NEET 2021: कहते हैं कि प्रतिभा किसी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती और इस कहावत को राजस्थान के झालावाड़ जिले के छोटे से गांव पचपहाड़ की एक बेटी ने सच कर दिखाया है।
22 साल की नाजिया ने तमाम परेशानियों के बावजूद NEET UG की परीक्षा पास की है और OBC कैटेगरी में उन्होंने 477वीं रैंक हासिल की है। नाजिया के पिता इसामुद्दीन एक टैंपो ड्राइवर हैं और मां कृषि मजदूर के रूप में दिहाड़ी पर काम कर चुकी हैं। लेकिन इस परिवार ने अपनी बिटिया के हौसले को कभी कम नहीं होने दिया।
नाजिया अपने गांव की पहली डॉक्टर बनने जा रही हैं। उनकी सफलता के पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प है। वह अपनी साइकिल को अपनी सफलता का महत्वपूर्ण अंग मानती हैं।
दरअसल 9वीं क्लास के बाद सरकार की तरफ से उन्हें एक साइकिल मिली थी। इसी साइकिल पर बैठकर वह स्कूल जाया करती थीं। उनका कहना है कि ये साइकिल ना होती तो शायद वह इतनी दूर पढ़ने नहीं जा पातीं।
नाजिया ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा सरकारी स्कॉलरशिप पर की। उन्होंने काफी गरीबी में अपना बचपन बिताया है। उन्हें स्कॉलरशिप के जो एक लाख रुपए मिले थे, उसी पैसे से उन्होंने कोचिंग की और आज वह इस मुकाम पर हैं कि सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माने जाने वाली NEET परीक्षा को वह क्वालीफाई कर चुकी हैं।
नाजिया ने 12वीं की परीक्षा में 90 फीसदी से ज्यादा नंबर पाए थे। इसके बाद उन्होंने कोचिंग ज्वाइन की और सफलता हासिल की। नाजिया MBBS करने के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ बनना चाहती हैं।
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NEET 2021: कहते हैं कि प्रतिभा किसी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती और इस कहावत को राजस्थान के झालावाड़ जिले के छोटे से गांव पचपहाड़ की एक बेटी ने सच कर दिखाया है।
22 साल की नाजिया ने तमाम परेशानियों के बावजूद NEET UG की परीक्षा पास की है और OBC कैटेगरी में उन्होंने 477वीं रैंक हासिल की है। नाजिया के पिता इसामुद्दीन एक टैंपो ड्राइवर हैं और मां कृषि मजदूर के रूप में दिहाड़ी पर काम कर चुकी हैं। लेकिन इस परिवार ने अपनी बिटिया के हौसले को कभी कम नहीं होने दिया।
नाजिया अपने गांव की पहली डॉक्टर बनने जा रही हैं। उनकी सफलता के पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प है। वह अपनी साइकिल को अपनी सफलता का महत्वपूर्ण अंग मानती हैं।
दरअसल 9वीं क्लास के बाद सरकार की तरफ से उन्हें एक साइकिल मिली थी। इसी साइकिल पर बैठकर वह स्कूल जाया करती थीं। उनका कहना है कि ये साइकिल ना होती तो शायद वह इतनी दूर पढ़ने नहीं जा पातीं।
नाजिया ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा सरकारी स्कॉलरशिप पर की। उन्होंने काफी गरीबी में अपना बचपन बिताया है। उन्हें स्कॉलरशिप के जो एक लाख रुपए मिले थे, उसी पैसे से उन्होंने कोचिंग की और आज वह इस मुकाम पर हैं कि सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माने जाने वाली NEET परीक्षा को वह क्वालीफाई कर चुकी हैं।
नाजिया ने 12वीं की परीक्षा में 90 फीसदी से ज्यादा नंबर पाए थे। इसके बाद उन्होंने कोचिंग ज्वाइन की और सफलता हासिल की। नाजिया MBBS करने के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ बनना चाहती हैं।
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