Wednesday, October 27, 2021

UPSC: गरीबी और बीमारी से जूझ रही उम्मुल खेर ने पहले प्रयास में पाई यूपीएससी परीक्षा में सफलता

UPSC: यूपीएससी एग्जाम में हर साल लाखों उम्मीदवार भाग लेते हैं। पर पास होने वाले उम्मीदवारों की संख्या बहुत कम होती है। इनमें से कई उम्मीदवार बहुत ही कठिन परिस्थितियों से गुजर कर इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करते हैं। ऐसी ही एक कैंडिडेट थी उम्मुल खेर।

उम्मुल खेर का जन्म राजस्थान के पाली में हुआ था, पर जब वे छोटी थीं तो उनके पिता परिवार सहित दिल्ली निजामुद्दीन इलाके की एक झुग्गी बस्ती में बस गये थे। उनके पिता परिवार की रोजी रोटी चलाने के लिए कपड़े बेचते थे। जिस झुग्गी में वे रहती थीं उस समय उसे ध्वस्त कर दिया गया जिसके बाद उनका परिवार  त्रिलोक पुरी इलाके की एक अन्य झुग्गी बस्ती में चला गया। उम्मुल खेर को बोन फ्रैजाइल डिसऑर्डर से जूझना पड़ा, जिससे इंसान की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इस बीमारी के परिणामस्वरूप, उसकी हड्डियां कमजोर हो कर टूट जाती हैं। जिस खतरनाक बीमारी से वह पीड़ित थी, उसके कारण उसके 16 फ्रैक्चर और 8 सर्जरी हुईं।

UPSC: हरियाणा के प्रथम कौशिक ने दूसरे प्रयास में किया टॉप, परीक्षा के लिए अपनाई यह रणनीति

उनके लिए बचपन से आईएएस अधिकारी बनने तक का सफर संघर्ष से भरा रहा। झुग्गी-झोपड़ी में रहने से उनके लिए यूपीएससी की तैयारी करना और भी मुश्किल हो गया था। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति स्थिर नहीं थी, जिस कारण उसने बहुत कम उम्र में ट्यूशन लेना शुरू कर दिया था।

उम्मुल अपनी स्कूल की फीस ट्यूशन से कमाए पैसों से देती थी। उसने कक्षा 10 में 91% और कक्षा 12 में 89% अंक प्राप्त किए। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद उम्मुल ने जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय अफेयर्स में एमए किया और फिर एमफिल/पीएचडी में प्रवेश लिया।

UPSC: पहले प्रयास में मिली असफलता के बाद नहीं मानी हार, करिश्मा नायर ने दूसरे प्रयास में ऐसे किया टॉप

इसके साथ ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। अपनी कड़ी मेहनत के कारण, उन्होंने 2017 में पहले प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास की। पूरे भारत में 420वीं रैंक प्राप्त करके, वह एक आईएएस अधिकारी बन गईं। आज उनकी कहानी उनके जैसे हजारों लोगों के लिए प्रेरणा है।

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उम्मुल खेर का जन्म राजस्थान के पाली में हुआ था, पर जब वे छोटी थीं तो उनके पिता परिवार सहित दिल्ली निजामुद्दीन इलाके की एक झुग्गी बस्ती में बस गये थे। उनके पिता परिवार की रोजी रोटी चलाने के लिए कपड़े बेचते थे। जिस झुग्गी में वे रहती थीं उस समय उसे ध्वस्त कर दिया गया जिसके बाद उनका परिवार  त्रिलोक पुरी इलाके की एक अन्य झुग्गी बस्ती में चला गया। उम्मुल खेर को बोन फ्रैजाइल डिसऑर्डर से जूझना पड़ा, जिससे इंसान की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इस बीमारी के परिणामस्वरूप, उसकी हड्डियां कमजोर हो कर टूट जाती हैं। जिस खतरनाक बीमारी से वह पीड़ित थी, उसके कारण उसके 16 फ्रैक्चर और 8 सर्जरी हुईं।

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उनके लिए बचपन से आईएएस अधिकारी बनने तक का सफर संघर्ष से भरा रहा। झुग्गी-झोपड़ी में रहने से उनके लिए यूपीएससी की तैयारी करना और भी मुश्किल हो गया था। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति स्थिर नहीं थी, जिस कारण उसने बहुत कम उम्र में ट्यूशन लेना शुरू कर दिया था।

उम्मुल अपनी स्कूल की फीस ट्यूशन से कमाए पैसों से देती थी। उसने कक्षा 10 में 91% और कक्षा 12 में 89% अंक प्राप्त किए। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद उम्मुल ने जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय अफेयर्स में एमए किया और फिर एमफिल/पीएचडी में प्रवेश लिया।

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इसके साथ ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। अपनी कड़ी मेहनत के कारण, उन्होंने 2017 में पहले प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास की। पूरे भारत में 420वीं रैंक प्राप्त करके, वह एक आईएएस अधिकारी बन गईं। आज उनकी कहानी उनके जैसे हजारों लोगों के लिए प्रेरणा है।

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