UPSC: देशभर में आईएएस अधिकारी बनने का सपना तो लाखों लोग देखते हैं लेकिन सिर्फ कुछ लोगों के अंदर ही ऐसा जुनून होता है जो जीवन में आने वाली सारी बाधाओं को पार कर सफलता पाते हैं। ऐसे ही कुछ लोगों में अजीत कुमार यादव का भी नाम शुमार है, जिन्होंने न केवल कठिन परिश्रम करके यूपीएससी परीक्षा पास की बल्कि उसके बाद भी उन्हें संघर्ष का सामना करना पड़ा। आज हम अजीत के आईएएस अधिकारी बनने तक के सफर के बारे में जानेंगे।
अजीत हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के निवासी हैं। अजीत के पिता रामपथ सिंह ब्लॉक डेवलपमेंट और पंचायत ऑफिसर रह चुके हैं और उनकी माता एक ग्रहणी हैं। बता दें कि जब अजीत 5 साल के थे तभी किसी बीमारी के चलते उनके आंखों की रोशनी चली गई थी। जिसके बाद से उन्हें कदम कदम पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा लेकिन अजीत ने कभी भी अपनी कमजोरी को रास्ते में नहीं आने दिया।
अजीत ने करोल बाग के स्प्रिंग डेल स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की है। अपने स्कूल में केवल एकमात्र अजीत ही नेत्रहीन थे लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने कक्षा 9वीं और कक्षा 10वीं में टॉप किया। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद अजीत ने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन किया और फिर उन्होंने B.Ed. की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद अजीत ने दिल्ली कॉलेज में टीचिंग की नौकरी शुरू कर दी थी।
बता दें कि अजीत यादव ने साल 2008 में यूपीएससी परीक्षा में 208वीं रैंक हासिल की थी लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में कोई पद नहीं दिया गया। इसकी जगह अजीत को भारतीय रेलवे में अधिकारी पद ऑफर किया गया लेकिन अजीत ने इस पद को स्वीकार नहीं किया। साथ ही अजीत ने इस भेदभाव के खिलाफ कदम उठाया और केस दर्ज कर दिया। आखिरकार, फैसला अजीत के पक्ष में हुआ और साल 2012 में उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में अधिकारी का पद दिया गया।
The post UPSC: बचपन में ही नेत्रहीन हो गए थे अजीत, आईएएस अधिकारी बनने के लिए सिस्टम से भी करना पड़ा था संघर्ष appeared first on Jansatta.
from एजुकेशन – Jansatta https://ift.tt/2Wa1gaq
via IFTTT
UPSC: देशभर में आईएएस अधिकारी बनने का सपना तो लाखों लोग देखते हैं लेकिन सिर्फ कुछ लोगों के अंदर ही ऐसा जुनून होता है जो जीवन में आने वाली सारी बाधाओं को पार कर सफलता पाते हैं। ऐसे ही कुछ लोगों में अजीत कुमार यादव का भी नाम शुमार है, जिन्होंने न केवल कठिन परिश्रम करके यूपीएससी परीक्षा पास की बल्कि उसके बाद भी उन्हें संघर्ष का सामना करना पड़ा। आज हम अजीत के आईएएस अधिकारी बनने तक के सफर के बारे में जानेंगे।
अजीत हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के निवासी हैं। अजीत के पिता रामपथ सिंह ब्लॉक डेवलपमेंट और पंचायत ऑफिसर रह चुके हैं और उनकी माता एक ग्रहणी हैं। बता दें कि जब अजीत 5 साल के थे तभी किसी बीमारी के चलते उनके आंखों की रोशनी चली गई थी। जिसके बाद से उन्हें कदम कदम पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा लेकिन अजीत ने कभी भी अपनी कमजोरी को रास्ते में नहीं आने दिया।
अजीत ने करोल बाग के स्प्रिंग डेल स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की है। अपने स्कूल में केवल एकमात्र अजीत ही नेत्रहीन थे लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने कक्षा 9वीं और कक्षा 10वीं में टॉप किया। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद अजीत ने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन किया और फिर उन्होंने B.Ed. की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद अजीत ने दिल्ली कॉलेज में टीचिंग की नौकरी शुरू कर दी थी।
बता दें कि अजीत यादव ने साल 2008 में यूपीएससी परीक्षा में 208वीं रैंक हासिल की थी लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में कोई पद नहीं दिया गया। इसकी जगह अजीत को भारतीय रेलवे में अधिकारी पद ऑफर किया गया लेकिन अजीत ने इस पद को स्वीकार नहीं किया। साथ ही अजीत ने इस भेदभाव के खिलाफ कदम उठाया और केस दर्ज कर दिया। आखिरकार, फैसला अजीत के पक्ष में हुआ और साल 2012 में उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में अधिकारी का पद दिया गया।
The post UPSC: बचपन में ही नेत्रहीन हो गए थे अजीत, आईएएस अधिकारी बनने के लिए सिस्टम से भी करना पड़ा था संघर्ष appeared first on Jansatta.
No comments:
Post a Comment