UPSC: सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए सुमित कुमार की कहानी काफी प्रेरणादायक है। सुमित कुमार बिहार के ऐसे गांव से ताल्लुक रखते हैं, जहां पढ़ाई लिखाई को लेकर ज़्यादा जागरूकता नहीं है। ऐसे में सुमित के माता-पिता ने उनकी पढ़ाई लिखाई और बेहतर भविष्य के लिए केवल 8 साल की उम्र में ही उन्हें बोर्डिंग स्कूल भेज दिया था। इस दौरान सुमित की माता पिता को भी कई संघर्षों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी अपने बच्चों की पढ़ाई पर इसका असर नहीं पड़ने दिया था।
सुमित ने कक्षा 12 तक की पढ़ाई बोर्डिंग स्कूल से ही पूरी की है। इसके बाद उन्होंने आईआईटी से ग्रेजुएशन किया। ग्रेजुएशन के दौरान ही सुमित को सिविल सेवा परीक्षा देने का विचार आया और उन्होंने इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी। साल 2016 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा का पहला अटेम्प्ट दिया था। अपने पहले ही प्रयास में उन्हें असफलता हाथ लगी। हालांकि, उन्होंने पहले प्रयास में हुई गलतियों को पहचाना और उसमें सुधार भी किया। इसके बाद सुमित ने अगले ही साल सिविल सेवा परीक्षा का दूसरा अटेम्प्ट दिया। इस बार उन्होंने 493वीं रैंक के साथ सफलता तो प्राप्त कर ली थी लेकिन उन्हें मनचाहा पद नहीं मिला था। इस सफलता से संतुष्ट होने की जगह सुमित ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार तीसरे प्रयास में 53वीं रैंक प्राप्त की और मनचाहा पद भी हासिल किया। इस कामयाबी से सुमित ने न केवल अपना बल्कि परिवार वालों का सर भी गर्व से ऊंचा कर दिया।
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सुमित के अनुसार इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए अभ्यास करना बेहद आवश्यक है। वह बताते हैं कि अपने पहले प्रयास में उन्होंने केवल 5 या 6 टेस्ट पेपर ही दिए थे। ऐसे में पर्याप्त अभ्यास न होने के कारण सुमित प्रीलिम्स भी नहीं क्लियर कर पाए थे। वहीं, दूसरे प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स और मेन्स परीक्षा में तो अच्छे अंक प्राप्त किए थे लेकिन इंटरव्यू में ज्यादा अच्छा प्रदर्शन नहीं था। हालांकि, तीसरे प्रयास में सुमित ने सभी गलतियों में सुधार किया और सिविल सेवा परीक्षा के टॉपर बनें।
UPSC: चार प्रयासों के बाद मिला मनचाहा पद, ऐसा रहा रोमा का IPS से IAS बनने तक का सफर
सुमित का मानना है कि प्रीलिम्स में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए लिमिटेड किताबों से पढ़ाई करनी चाहिए। इसके साथ ही नियमित रिवीजन और टेस्ट सीरीज देना चाहिए। इस परीक्षा की तैयारी के लिए कठिन परिश्रम और सही रणनीति के साथ ही अपनी गलतियों में सुधार भी करते रहना चाहिए। इसके अलावा पढ़ाई के साथ ही धैर्य बनाए रखना बहुत जरूरी है।
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UPSC: सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए सुमित कुमार की कहानी काफी प्रेरणादायक है। सुमित कुमार बिहार के ऐसे गांव से ताल्लुक रखते हैं, जहां पढ़ाई लिखाई को लेकर ज़्यादा जागरूकता नहीं है। ऐसे में सुमित के माता-पिता ने उनकी पढ़ाई लिखाई और बेहतर भविष्य के लिए केवल 8 साल की उम्र में ही उन्हें बोर्डिंग स्कूल भेज दिया था। इस दौरान सुमित की माता पिता को भी कई संघर्षों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी अपने बच्चों की पढ़ाई पर इसका असर नहीं पड़ने दिया था।
सुमित ने कक्षा 12 तक की पढ़ाई बोर्डिंग स्कूल से ही पूरी की है। इसके बाद उन्होंने आईआईटी से ग्रेजुएशन किया। ग्रेजुएशन के दौरान ही सुमित को सिविल सेवा परीक्षा देने का विचार आया और उन्होंने इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी। साल 2016 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा का पहला अटेम्प्ट दिया था। अपने पहले ही प्रयास में उन्हें असफलता हाथ लगी। हालांकि, उन्होंने पहले प्रयास में हुई गलतियों को पहचाना और उसमें सुधार भी किया। इसके बाद सुमित ने अगले ही साल सिविल सेवा परीक्षा का दूसरा अटेम्प्ट दिया। इस बार उन्होंने 493वीं रैंक के साथ सफलता तो प्राप्त कर ली थी लेकिन उन्हें मनचाहा पद नहीं मिला था। इस सफलता से संतुष्ट होने की जगह सुमित ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार तीसरे प्रयास में 53वीं रैंक प्राप्त की और मनचाहा पद भी हासिल किया। इस कामयाबी से सुमित ने न केवल अपना बल्कि परिवार वालों का सर भी गर्व से ऊंचा कर दिया।
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सुमित का मानना है कि प्रीलिम्स में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए लिमिटेड किताबों से पढ़ाई करनी चाहिए। इसके साथ ही नियमित रिवीजन और टेस्ट सीरीज देना चाहिए। इस परीक्षा की तैयारी के लिए कठिन परिश्रम और सही रणनीति के साथ ही अपनी गलतियों में सुधार भी करते रहना चाहिए। इसके अलावा पढ़ाई के साथ ही धैर्य बनाए रखना बहुत जरूरी है।
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