Saturday, August 24, 2019

शिक्षा: न पढ़ा पाने की कसक

ऐसे हजारों शिक्षक हैं जो पढ़ाना अपना पहला और प्राथमिक कर्तव्य समझते और मानते हैं। उनकी कक्षाएं जाकर देखें तो पाएंगे कि इन शिक्षकों के बच्चे किस स्तर पर सीख रहे हैं। इनके बच्चों के नतीजे भी संतोषजनक होते हैं, लेकिन अफसोस कि ऐसे शिक्षक अपनी ऊर्जा और रचनात्मकता के साथ स्वयं ही जूझ रहे होते हैं।

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