षा को रद्द किया जाए और वैकल्पिक मूल्यांकन पद्धति से रिजल्ट बनाया जाए। इसके अलावा छात्रों ने इंप्रूवमेंट एग्जाम के विकल्प की भी मांग की।

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Board Exams 2022: सीबीएसई,आईसीएसई समते कई बोर्ड की 10वीं और 12वीं क्लास की ऑफलाइन परीक्षाएं रद्द कराने को लेकर की गई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जस्टिस एएम खानविलकर (Justice AM Khanwilkar) की बेंच ने बुधवार को ये याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं स्टूडेंट्स को झूठा दिलासा देती हैं।

कोर्ट ने कहा है कि फिलहाल ऐसी संकट जैसी स्थिति नहीं है कि परीक्षाओं को रद्द किया जाए। ये याचिकाएं छात्रों में भ्रम पैदा करती हैं। कोर्ट के इस कदम से ऐसा लग रहा है कि अब बोर्ड की परीक्षाएं तय समय पर ही आयोजित होंगी। हालांकि इस मामले में अभी संबंधित राज्यों और शिक्षा बोर्ड के फैसले का इंतजार है।

गौरतलब है कि देश के कई राज्यों के 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए ऑफलाइन परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की गई थी और इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी।

इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ ने याचिकाकर्ता को फटकार भी लगाई है और नाराजगी जताते हुए जुर्माना लगाने की भी चेतावनी दी। हालांकि बाद में कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर कोई जुर्माना नहीं लगाया।

क्या है पूरा मामला: 15 राज्यों के छात्रों ने ये मांग रखी कि ऑफलाइन परीक्षा को रद्द किया जाए और वैकल्पिक मूल्यांकन पद्धति से रिजल्ट बनाया जाए। इसके अलावा छात्रों ने इंप्रूवमेंट एग्जाम के विकल्प की भी मांग की।

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Rajasthan Budget 2022: बजट के दौरान सीएम गहलोत की बड़ी घोषणा, एक लाख नए पदों पर होगी भर्ती, शिक्षा क्षेत्र को मिला ये तोहफा

Rajasthan CM On Unemployed Youth: राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने बुधवार को बजट पेश करने के दौरान कहा कि एक लाख नए पदों पर भर्तियां जल्द निकलेंगी। उन्होंने ये भी कहा कि हमने एक लाख से अधिक नियुक्तियां दे दी हैं और 1.25 लाख पदों पर भर्तियां प्रक्रियाधीन हैं।

सीएम ने कहा कि जुलाई 2022 में रीट की परीक्षा होगी और रीट के पुराने स्टूडेंट्स से आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने ये भी कहा कि हमने रीट में भर्तियां 32 हजार से बढ़ाकर 62 हजार कर दी हैं।

बजट के दौरान सीएम गहलोत ने कई अहम घोषणाएं की हैं। जिसमें फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एसओजी में एंटी चीटिंग सेल का गठन भी शामिल है।

ये हैं अन्य घोषणाएं-

  • शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खोले जाएंगे एक-एक हजार अंग्रेजी मीडियम के स्कूल।
  • अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाने के लिए शिक्षकों का अलग कैडर बनाया जाएगा और ऐसे 10 हजार शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
  • 3820 सेकंडरी स्कूलों को सीनियर सेकंडरी बदला जाएगा।
  • राज्य के 19 जिलों में 36 कन्या महाविद्यालय खोले जाएंगे। इसके अलावा 25 कन्या कॉलेजों में नए विषयों की शुरुआत की जाएगी।
  • राज्य में मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अगले साल अजमेर,जोधपुर और कोटा में नए मेडिकल इंस्टीट्यूट पर 250 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
  • 18 जिलों में नर्सिंग कॉलेज खोले जाएंगे। इसके अलावा एसएमएस अस्पताल, जयपुर में 5 नए विभाग और रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की जाएगी और इसमें 300 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

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सीएम ने कहा कि जुलाई 2022 में रीट की परीक्षा होगी और रीट के पुराने स्टूडेंट्स से आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने ये भी कहा कि हमने रीट में भर्तियां 32 हजार से बढ़ाकर 62 हजार कर दी हैं।

बजट के दौरान सीएम गहलोत ने कई अहम घोषणाएं की हैं। जिसमें फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एसओजी में एंटी चीटिंग सेल का गठन भी शामिल है।

ये हैं अन्य घोषणाएं-

  • शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खोले जाएंगे एक-एक हजार अंग्रेजी मीडियम के स्कूल।
  • अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाने के लिए शिक्षकों का अलग कैडर बनाया जाएगा और ऐसे 10 हजार शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
  • 3820 सेकंडरी स्कूलों को सीनियर सेकंडरी बदला जाएगा।
  • राज्य के 19 जिलों में 36 कन्या महाविद्यालय खोले जाएंगे। इसके अलावा 25 कन्या कॉलेजों में नए विषयों की शुरुआत की जाएगी।
  • राज्य में मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अगले साल अजमेर,जोधपुर और कोटा में नए मेडिकल इंस्टीट्यूट पर 250 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
  • 18 जिलों में नर्सिंग कॉलेज खोले जाएंगे। इसके अलावा एसएमएस अस्पताल, जयपुर में 5 नए विभाग और रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की जाएगी और इसमें 300 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

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Tuesday, February 22, 2022

UPSC: लगातार मिलने वाली असफलता और मां के कैंसर के बाद भी नहीं छोड़ी ज़िद, सातवें अटेम्प्ट में पूरा किया सपना

UPSC: सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार आईएएस अधिकारी बनने का सपना लिया इस परीक्षा में बैठते हैं। हालांकि, केवल कुछ ही लोग इस परीक्षा में सफलता हासिल कर पाते हैं। इस कामयाबी के पीछे बहुत सारी अड़चनें, कई संघर्ष और सालों की मेहनत होती है। ऐसी ही एक कहानी है पल्लवी वर्मा की जिन्होंने हर परिस्थिति का डटकर सामना किया और आखिर में अपना मुकाम हासिल किया।

इंदौर की रहने वाली पल्लवी वर्मा ने बायोटेक्नोलॉजी में बैचलर्स की डिग्री हासिल की है। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने लगभग 10 से 11 महीने तक चेन्नई में सॉफ्टवेयर टेस्टर के रूप में काम भी किया। इसके बाद साल 2013 से उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने पहले प्रयास में ही काफी मेहनत की थी लेकिन पूरी जानकारी न होने के कारण उनका सेलेक्शन रह गया। इसके बाद उन्होंने कुल 5 अटेम्प्ट दिए। कभी इंटरव्यू तक पहुंची तो कभी प्रीलिम्स भी क्लियर करने में असफल रही थी।

सिविल सेवा परीक्षा के इस उतार-चढ़ाव भरे सफर के दौरान उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई जारी रखी। इस दौरान उनकी मां को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का सामना करना पड़ा था। लगातार मिलने वाली असफलता और परिवार में इस संकट की घड़ी को देखते हुए पल्लवी ने परीक्षा में न बैठने का फैसला कर लिया था लेकिन उनके माता पिता ने भरपूर सहयोग किया। आखिरकार, साल 2020 में पल्लवी ने अपना सातवां अटेम्प्ट दिया और 340वीं रैंक प्राप्त कर सपना पूरा किया।

इस कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए पल्लवी ने लगभग 7 सालों तक मेहनत की थी। उन्होंने अपनी कमजोरी और गलतियों को पहचाना और समय रहते उसमें सुधार भी किया था। मजबूत इच्छाशक्ति और दिन-रात की मेहनत के बाद ही पल्लवी को यह मुकाम हासिल हुआ था। इससे न केवल उनका बल्कि उनके घर वालों का भी नाम रोशन हुआ।

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UPSC: सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार आईएएस अधिकारी बनने का सपना लिया इस परीक्षा में बैठते हैं। हालांकि, केवल कुछ ही लोग इस परीक्षा में सफलता हासिल कर पाते हैं। इस कामयाबी के पीछे बहुत सारी अड़चनें, कई संघर्ष और सालों की मेहनत होती है। ऐसी ही एक कहानी है पल्लवी वर्मा की जिन्होंने हर परिस्थिति का डटकर सामना किया और आखिर में अपना मुकाम हासिल किया।

इंदौर की रहने वाली पल्लवी वर्मा ने बायोटेक्नोलॉजी में बैचलर्स की डिग्री हासिल की है। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने लगभग 10 से 11 महीने तक चेन्नई में सॉफ्टवेयर टेस्टर के रूप में काम भी किया। इसके बाद साल 2013 से उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने पहले प्रयास में ही काफी मेहनत की थी लेकिन पूरी जानकारी न होने के कारण उनका सेलेक्शन रह गया। इसके बाद उन्होंने कुल 5 अटेम्प्ट दिए। कभी इंटरव्यू तक पहुंची तो कभी प्रीलिम्स भी क्लियर करने में असफल रही थी।

सिविल सेवा परीक्षा के इस उतार-चढ़ाव भरे सफर के दौरान उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई जारी रखी। इस दौरान उनकी मां को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का सामना करना पड़ा था। लगातार मिलने वाली असफलता और परिवार में इस संकट की घड़ी को देखते हुए पल्लवी ने परीक्षा में न बैठने का फैसला कर लिया था लेकिन उनके माता पिता ने भरपूर सहयोग किया। आखिरकार, साल 2020 में पल्लवी ने अपना सातवां अटेम्प्ट दिया और 340वीं रैंक प्राप्त कर सपना पूरा किया।

इस कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए पल्लवी ने लगभग 7 सालों तक मेहनत की थी। उन्होंने अपनी कमजोरी और गलतियों को पहचाना और समय रहते उसमें सुधार भी किया था। मजबूत इच्छाशक्ति और दिन-रात की मेहनत के बाद ही पल्लवी को यह मुकाम हासिल हुआ था। इससे न केवल उनका बल्कि उनके घर वालों का भी नाम रोशन हुआ।

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