UPSC: दिव्यांशु राजस्थान के जयपुर जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने जयपुर के ही एक स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की है। जिसके बाद उन्होंने बिट्स पिलानी से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग से बैचलर्स की डिग्री हासिल की है। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद दिव्यांशु ने IIM कोलकाता से एमबीए किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद दिव्यांशु ने मुंबई के एक बैंक में करीब एक साल तक नौकरी भी की थी। हालांकि, दिव्यांशु अपनी इस नौकरी से संतुष्ट नहीं थे और वह समाज के लिए कुछ करना चाहते थे। फिर कुछ समय बाद ही दिव्यांशु ने नौकरी छोड़ कर पूरी तरह से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी।
इस कठिन परीक्षा की तैयारी के लिए दिव्यांशु दिल्ली आ गए थे। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा के लिए दो चीज पहले ही तय कर ली थी। पहली यह कि उनका ऑप्शनल सब्जेक्ट मैथमेटिक्स होगा। उन्हें बचपन से ही इस विषय में काफी रुचि थी और इंजीनियरिंग के दौरान भी वह कई टॉपिक पहले ही पढ़ चुके थे। दूसरी चीज यह कि प्रीलिम्स परीक्षा के लिए कोचिंग करने की जगह वह इंटरनेट और आसानी से उपलब्ध स्टडी मैटेरियल से ही तैयारी करेंगे।
दिव्यांशु ने सिविल सेवा परीक्षा के पहले अटेम्प्ट के लिए लगभग 80 से 90 मॉक टेस्ट दिए थे। इसके अलावा उन्होंने पिछले साल के पेपर भी सॉल्व किए थे। हालांकि, प्रीलिम्स परीक्षा देने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि एलिमिनेशन टेक्निक के माध्यम से वह अगले प्रयास में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। फिर दूसरे प्रयास में उन्होंने केवल 40 से 50 ही मॉक टेस्ट दिए थे लेकिन पेपर के दौरान उन्होंने एलिमिनेशन टेक्निक का उपयोग किया था। इस टेक्निक के माध्यम से उन्होंने प्रीलिम्स में पहले से ज्यादा अच्छे अंक प्राप्त किए थे। इसके अलावा करंट अफेयर्स के लिए न्यूज़पेपर और मैगज़ीन से काफी तैयारी की थी।
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दिव्यांशु का मानना है कि इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए पूरी तरह से समर्पित होकर मेहनत करनी होगी। इसके साथ ही ऑप्शनल विषय का चुनाव भी बेहद सोच समझकर करना चाहिए। उनके अनुसार पढ़ाई के साथ नियमित रूप से रिवीजन और आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस करना बेहद आवश्यक होता है। दिव्यांशु ने भी कठिन परिश्रम और सही रणनीति के चलते सिविल सेवा परीक्षा के दूसरे प्रयास में 30वीं रैंक प्राप्त की और परिवार वालों का नाम रोशन किया है।
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UPSC: दिव्यांशु राजस्थान के जयपुर जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने जयपुर के ही एक स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की है। जिसके बाद उन्होंने बिट्स पिलानी से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग से बैचलर्स की डिग्री हासिल की है। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद दिव्यांशु ने IIM कोलकाता से एमबीए किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद दिव्यांशु ने मुंबई के एक बैंक में करीब एक साल तक नौकरी भी की थी। हालांकि, दिव्यांशु अपनी इस नौकरी से संतुष्ट नहीं थे और वह समाज के लिए कुछ करना चाहते थे। फिर कुछ समय बाद ही दिव्यांशु ने नौकरी छोड़ कर पूरी तरह से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी।
इस कठिन परीक्षा की तैयारी के लिए दिव्यांशु दिल्ली आ गए थे। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा के लिए दो चीज पहले ही तय कर ली थी। पहली यह कि उनका ऑप्शनल सब्जेक्ट मैथमेटिक्स होगा। उन्हें बचपन से ही इस विषय में काफी रुचि थी और इंजीनियरिंग के दौरान भी वह कई टॉपिक पहले ही पढ़ चुके थे। दूसरी चीज यह कि प्रीलिम्स परीक्षा के लिए कोचिंग करने की जगह वह इंटरनेट और आसानी से उपलब्ध स्टडी मैटेरियल से ही तैयारी करेंगे।
दिव्यांशु ने सिविल सेवा परीक्षा के पहले अटेम्प्ट के लिए लगभग 80 से 90 मॉक टेस्ट दिए थे। इसके अलावा उन्होंने पिछले साल के पेपर भी सॉल्व किए थे। हालांकि, प्रीलिम्स परीक्षा देने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि एलिमिनेशन टेक्निक के माध्यम से वह अगले प्रयास में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। फिर दूसरे प्रयास में उन्होंने केवल 40 से 50 ही मॉक टेस्ट दिए थे लेकिन पेपर के दौरान उन्होंने एलिमिनेशन टेक्निक का उपयोग किया था। इस टेक्निक के माध्यम से उन्होंने प्रीलिम्स में पहले से ज्यादा अच्छे अंक प्राप्त किए थे। इसके अलावा करंट अफेयर्स के लिए न्यूज़पेपर और मैगज़ीन से काफी तैयारी की थी।
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दिव्यांशु का मानना है कि इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए पूरी तरह से समर्पित होकर मेहनत करनी होगी। इसके साथ ही ऑप्शनल विषय का चुनाव भी बेहद सोच समझकर करना चाहिए। उनके अनुसार पढ़ाई के साथ नियमित रूप से रिवीजन और आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस करना बेहद आवश्यक होता है। दिव्यांशु ने भी कठिन परिश्रम और सही रणनीति के चलते सिविल सेवा परीक्षा के दूसरे प्रयास में 30वीं रैंक प्राप्त की और परिवार वालों का नाम रोशन किया है।
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