Saturday, November 13, 2021

UPSC: दीक्षा जैन ने सिविल सेवा परीक्षा में पाई 22वीं रैंक, पढ़ाई के साथ ही इस बात को देती हैं महत्व

UPSC: दीक्षा जैन हमेशा से ही सिविल सेवा के क्षेत्र में जाना चाहती थीं। इसके लिए उन्हें अपने पिता से प्रेरणा मिली जो कि खुद एक आईपीएस ऑफिसर थे। दीक्षा के परिवार वालों ने भी उन्हें इस क्षेत्र में जाने के लिए काफी प्रेरित किया था। ग्रेजुएशन करने के बाद दीक्षा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से इंग्लिश में मास्टर्स किया है। उन्होंने कॉलेज के दौरान ही सिविल सेवा परीक्षा का पहला अटेम्प्ट दिया था। हालांकि, ठीक तरह से पढ़ाई न हो पाने के कारण वह प्रीलिम्स भी नहीं क्लियर कर पाईं थीं।

दीक्षा ने पहले प्रयास में हुई गलतियों को पहचाना और उसमें सुधार भी किया। उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए कॉलेज से एक साल का ब्रेक लिया और पूरी तरह से पढ़ाई में लग गई थीं। इसकी शुरुआत उन्होंने कुछ स्टैंडर्ड किताबों को पढ़ने से की थी। दीक्षा ने पढ़ाई के साथ ही अपने आप को मेंटली और फिजिकली फिट रखने पर भी काफी ध्यान दिया था। इस कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त करने में काफी समय लग सकता है। इस दौरान उम्मीदवारों को कई बार निराशा और असफलताओं का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में अपने आप को फिट रखने के साथ ही तैयारी की जा सकती है।

UPSC: दूसरे प्रयास में सफलता प्राप्त करने वाले राहुल इंटरव्यू के लिए देते हैं यह ज़रूरी सलाह

दीक्षा ने तैयारी के दौरान प्रीलिम्स और मेन्स के लिए कई मॉक टेस्ट दिए थे। इसके साथ ही आंसर राइटिंग की भी काफी प्रैक्टिस की थी। उन्होंने इतने टेस्ट दिए कि उनके मन से परीक्षा का डर ही निकल चुका था। उन्हें अपनी तैयारी पर पूरा भरोसा था इसलिए उन्होंने परीक्षा के बाद रिजल्ट की भी परवाह नहीं की थी। दीक्षा के इसी रवैया और सकारात्मक सोच के चलते ही उन्होंने साल 2018 की सिविल सेवा परीक्षा में 22वीं रैंक के साथ टॉप किया था। इस कामयाबी से उन्होंने न केवल अपना बल्कि परिवार वालों का भी नाम रोशन किया।

UPSC: ऋषि राज ने दूसरे अटेम्प्ट में किया टॉप, ऐसे तय किया इंजीनियर से आईएएस बनने तक का सफर

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी को लेकर दीक्षा का मानना है कि बहुत सारी किताबों की जगह कुछ चुनिंदा किताबों से ही पढ़ाई करनी चाहिए लेकिन पढ़ाई के साथ ही बार-बार रिवीजन करना बेहद ज़रूरी है। इसके अलावा प्रीलिम्स परीक्षा और मेन्स परीक्षा की तैयारी साथ-साथ करें। हालांकि, जब प्रीलिम्स के लिए कुछ दिन बचें तो आप पूरी तरह से इसी पर फोकस करें। दीक्षा के अनुसार सही रणनीति और कठिन परिश्रम के साथ ही सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए आत्मविश्वास होना बेहद महत्वपूर्ण है।

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UPSC: दीक्षा जैन हमेशा से ही सिविल सेवा के क्षेत्र में जाना चाहती थीं। इसके लिए उन्हें अपने पिता से प्रेरणा मिली जो कि खुद एक आईपीएस ऑफिसर थे। दीक्षा के परिवार वालों ने भी उन्हें इस क्षेत्र में जाने के लिए काफी प्रेरित किया था। ग्रेजुएशन करने के बाद दीक्षा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से इंग्लिश में मास्टर्स किया है। उन्होंने कॉलेज के दौरान ही सिविल सेवा परीक्षा का पहला अटेम्प्ट दिया था। हालांकि, ठीक तरह से पढ़ाई न हो पाने के कारण वह प्रीलिम्स भी नहीं क्लियर कर पाईं थीं।

दीक्षा ने पहले प्रयास में हुई गलतियों को पहचाना और उसमें सुधार भी किया। उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए कॉलेज से एक साल का ब्रेक लिया और पूरी तरह से पढ़ाई में लग गई थीं। इसकी शुरुआत उन्होंने कुछ स्टैंडर्ड किताबों को पढ़ने से की थी। दीक्षा ने पढ़ाई के साथ ही अपने आप को मेंटली और फिजिकली फिट रखने पर भी काफी ध्यान दिया था। इस कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त करने में काफी समय लग सकता है। इस दौरान उम्मीदवारों को कई बार निराशा और असफलताओं का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में अपने आप को फिट रखने के साथ ही तैयारी की जा सकती है।

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दीक्षा ने तैयारी के दौरान प्रीलिम्स और मेन्स के लिए कई मॉक टेस्ट दिए थे। इसके साथ ही आंसर राइटिंग की भी काफी प्रैक्टिस की थी। उन्होंने इतने टेस्ट दिए कि उनके मन से परीक्षा का डर ही निकल चुका था। उन्हें अपनी तैयारी पर पूरा भरोसा था इसलिए उन्होंने परीक्षा के बाद रिजल्ट की भी परवाह नहीं की थी। दीक्षा के इसी रवैया और सकारात्मक सोच के चलते ही उन्होंने साल 2018 की सिविल सेवा परीक्षा में 22वीं रैंक के साथ टॉप किया था। इस कामयाबी से उन्होंने न केवल अपना बल्कि परिवार वालों का भी नाम रोशन किया।

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