UPSC: सफलता के रास्ते में आने वाली एक भी मुश्किल हमें अपनी मंजिल पर पहुंचने से रोक सकती है लेकिन जिस इंसान के रास्ते कठिनाइयों से भरें हो उसे अपना सफर पूरा करने के लिए बहुत ही हिम्मत और धैर्य की जरूरत होती है। ऐसा ही एक सफर तय किया है कुलदीप सिंह चहल ने। बचपन से ही संघर्ष ने जिनका पीछा नहीं छोड़ा और उन्होंने हिम्मत का साथ नहीं छोड़ा। अपनी निरंतरता, कड़ी मेहनत और हार न मानने वाले जज़्बे के साथ उन्होंने हर कठिनाई का सामना किया। जिस परीक्षा के लिए लोग सब कुछ ताक पर रखकर घंटों पढ़ाई में डूबे रहते हैं, उस परीक्षा को कुलदीप ने अपनी नौकरी और उसके साथ मिलने वाली हर ज़िम्मेदारी को निभाते हुए पास किया। आइए जानते हैं उनके इस सफर के बारे में।
कुलदीप हरियाणा के जिंद जिले के उझाना गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के एक सरकारी स्कूल से ही प्राप्त की है। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद कुलदीप ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से बैचलर्स की डिग्री हासिल की और उसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई के साथ वह सरकारी नौकरी के लिए भी परीक्षाएं दे रहे थे और इसी दौरान उनका चयन चंडीगढ़ पुलिस में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर पद पर हो गया।
कुछ समय बाद कुलदीप ने पुलिस की नौकरी के साथ ही यूपीएससी परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी थी। नौकरी छोड़ कर सिर्फ पढ़ाई पर फोकस करना कुलदीप के लिए मुमकिन नहीं था इसलिए उन्हें थाने में या कहीं भी मौका मिलता तो वह परीक्षा के लिए पढ़ने लगते थे। इसी कठिन परिश्रम और लगन के चलते कुलदीप ने आखिरकार वह मुकाम पा ही लिया जिसके लिए उन्होंने दिन रात एक कर दिया था। कुलदीप ने साल 2009 में यूपीएससी परीक्षा के तीसरे प्रयास में 82वीं रैंक के साथ सफलता प्राप्त की थी। इसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने हर बार ईमानदारी और लगन का परिचय देते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाई और एक बेहतर समाज का निर्माण करने में अपना योगदान दिया है।
आपको बता दें कि कुलदीप के पिता एक किसान थे और हमेशा से ही उन्होंने पढ़ाई से ज़्यादा किसानी को ही अहमियत दी है। वह कुलदीप को भी पढ़ाई करने की जगह घर का काम करने के लिए कहा करते थे। इस माहौल में बचपन गुज़ारने के बावजूद भी कुलदीप ने जीवन में कुछ बेहतर करने का प्रयास किया। उनके इस प्रयास में उनके बड़े भाई सुरेश चहल ने उनका भरपूर साथ दिया। कुलदीप भी अपनी सफलता का श्रेय अपने बड़े भाई को ही देते हैं क्योंकि उन्होंने ही कुलदीप को सही दिशा दिखाई थी।
UPSC: लगातार मिलने वाली असफलताओं के बावजूद भी नहीं मानी हार, फिर रुचि बिंदल ने ऐसे किया टॉप
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कुलदीप हरियाणा के जिंद जिले के उझाना गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के एक सरकारी स्कूल से ही प्राप्त की है। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद कुलदीप ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से बैचलर्स की डिग्री हासिल की और उसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई के साथ वह सरकारी नौकरी के लिए भी परीक्षाएं दे रहे थे और इसी दौरान उनका चयन चंडीगढ़ पुलिस में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर पद पर हो गया।
कुछ समय बाद कुलदीप ने पुलिस की नौकरी के साथ ही यूपीएससी परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी थी। नौकरी छोड़ कर सिर्फ पढ़ाई पर फोकस करना कुलदीप के लिए मुमकिन नहीं था इसलिए उन्हें थाने में या कहीं भी मौका मिलता तो वह परीक्षा के लिए पढ़ने लगते थे। इसी कठिन परिश्रम और लगन के चलते कुलदीप ने आखिरकार वह मुकाम पा ही लिया जिसके लिए उन्होंने दिन रात एक कर दिया था। कुलदीप ने साल 2009 में यूपीएससी परीक्षा के तीसरे प्रयास में 82वीं रैंक के साथ सफलता प्राप्त की थी। इसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने हर बार ईमानदारी और लगन का परिचय देते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाई और एक बेहतर समाज का निर्माण करने में अपना योगदान दिया है।
आपको बता दें कि कुलदीप के पिता एक किसान थे और हमेशा से ही उन्होंने पढ़ाई से ज़्यादा किसानी को ही अहमियत दी है। वह कुलदीप को भी पढ़ाई करने की जगह घर का काम करने के लिए कहा करते थे। इस माहौल में बचपन गुज़ारने के बावजूद भी कुलदीप ने जीवन में कुछ बेहतर करने का प्रयास किया। उनके इस प्रयास में उनके बड़े भाई सुरेश चहल ने उनका भरपूर साथ दिया। कुलदीप भी अपनी सफलता का श्रेय अपने बड़े भाई को ही देते हैं क्योंकि उन्होंने ही कुलदीप को सही दिशा दिखाई थी।
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